Friday, 27 February 2026

केजरीवाल - सिसौदिया दोषमुक्त लेकिन सीबीआई कठघरे में



दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया सहित दो दर्जन आरोपियों को बहुचर्चित शराब घोटाले में स्थानीय राउज एवेन्यू अदालत द्वारा दोषमुक्त मानकर सीबीआई के जांच  अधिकारी की विभागीय जांच का आदेश दे दिया। अदालत ने सीबीआई द्वारा प्रस्तुत आरोप पत्र में खामियां पाते हुए स्पष्ट कर दिया कि वह आरोपियों के विरुद्ध समुचित प्रमाण और साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी। उल्लेखनीय है केजरीवाल सरकार द्वारा लागू की गई शराब नीति को लेकर काफी हल्ला मचा था। सीएजी रिपोर्ट में उक्त नीति से दिल्ली सरकार को दो हजार करोड़ रु. के नुकसान का खुलासा होने के बाद कांग्रेस ने उपराज्यपाल से शिकायत करते हुए जांच की मांग के साथ ही श्री केजरीवाल से त्यागपत्र भी मांगा। हालांकि बाद में जब उनकी गिरफ्तारी हुई तब कांग्रेस ही उनके बचाव में कूद पड़ी। यहां तक कि दिल्ली में विपक्ष की एक रैली में सोनिया गांधी ने मंच पर उनकी पत्नी को अपने बगल में बिठाकर सबको चौंकाया। इस मामले में केजरीवाल सरकार के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया के  अलावा तेलंगाना के तत्कालीन मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी के. कविता भी गिरफ्तार हुई थीं, जिनका संबंध दक्षिण भारत की उस शराब लॉबी से बताया गया जिसकी उक्त शराब नीति में बड़ी भूमिका चर्चा में रही। बहरहाल निचली अदालत के  फैसले से श्री केजरीवाल और उनके दाहिने हाथ श्री सिसौदिया को राहत मिल गई। इसमें दो मत नहीं कि गत वर्ष दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की पराजय के पीछे उक्त विवाद का भी योगदान रहा। आम आदमी पार्टी की भ्रष्टाचार विरोधी छवि को शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी ने बुरी तरह धूमिल कर दिया। हालांकि सीबीआई निचली अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं है । उसके वकीलों के अनुसार वे फैसले का अध्ययन करने के उपरांत उच्च न्यायालय में इसके विरुद्ध अपील करेंगे। उच्च न्यायालय इस फैसले पर क्या रुख अपनाता है इसका अनुमान लगाना मुश्किल है लेकिन निचली अदालत ने सभी आरोपियों को पूरी तरह दोषमुक्त मानने के जो कारण बताए उनसे सीबीआई की क्षमता पर एक बार फिर सवाल खड़े होंगे। सीएजी रिपोर्ट में शराब नीति से दिल्ली सरकार को हुए नुकसान पर कांग्रेस ने उपराज्यपाल को शिकायत देकर जांच की मांग की थी । उसी के बाद इस मामले ने जोर पकड़ा। बाद में सीबीआई के साथ ही ईडी भी जांच में शामिल हो गई । निचली अदालत ने शराब नीति में भ्रष्टाचार के आरोपों को रद्द  करने के जो कारण बताए  उनसे सीबीआई कठघरे में खड़ी हो गई । फैसले में साफ कहा गया है कि एक हजार पृष्ठ का आरोप पत्र अपर्याप्त प्रमाणों के अभाव में स्वीकार करने योग्य नहीं हैं। अदालत ने सीबीआई के जांच अधिकारी की विभागीय जांच का आदेश देकर मामले को नया मोड़ दे दिया। इस फैसले से सीबीआई की साख एक बार फिर गिरी है। यही हाल ईडी का भी है। दोनों जांच एजेंसियों पर विपक्ष ये आरोप लगाता है कि वे सरकार के दबाव में काम करती हैं। ये बात भी सही है कि इन एजेंसियों द्वारा शुरुआत तो धमाकेदार अंदाज में की जाती है लेकिन ज्यादातर मामलों में वे आरोपों को साबित करने में सफल नहीं रहतीं। इसका एक कारण उन पर काम का जबरदस्त बोझ भी है। इस फैसले के बाद शराब घोटाले संबंधी सीएजी की रिपोर्ट पर भी उंगलियां उठेंगी क्योंकि उसी के आधार पर कांग्रेस ने पहली शिकायत दर्ज करवाई थी। हो सकता है सीबीआई उच्च न्यायालय में अपील करते हुए इस फैसले पर स्थगन प्राप्त करने में कामयाब हो जाए लेकिन निचली अदालत द्वारा उसके आरोप पत्र को सिरे से खारिज किया जाना इस बात का प्रमाण है कि उसने ठीक से जांच नहीं की और इसीलिए वह समुचित प्रमाण और गवाह पेश करने में विफल रही। इस फैसले से केंद्र सरकार को भी आलोचना का शिकार होना पड़ेगा क्योंकि सीबीआई उसी के अधीन है। भले ही कांग्रेस ने शराब नीति के विरुद्ध मोर्चा खोलकर केजरीवाल सरकार के लिए मुसीबत खड़ी की हो किंतु आज के फैसले के बाद विपक्ष को ये कहने का अवसर मिल गया कि केंद्र सरकार सीबीआई का दुरुपयोग विपक्ष को घेरने के लिए करती है। आरोप मुक्त होने वाले नेताओं ने भाजपा पर आरोप लगाना शुरू भी कर दिया। अब उच्च न्यायालय में इस फैसले के  विरुद्ध की जाने वाली अपील का क्या हश्र होता है ये तो भविष्य बताएगा किंतु निचली अदालत के फैसले ने जहां सीबीआई और केंद्र सरकार को जबरदस्त झटका दिया है  वहीं आम आदमी पार्टी को खुलकर होली खेलने का अवसर प्रदान कर दिया।

- रवीन्द्र वाजपेयी 

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