अयोध्या का राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं अपितु दुनिया भर में फैले करोड़ों सनातन धर्म के अनुयायियों की आस्था का सर्वोच्च केंद्र है। सैकड़ों वर्षों के संघर्ष एवं अनेकानेक बलिदानों के बाद इस मंदिर का निर्माण संभव हो सका। इसके लिए बड़े - बड़े धनकुबेरों से लेकर साधारण आर्थिक स्थिति वाले हिंदुओं ने भी यथाशक्ति सहयोग प्रदान किया। मंदिर निर्माण के साथ ही अयोध्या नगरी को उसकी प्राचीन भव्यता के अनुरूप विकसित कर वहाँ समस्त आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई गईं। इसके कारण श्रद्धालुओं का तांता लगने लगा। देखते ही देखते अयोध्या ने वेटिकन सिटी तक का रिकार्ड तोड़ दिया। हिंदुओं के मंदिरों में दान चढ़ावे की परंपरा का निर्वहन करते हुए श्रद्धालुओं ने न सिर्फ नगद राशि बल्कि सोना - चांदी जैसी बहुमूल्य धातुओं का भी दान किया। तिरुपति बालाजी की तरह ही अयोध्या का राम मंदिर भी दानदाताओं के सहयोग से काफी समृद्ध होने लगा। जो भी यहाँ के दर्शनों हेतु आया मंदिर में उपलब्ध सुविधाओं और व्यवस्थाओं की प्रशंसा किये बिना नहीं रह सका। लेकिन हाल ही में मंदिर की व्यवस्था से जुड़े कुछ कर्मचारियों और पदाधिकारियों पर ये आरोप लगा कि उन्होंने चढ़ावे और दान की राशि में हेराफेरी की। जाँच और छापेमारी में कुछ लोगों के यहाँ से करोड़ों रुपये और सोना - चांदी वगै़रह मिले। जाँच हेतु गठित एस. आई. टी पूछताछ करने के उपरांत एक - दो दिन में अपनी रिपोर्ट उ.प्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप देगी। उल्लेखनीय है गत दिवस अयोध्या पहुंचकर राम मंदिर के दर्शन करने के बाद योगी जी ने दूध का दूध, पानी का पानी करने के साथ ही दोषियों को कठोरतम दंड देने का आश्वासन दिया। लेकिन इस कांड में दान और चढ़ावे के गबन के साथ जिन ट्रस्टियों का नाम जुड़ा हुआ है वे सब प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर रास्वसंघ और भाजपा से जुड़े हैं। नृपेन मिश्र जैसे पूर्व नौकरशाह भी केंद्र सरकार के विश्वासपात्र हैं जिन्हें मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। गत दिवस उनका एक साक्षात्कार टीवी पर प्रसारित हुआ जिसमें उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को निर्दोष बताने के साथ ही स्वीकार किया कि विश्वासपात्र लोगों को दायित्व देने के बाद निगरानी में कमी से ये घोटाला संभव हुआ। जिन लोगों पर संदेह है वे किसी न किसी ट्रस्टी से जुड़े होने से संदेह की सुई उन पर भी जाकर टिक रही है। दान में प्राप्त बहुत सी बहुमूल्य वस्तुओं का रिकार्ड न मिलना जाँच में सामने आया है। अनेक दान दाताओं ने इस आशय की शिकायत भी की है। बहरहाल जाँच पूरी हो जाने पर ही घोटाले का आकार और घोटालेबाजों के चेहरे सामने आएंगे। हो सकता है सीबीआई को भी जाँच की जिम्मेदारी दी जाए। लेकिन इस कांड से राम मंदिर के निर्माण से जुड़े तमाम लोगों की पुण्यायी मिट्टी में मिल गई फिर चाहे वे संघ, भाजपा या विहिप के हों या अन्य किसी क्षेत्र के । धार्मिक स्थलों की दान पेटियों में होने वाले घपले नई बात नहीं हैं। धार्मिक ट्रस्टों की संपत्ति पर अवैध कब्जे भी आम है। ये बुराई केवल हिंदुओं तक ही सीमित नहीं है। वक़्फ़ और ईसाई समुदाय की संपतियों पर भी उसी के प्रभावशाली लोगों ने कब्जे कर रखे हैं। लेकिन राम मंदिर को सामान्य धार्मिक स्थल नहीं माना जा सकता। भगवान राम के मंदिर तो पूरी दुनिया में है किंतु अयोध्या में बना ये मंदिर हर दृष्टि से विशेष है। इसके साथ आस्था भी जुड़ी है और राष्ट्रीयता की भावना भी। ये कहने में भी कोई गलती नहीं है कि इसके निर्माण से राष्ट्रीय स्वाभिमान और गौरव की वैसी ही पुनर्स्थापना हुई जैसी सोमनाथ के मंदिर के पुनरुद्धार से हुई थी। इसके निर्माण के बाद पूरी दुनिया में जो उत्साह उत्पन्न हुआ उसे इस घोटाले से धक्का पहुंचा है। मुख्यमंत्री योगी को चाहिए वे अपने आश्वासन के अनुरूप दोषियों को इतना कठोर दंड दिलवाएं जिससे आइंदा किसी में ऐसा करने का दुस्साहस न हो। इसी के साथ संघ और विहिप को भी अपने लोगों की प्रमाणिकता के प्रति सतर्क रहना होगा क्योंकि इन संगठनों के बारे में हिन्दू समाज के बड़े हिस्से में विश्वास का भाव है।
- रवीन्द्र वाजपेयी