Wednesday, 21 July 2021

मुनव्वर : माँ से चले मज़हब पर रुके



हमेशा काले कपड़े पहिनने वाले शायर मुनव्वर राणा ने माँ पर लिखे अपने सैकड़ों शेर सुनाकर मुशायरों में खूब तालियाँ बटोरी |  देश के बाहर भी वे काफी लोकप्रिय रहे हैं | लेकिन बीते कुछ सालों से खास तौर पर नरेंद्र मोदी के प्रधानमन्त्री बनने के बाद से वे कुछ खिन्न से हैं | 2015 में एक टीवी चैनल पर चल रही चर्चा के दौरान उन्होंने बड़े ही नाटकीय ढंग से  साहित्य अकादमी अवार्ड लौटाने की घोषणा कर डाली | तबसे लगातार  वे ऐसे बयान  देते रहते  हैं जिनसे विवाद पैदा हों | कुछ समय पहले एक साक्षात्कार में वे बोल गये कि 2022 तक भारत हिन्दू राष्ट्र घोषित हो जाएगा | संसद भवन को गिराकर खेत बना देने की  मांग भी वे कर चुके हैं | उनके बेटे पर हाल ही में कायम हुए आपराधिक प्रकरण के बाद राणा परिवार के निवास पर छापे मारे जाने से भी मुनव्वर भन्नाए हुए हैं | इसी के चलते उन्होंने ये बयान तक दे डाला कि यदि योगी आदित्यनाथ दोबारा मुख्यमंत्री बने तो वे उप्र छोड़ देंगे क्योंकि तब ये सूबा मुसलमानों के रहने योग्य नहीं रह जाएगा | दो दिन पूर्व ही उन्होंने जनसँख्या नियंत्रण क़ानून को लेकर ये कटाक्ष किया कि दो से ज्यादा  बच्चे इसलिए पैदा किये जाते   हैं क्योंकि दो एनकाउन्टर में मार दिए जाते हैं , एकाध को कोरोना हो जाता है , एकाध एक्सीडेंट में मर जाता है | ये वैसे ही है जैसे लोग मुर्गी के 8 - 10 बच्चे खरीदते हैं | एक - दो बच जाएं तो बच जाएँ | हिन्दू हो या मुसलमान , एक से ज्यादा बच्चे इसलिए पैदा करता है ताकि कम से कम कोई एक बच्चा कहीं से पंचर जोड़कर , रोटी कमाकर लाए और खिला सके , बाकी को तो आप मार देंगे | इसके अलावा भी उनके तमाम ऐसे बयान हैं जिनमें  माँ की ममता को दर्शाने वाली  उनकी शायरी के सर्वथा विरुद्ध नफरत झलकती है | योगी की सरकार आने के बाद उप्र छोड़ने का ऐलान तो मुनव्वर ने कर दिया किन्तु वे ये बताने से बचे कि यदि केंद्र में एक बार फिर मोदी सरकार बनी तो क्या वे हिंदुस्तान भी  छोड़ देंगे ? ये प्रश्न इसलिए उचित है क्योंकि वे 2022 तक  भारत के हिन्दू राष्ट्र घोषित होने के साथ ये भी कह चुके हैं कि ये देश अब धर्म निरपेक्ष नहीं रहा , बल्कि ये साम्प्रदायिक हो  गया है , यहाँ अब दिन- रात सिर्फ राम की बात होती है , खबरों में  सिर्फ राम मन्दिर होता है , जबकि हिन्दुओं को खुश करने मुसलमानों को मारा जा रहा है | मुनव्वर निश्चित रूप से एक लोकप्रिय शायर रहे हैं | लेकिन अब वे विशुद्ध रूप से कट्टरपंथी मुस्लिम के रूप में खुद को पेश करने से विवादों में घिरते जा रहे हैं | बतौर भारतीय नागरिक उनको व्यवस्था से अपनी नाराजगी अभिव्यक्त करने का पूरा - पूरा अधिकार है |  अल्पसंख्यक के तौर पर  उनकी धार्मिक आजादी की  सुरक्षा भी होनी चाहिए | लेकिन  वे राजनीति करना चाहते हैं तो काव्य  के साथ - साथ सियासत  के मंच पर भी तशरीफ लेकर आयें और अपनी बात जनता के बीच रखें | लेकिन योगी के दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद  इस आधार पर उप्र छोड़ने की धमकी देना क्योंकि वह  मुसलमानों के रहने लायक नहीं रह जायेगा ,  उनके मानसिक दिवालियेपन को प्रमाणित करता है | उप्र में लगभग 20 फीसदी मुसलमान रहते हैं | इसके पहले भी वहां भाजपा की सरकार रही है | लेकिन किसी ने उप्र छोड़कर जाने के बात नहीं की | राम मन्दिर का विवाद  सर्वोच्च न्यायालय से निपट चुका है | अयोध्या  में मन्दिर और मस्जिद दोनों को जमीन दे दी गई है | अदालत के फैसले के बाद अयोध्या सहित राज्य  के बाकी हिस्सों  में किसी भी तरह का तनाव देखने में नहीं आया | अयोध्या में रहने वाले मुसलमानों ने भी फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि अब दोनों सम्प्रदाय चैन से रह सकेंगे | मंदिर निर्माण के अलावा समूचे अवध क्षेत्र में जिस तेजी से विकास हो रहा है उसकी वजह से  लोग बेहद खुश हैं | लेकिन मुनव्वर जैसे लोगों को शांति और तरक्की रास नहीं आ रही और इसीलिए वे जहर बुझे शब्द  बाण छोड़कर अपनी कुंठा ज़ाहिर करने के साथ ही  माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं | बदले हुए रूप के कारण मुनव्वर को जबर्दस्त आलोचना का सामान करना पड़  रहा है तो इसके लिए वे खुद कसूरवार हैं | मुसलमान तो वे पहले भी थे लेकिन बतौर शायर किसी ने उनके मजहब पर ध्यान नहीं दिया | लेकिन बीते कुछ सालों में उनका जो चेहरा सामने आया है उसने उनकी छवि पूरी तरह बदलकर रख दी है |

- रवीन्द्र वाजपेयी


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