Monday, 2 February 2026

मौजूदा परिस्थितियों के मद्देनजर संतुलित है बजट


यदि यही बजट कांग्रेस सरकार का होता तब भाजपा की टिप्पणियां भी वैसी ही होतीं जैसी कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों के नेताओं से सुनने मिलीं। वैसे भी बजट  पर तत्काल प्रतिक्रिया देना आसान नहीं होता। आम जनता की  रुचि  आयकर छूट में वृद्धि और दैनिक उपयोग में आने वाली  वस्तुओं की कीमतों में कमी या वृद्धि होती है। लेकिन बजट के कुछ प्रावधानों के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं । वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार नौवाँ बजट पेश करने से स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री  को उन पर भरोसा है। हालांकि इस पद पर आसीन व्यक्ति को लोकप्रियता कम ही मिलती है क्योंकि सरकारी  योजनाओं एवं कार्यों का श्रेय या तो  प्रधानमंत्री को मिलता है अथवा संबंधित विभाग के मंत्री को। पहले  बजट के बारे में यही चर्चित होता था कि कि कर कितना बढ़ा और क्या महंगा , क्या सस्ता हुआ? रेलवे  बजट अलग  प्रस्तुत होने से मुख्य बजट का आकार भी  कम ही होता था । आजकल एक ही  बजट में  सरकार अपना आर्थिक नियोजन देश के सामने रखती है। लेकिन भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका के कारण अब दुनिया भर के विशेषज्ञ इसका विश्लेषण करते हुए भारत की आर्थिक सेहत  का आकलन करते हैं। इसीलिए अब उसे वैश्विक परिस्थितियों और जरूरतों के मुताबिक तैयार किया जाता है। गत दिवस प्रस्तुत बजट में भी इसीलिए दुनिया के साथ कदम मिलाकर चलने का आत्मविश्वास व्यक्त किया गया है। इसीलिए कल  शेयर बाजार में आई गिरावट के बाद आज सकारात्मक संकेत आने लगे । हालांकि इस बजट में आम उपभोक्ता , व्यवसायी और उद्योगपतियों को सीधे लाभ होते भले न दिखे लेकिन उसकी बुनावट कुछ इस तरह की है जिससे सभी वर्गों को वित्तीय और व्यवस्था की दृष्टि से राहत मिलेगी। अधो संरचना के लिए भरपूर प्रावधानों के अलावा आयकर से जुड़ी तमाम परेशानियां दूर करने का प्रयास अच्छा कदम है। इसी के साथ विदेश में संपत्ति , विदेश यात्रा से लौटने पर लाये जाने वाले सामान पर शुल्क में सरलीकरण  से लोगों को लाभ मिलेगा। देश में विदेशी निवेश के आने के लिए अनुकूल वातावरण बनाने का प्रयास भी स्वागतयोग्य है। चिकित्सा सुविधाओं के विकास की दिशा में जो सोच दर्शाई गई वह विकसित भारत की कल्पना को साकार करने में सहायक साबित होगी। आधुनिकतम तकनीक को अपनाकर उसका  विकास करना समय की मांग है जिसका वित्त मंत्री ने काफी ध्यान रखा। रक्षा खर्च में वृद्धि के अलावा इस क्षेत्र में आत्म निर्भरता हेतु  प्रावधान महत्वपूर्ण कदम है। कोरोना काल में उत्पन्न संकट से दुनिया उबर पाती उसके पहले ही रूस - यूक्रेन और इजराइल - हमास के बीच युद्ध होने से पूरी दुनिया हिल गई। बची - खुची कसर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सनकीपन ने पूरी कर दी जिसके चलते पूरी दुनिया में उथल - पुथल है। ट्रम्प ने भारत पर टैरिफ थोपकर उसे दबाने का काम किया किन्तु प्रधानमंत्री मोदी ने उसे न सिर्फ बेअसर किया बल्कि  वैकल्पिक बाजार खड़े कर भारत को संकट से उबारने का रास्ता तैयार कर दिया। इसीलिए इस बजट से  सीधे - सीधे फायदा लोगों को न दिखे किंतु  सूक्ष्म विश्लेषण करने पर  महसूस होता है कि इसमें मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रावधान हैं जिनसे कि अव्वल  तो लोगों पर बोझ न बढ़े और अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें लाभान्वित भी किया जावे। आयकर छूट की सीमा चूंकि गत वर्ष बढ़ाई जा चुकी थी इसलिए उसे नहीं  छुआ गया किंतु आयकर संबंधी सुधारों के माध्यम से व्यवस्था के सरलीकरण का प्रयास जरूर किया गया। कैंसर सहित कुछ जीवनरक्षक दवाओं को आयात शुल्क से मुक्त करना  संवेदनशीलता का प्रमाण है। गत वर्ष  जीएसटी सुधारों से आम उपभोक्ता को सीधा लाभ पहुंचाया जा चुका है। इसीलिए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव सामने होने पर भी  लोक - लुभावन घोषणाओं से बचते हुए ऐसा बजट तैयार किया गया जिसमें सभी वर्गों का लाभ है। विकसित भारत  पर केंद्रित यह बजट देश के आत्मविश्वास  भी परिचायक है। अन्यथा विकास के नाम पर आम जनता और उद्योग - व्यवसायियों पर करों का भार बढ़ाया जाता। आयात और विदेश व्यापार  में दी गई  राहत  साहसिक कदम है। राजमार्गों के साथ ही रेल कारीडोर और विमानों का भारत में निर्माण महत्वाकांक्षी कदम हैं जिनसे दुनिया की नजर में देश की छवि सुधरती है। बजट में कुछ जोखिम भी उठाए गए हैं जिनका निहित उद्देश्य ट्रम्प टैरिफ से उत्पन्न हालातों का सामना करना है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि मौजूदा  परिस्थितियों में इससे संतुलित बजट वित्त  मंत्री पेश नहीं कर सकती थीं। हालांकि इससे होने वाले फायदे और नुकसान सामने आने में थोड़ा वक्त लगेगा। फिर भी इतना तो कहा ही जा सकता है कि यदि बजट ने कुछ दिया नहीं तो  कुछ छीना भी नहीं। और जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था डांवाडोल है तब भारत में आर्थिक स्थिरता बनाए रखना भी बड़ी बात है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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