कल रात भारत ने लगातार दूसरी बार टी - 20 क्रिकेट का विश्व कप जीतकर इतिहास रच दिया। तीन बार टी -20 विश्व कप जीतने का कीर्तिमान स्थापित करने वाला भी भारत पहला देश है। विराट कोहली और रोहित शर्मा द्वारा टी - 20 से संन्यास लिए जाने के बाद जब कुछ मैचों में टीम का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा तब आलोचकों ने चयनकर्ताओं पर निशाने साधते हुए उन दोनों की वापसी का दबाव बनाया। इस विश्व कप में भी भारतीय टीम ने अनेक उतार चढ़ाव देखे। सेमी फाइनल में इंग्लैंड के साथ हुआ मुकाबला श्वास रोधक रहा। 254 रनों का पहाड़ खड़ा करने के बाद लगा भारत आसानी फाइनल में पहुंच जाएगा। लेकिन इंग्लैंड जीत के बिलकुल करीब पहुंचकर महज 7 रन से ही हारा। इसीलिए जब भारत ने 255 रन बनाकर न्यूजीलैंड को 256 रन बनाकर विश्व कप जीतने की चुनौती दी तब सेमी फाइनल की यादें ताजा हो उठीं। वैसे भी न्यूजीलैंड ने फाइनल का सफ़र अत्यंत कुशलता से पूरा किया था। इसीलिये मुकाबला रोचक होने की उम्मीद थी। लेकिन सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में युवा खिलाड़ियों से भरी टीम ने पहले बल्लेबाजी और फिर गेंदबाजी में धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए अपने घर में टी - 20 विश्व कप जीतने का कीर्तिमान भी बना दिया । भारत की महिला क्रिकेट टीम भी कुछ माह पहले ही विश्व कप जीत चुकी है। इस प्रकार अब भारत क्रिकेट की दुनिया में उस बुलंदी पर है जहां कभी वेस्ट इंडीज और ऑस्ट्रेलिया हुआ करते थे। 1983 में पहला एक दिवसीय क्रिकेट विश्व कप जीतने के बाद भारतीय क्रिकेट का दबदबा बढ़ना शुरू हुआ। बीच - बीच में उतार चढ़ाव आते रहे किंतु नए खिलाड़ियों का आगमन , बेहतर प्रशिक्षण, अच्छा भुगतान और सुविधाएं मिलने से भी खेल का स्तर ऊंचा होता गया। और जबसे आईपीएल शुरू हुआ तबसे भारत क्रिकेट की नर्सरी बन गया।न्यूजीलैंड के कप्तान ने ठीक ही कहा कि भारत के पास इतनी युवा प्रतिभाएं हैं कि वह चाहे तो तीन ऐसी ही टीमें बना सकता है। आईपीएल के साथ तमाम विसंगतियां जुड़ी होने के बाद भी मानना पड़ेगा कि इसकी वजह से देश में सैकड़ों युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा साबित करने का मौका मिलने लगा वरना वे बिना तराशे हीरे की तरह रह जाते। इस जीत के बाद भारत विश्व क्रिकेट का सिरमौर बन गया है। हमारी टीम अब खेलने के लिए ही नहीं बल्कि जीतने के लिए खेलती है। भारत के बिना क्रिकेट के किसी भी बड़े आयोजन का सफल होना असम्भव है। भारत का क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड विश्व का सबसे सम्पन्न खेल संगठन है। आईपीएल ने उसकी संपन्नता और बढ़ा दी। आईसीसी में भी भारत का दबदबा बढ़ा जिसकी अध्यक्षता भी हमारे पास है। भारतीय जनता में क्रिकेट के प्रति रुचि जुनून की हद तक है। सुखद बात ये भी है कि अन्य खेलों में भी हम धीरे - धीरे आगे आ रहे हैं । ओलंपिक में भले ही पदक तालिका में भारत का स्थान काफी नीचे रहता है लेकिन विभिन्न खेलों में हमारे खिलाड़ी मुकाबले में नजर आने लगे हैं। भारत द्वारा भविष्य में ओलंपिक की मेजबानी करने का दावा प्रस्तुत करने से ये लगता है कि विश्व स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करने का आत्मविश्वास हमारे यहां उत्पन्न हो चुका है। वैसे अब ये अपेक्षा की जा सकती है कि क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड अपनी तिजोरी से अन्य खेलों के विकास में भी योगदान दे क्योंकि आज की दुनिया में विकास का पैमाना केवल आर्थिक संपन्नता ही नहीं बल्कि खेल भी हो गए हैं। इसका उदाहरण चीन है जिसने बीते दो दशकों में अमेरिका से प्रतिस्पर्धा करने के साथ ही खेलों में भी अपना दबदबा बढ़ाया और ओलंपिक पदक तालिका में दूसरा स्थान हासिल कर दिखाया। उस लिहाज से भारत काफी पीछे है किंतु संतोष की बात है कि ओलंपिक दर ओलंपिक हमारा प्रदर्शन सुधर रहा है । इसका कारण मोदी सरकार का खेलो इंडिया कार्यक्रम भी है। अन्य खेलों के खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण और अन्य सुविधाएं दिए जाने से नई पीढ़ी भी खेलों में अपना भविष्य तलाशने लगी है। मध्यम श्रेणी शहरों में भी पेशेवर प्रशिक्षकों के कारण खेलों के प्रति रुचि बढ़ी है। सबसे बड़ी बात ये है कि खेल समाज में स्वस्थ और सकारात्मक वातावरण निर्मित करने का सबसे अच्छा माध्यम है। इससे व्यक्ति में अनुशासन की भावना और संघर्ष की क्षमता विकसित होती है। गत दिवस अहमदाबाद में मिली जीत भविष्य में और बड़ी सफलताओं के प्रति खिलाड़ियों में उत्साह का संचार करेगी ये विश्वास और मजबूत हुआ है। 140 करोड़ देशवासियों को गौरव की अनुभूति कराने वाली क्रिकेट टीम का हार्दिक अभिनन्दन।
- रवीन्द्र वाजपेयी