Monday, 9 February 2026

अमेरिका से समझौते की प्रशंसा और आलोचना में जल्दबाजी से बचें


भारत - अमेरिका  व्यापार समझौते  का जो प्रारूप जारी हुआ उसके पक्ष और विपक्ष में विभिन्न प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। उद्योग और व्यापार जगत के ज्यादातर दिग्गजों ने उसको देशहित में बताते हुए सरकार को बधाई दी है। इसका प्रमाण शेयर बाजार में तेजी बने रहना है। आज ये खबर भी आ गई कि  समझौता की तारीख तक भारतीय निर्यातकों पर लगे अतिरिक्त टैरिफ के 40 हजार करोड़ रु. अमेरिका उन्हें लौटाएगा जो बड़ी राहत है। लेकिन दूसरी तरफ कतिपय किसान संगठन प्रचार कर रहे हैं कि  भारत के कृषि और डेरी उद्योग  की बलि चढ़ा दी गई। इसे लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा भी की गई है। ऐसे में विपक्षी दल भला कहां चुप बैठते सो उन्होंने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के समक्ष झुकने वाला आरोप लगा दिया। किसानों और दुग्ध उत्पादकों को होने वाले नुकसान की बात किसान आंदोलन के अघोषित सलाहकार रहे योगेंद्र यादव सहित वह लॉबी भी कर रही है जो मोदी सरकार का विरोध करने के बहाने ढूंढ़ती रहती है। बहरहाल समझौते के विरोधियों ने अब तक जो मुद्दे उठाए उनमें आगामी 5 सालों में 500 अरब डॉलर का सामान खरीदना भी है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा का कहना है कि भारत को अमेरिका से होने वाले आयात में ढाई गुना वृद्धि करना पड़ेगी जो फिलहाल 40 - 42 अरब डॉलर प्रतिवर्ष ही है। साथ ही कुछ फलों और पशु आहार के आयात की छूट पर भी उंगलियां उठ रही हैं। लेकिन प्रधानमंत्री और इस समझौते के  प्रमुख पात्र वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि सरकार  किसानों के हितों की रक्षा करने प्रतिबद्ध रही है। लेकिन सबसे सटीक स्पष्टीकरण कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिया। उनके मुताबिक सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, अनाज, पोल्ट्री, डेयरी उत्पाद, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, काबुली चना, मूंग, तिलहन, एथनॉल और तंबाकू जैसे उत्पादों पर अमेरिका को  कोई रियायत नहीं मिली। वहां  से दूध, पाउडर, क्रीम, दही, छाछ, मक्खन, घी, बटर ऑयल, पनीर और चीज जैसे किसी भी डेयरी उत्पाद का आयात करने पर भारत राजी नहीं हुआ। उन्होंने भारतीय मसालों को भी  खतरे से बाहर बताया। लेकिन कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा ने उक्त समझौते की ये कहते हुए आलोचना की है कि सरकार ने कुछ उत्पादों के आयात की अनुमति देकर भारत के कृषि उद्योग को नुकसान पहुंचाने का रास्ता खोल दिया है। चूंकि अभी तक समझौते का प्रारूप ही जारी हुआ है इसलिए समर्थन और विरोध में किए जा दावों और प्रतिदावों की पुष्टि  संभव नहीं है। मार्च में जब समझौते पर हस्ताक्षर होंगे तब ही ये बात सामने आ सकेगी कि प्रशंसक सही हैं या आलोचक ? ट्रम्प के इस दावे पर भी सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि भारत ने रूस से कच्चा तेल आयात करना बंद कर दिया जिसके कारण 25 प्रतिशत की पेनाल्टी  घटा दी गई। रूस ने तो इसका खंडन कर दिया किंतु भारत सरकार की कोई टिप्पणी अभी तक नहीं आई। यद्यपि पहले भी ट्रम्प इस तरह के शिगूफे छोड़ते रहे हैं किंतु भारत ने तेल खरीदना जारी रखा। अमेरिका सरकार के अनेक प्रवक्ताओं का साफ कहना है कि भारत ने रूस से तेल खरीदी नहीं रोकी तब 25 का  टैरिफ दोबारा थोप दिया जाएगा। ऐसे में समझौते के विस्तृत प्रारूप पर हस्ताक्षर होने  के पहले भारत  को इस मुद्दे पर अमेरिका से दो टूक बात कर लेना चाहिए। ये बात तो सही है कि कोई भी समझौता एकपक्षीय नहीं हो सकता। अमेरिका यदि भारत के साथ होने वाले व्यापार घाटे को कम करना चाह रहा है तो ये उसका अधिकार है। हर देश इस बारे में प्रयासरत रहता है। चूंकि अभी तक अमेरिका हमारा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा जो हमारे सामान पर शून्य टैरिफ लगाता था इसलिए 18 प्रतिशत का टैरिफ निश्चित रूप से भारी है। लेकिन उससे पूरी तरह कारोबारी रिश्ते तोड़ना अव्यवहारिक भी है और असम्भव भी । इसीलिए भारत ने  टैरिफ हमले के जवाब में अनेक देशों से मुक्त व्यापार संधि करते हुए विश्व व्यापार में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति का दांव चला। शुरू में तो ट्रम्प ने इसे हल्के में लिया किंतु जैसे ही यूरोपीय यूनियन से संधि हुई उनको चिंता सताने लगी जिसके बाद उन्होंने समझौता होने की घोषणा कर दी। यद्यपि गतिरोध खत्म होना तो खुशी की बात है किंतु अब कोई ऐसी मजबूरी नहीं है कि अमेरिका को वे रियायतें दी जाए जो  हमारे किसान ही क्यों  उद्योगपति और व्यापारी के हितों के भी विरुद्ध हों। सरकार लोगों की नाराजगी से बचने के लिए किसी बात पर अभी पर्दा डाल भी दे किंतु जब समझौता अपने विस्तृत रूप में सामने आएगा तब तो सब स्पष्ट होगा ही। इसलिए बेहतर है सरकार पूरी ज़िम्मेदारी से ही समझौते संबंधी जानकारी दे क्योंकि सूचना क्रांति के इस युग में कुछ भी छिपा नहीं रह सकता। वैसे आलोचकों को भी जल्दबाजी से बचना चाहिए।


- रवीन्द्र वाजपेयी

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