दीपावली भारतीय पर्व परंपरा का चरमोत्कर्ष है। धन - धान्य की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी की आराधना का यह अवसर वस्तुतः सुख - समृद्धि की कामना के लिए किये जाने पुरुषार्थ को समर्पित है। अमावस्या की अंधियारी रात को मिट्टी के दियों से प्रकाशित करने का सांकेतिक महत्व यही है कि विपरीत परिस्थितियों में भी आशाओं के दीप जलाते रहना चाहिए। यद्यपि इस पर्व को अनेक पौराणिक और ऐतिहासिक घटनाओं से जोड़ा जाता है किंतु आधुनिक संदर्भों में देखें तो दीपावली विकासवादी सोच का प्रतीक है। समाज का प्रत्येक वर्ग आज के दिन समृद्धि की कामना के साथ ही उसका संकल्प भी लेता है। दीपावली पर परिवार और व्यापार सभी में श्री वृद्धि की जो परंपरा है वही हमारी प्रगति का प्रेरणास्रोत है। इसीलिए यह पर्व निर्धन और संपन्न सभी वर्गों को उत्साह से भर देता है। और इसी कारण हमारा देश अनगिनत प्रतिकूलताओं के बावजूद आगे बढ़ता जा रहा है। ज्ञान, विज्ञान, कृषि, उद्योग, व्यवसाय, अंतरिक्ष, पर्यटन, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और तकनीक आदि सभी क्षेत्रों में आज हम विश्व के प्रमुख देशों की कतार में अग्रणी स्थान पर खड़ा होने की पात्रता और क्षमता अर्जित कर सके। विश्व की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था होना निश्चित रूप से गौरवान्वित करता है। दुनिया में भारत और भारतीयों की प्रतिष्ठा में जो वृद्धि हुई वह हमारी आर्थिक और सैन्य उपलब्धियों का परिणाम है । इसका श्रेय हमारे किसानों, श्रमिकों, वैज्ञानिकों, शिक्षकों और उद्यमियों को जाता है जिन्होंने अपनी मेहनत और कार्य कुशलता का परिचय देते हुए भारत को समृद्धि और सफलता के मार्ग पर ला खड़ा किया। हालांकि, हर हाथ को काम और हर खेत को पानी देने का लक्ष्य अभी दूर है किन्तु प्रयासों की पराकाष्ठा और बुलंद हौसलों के बल पर उस तक पहुंचना असंभव भी नहीं है। देश जिस सर्वतोमुखी प्रगति के मार्ग पर बढ़ चला है उससे उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदें निश्चित तौर पर मजबूत हुई हैं। लेकिन एक वर्ग ऐसा है जो अपनी नकारात्मक मानसिकता के वशीभूत होकर निराशाजनक वातावरण बनाने में जुटा है। निजी स्वार्थों की पूर्ति हेतु राष्ट्रीय हितों की अनदेखी करना इसकी आदत सी बन गई है। करोड़ों देशवासियों द्वारा अर्जित उपलब्धियों पर अविश्वास कर लोगों का मनोबल गिराने का सुनियोजित अभियान चल पड़ा है। हालिया घटनाक्रम पर दृष्टिपात करें तो ये अनुभव होगा कि विदेशी साजिश के समानांतर देश को अस्थिर करने का षडयंत्र घरेलू स्तर पर भी जारी है जिसमें नौजवानों का उपयोग बतौर औजार किया जा रहा है। लोकतांत्रिक व्यवस्था को अराजकता से नष्ट करने का कुचक्र वही ताकतें रच रही हैं जो जनता का विश्वास अर्जित करने में असफल साबित हुई हैं। लोकतंत्र को भीड़तंत्र में बदलकर बांग्लादेश व नेपाल जैसे हालात उत्पन्न कर देश को गृहयुद्ध की आग में झोंकने की कोशिशें विकास की गति को रोकने का कारण बन सकती है।
आज दीपावली के पर्व पर हम सबका दायित्व है, अपने साथ ही देश के बारे में भी सोचें क्योंकि उसकी समृद्धि और सुरक्षा से ही हमारा और हमारी भावी पीढ़ी का भविष्य जुड़ा है। निजी महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए विदेशी ताकतों के हाथों की कठपुतली बनकर देश को अस्त - व्यस्त करने का दुष्परिणाम हम अपने पड़ोस में देख चुके हैं। ऐसे में जरूरी है हम उन ताकतों के मंसूबों को ध्वस्त करने में सहयोगी बनें जो उम्मीदों के दियों को बुझाने का कुचक्र रच रहे हैं। अतः आज लक्ष्मी माता का पूजन करते समय भारत माता को न भूलें जिसकी गोद में हम जन्मे और पले - बढ़े।
दीपावली का यह पर्व आप सबको सुख, समृद्धि और शांति प्रदान करे यही मंगल कामना है।
- रवीन्द्र वाजपेयी