रा.स्व.संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत इन दिनों अमेरिका की यात्रा पर हैं। संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों से सम्पर्क की योजना के सिलसिले में देश भर में संघ प्रमुख ने लोगों से प्रत्यक्ष संवाद किया। इनमें संघ की विचारधारा के विरोधियों के घर पर जाकर मिलने जैसा अभिनव कार्यक्रम भी था। इसके पीछे का उद्देश्य संघ की विचारधारा और कार्यक्रमों के बारे में उस तबके को अवगत करवाना है जिनके मन में संघ को लेकर अनेकानेक भ्रांतियां हैं। संघ इसमें कितना सफल हुआ ये तो भविष्य बताएगा किंतु इस प्रयास कहें या प्रयोग किंतु लोकतंत्र में इस तरह का संवाद एक स्वस्थ वातावरण का निर्माण करता है। उल्लेखनीय है संघ प्रमुख डॉ. भागवत पूर्व में भी मुस्लिम और ईसाई धर्मगुरुओं से भेंट करते रहे जिसे लेकर तरह - तरह की चर्चाएं भी चलीं। बीते दिनों जब दिल्ली में जंतर मंतर पर युवाओं का आंदोलन हुआ और देश में जेन जी नामक नये आयु वर्ग समूह के मन में व्यवस्था के विरुद्ध व्याप्त असंतोष राष्ट्रीय विमर्श बन गया तब भी डॉ. भागवत ने मुंबई में युवाओं से प्रत्यक्ष संवाद कर उनकी भावनाओं को समझकर उनके असंतोष को दूर करने के लिए उनके प्रति स्थापित अवधारणा और व्यवहार के तौर - तरीकों में समयानुकूल बदलाव का सुझाव दिया। इसी क्रम में वे अमेरिका प्रवास पर गए हैं जहाँ संघ के हजारों स्वयंसेवकों के अलावा हिन्दू समाज रहता है। अपने वैचारिक पक्ष को उसके सामने रखने के उद्देश्य से हो रही इस यात्रा का वहाँ कतिपय तत्व विरोध कर रहे हैं। सबसे पहले चर्चा में आया न्यूयॉर्क के महापौर ममदानी का विरोध जो ऐलनिया भारत विरोधी हैं। उसके बाद अमेरिका के सरकारी आयोग ने संघ पर प्रतिबंध लगाने और इसके नेताओं के अमेरिकी वीजा पर रोक की मांग की है। यह मांग अमेरिकी संस्था यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम ने की है।आयोग ने संघ पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमलों में शामिल होने और भारत में धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित करने का आरोप लगाते हुए संघ नेताओं को राजनयिक सम्मान न देने, उच्चस्तरीय बैठकें न करने और डॉ.भागवत का वीजा रद्द करने की सिफारिश की गई है। हालांकि ये एक सलाहकार संस्था है, इसलिए इसकी सिफारिशें मानने के लिए अमेरिकी सरकार बाध्य नहीं है।भारत सरकार ने इस आयोग को पक्षपाती और तथ्यात्मक रूप से भ्रामक बताते हुए इसकी रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया है। लेकिन जिस अमेरिका में खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों को पनाह मिलती हो और जिसने दुनिया में इस्लामिक आतंकवाद को पाल पोसकर बड़ा किया वहाँ संघ का विरोध अनाधिकार चेष्टा लगता है। और फिर जिस आयोग ने इसकी मांग की उसका अध्यक्ष ही पाकिस्तानी मूल का है। ये अच्छा है कि अमेरिका के भीतर ही संघ विरोधी मुहिम की निंदा हो रही है। यद्यपि अमेरिकी प्रशासन ने उक्त माँग पर कोई निर्णय नहीं किया किंतु इससे ये बात स्पष्ट हो गई कि अमेरिका में भी हिंदुत्व विरोधी लाॅबी काफी तेजी से सक्रिय है। इस बारे में ध्यान देने योग्य बात ये है कि हाल ही में जन्मी काकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके भी कुछ माह पहले अमेरिका से लौटे थे और उन्होंने भी यहाँ आकर संघ विरोधी बयानबाजी की। इससे ये आशंका और मजबूत हो गई कि अमेरिका से ही भारत में अस्थिरता फैलाने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। संघ प्रमुख की इस यात्रा के विरोध की शुरुआत जिस ममदानी ने की उसकी जीत पर भारत में भी उसी वर्ग विशेष ने खुशियाँ मनाई थीं जो संघ का घोर विरोधी है।
- रवीन्द्र वाजपेयी