Saturday, 31 January 2026

हामिद अंसारी की नजर में महमूद गजनवी विदेशी नहीं भारतीय था


पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने एक हालिया साक्षात्कार में महमूद गजनवी को विदेशी मानने से इंकार करते हुए उसे भारतीय लुटेरा बता दिया। इसके पहले भी वे अनेक विवादास्पद बयान देकर अपनी किरकिरी करवा चुके हैं। गाजीपुर (उ.प्र) के जिस प्रसिद्ध अंसारी परिवार से वे जुड़े हैं संयोगवश कुख्यात माफिया मुख्तार अंसारी भी उसी से था। हालांकि इस परिवार का इतिहास काफी समृद्ध रहा किंतु अब इसकी प्रतिष्ठा धूल - धूसरित हो चुकी है। मुख्तार के कारनामों ने तो खानदान के नाम पर कालिख पोती ही लेकिन देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद पर बैठने  वाले हामिद अंसारी भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे। सवाल ये है कि गजनवी को भारतीय लुटेरा बताने जैसा अपना शोध उन्होंने उपराष्ट्रपति रहते उजागर क्यों नहीं किया? विदेश सेवा में रहते हुए विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हामिद अंसारी को जब लगा कि अब उन्हें कोई सरकारी पद मिलने की संभावना नहीं बची तब उन्हें देश में मुसलमान असुरक्षित नजर आने लगे।    प्रसिद्ध पत्रकार प्रदीप सिंह का आरोप है कि अंसारी ने ईरान में भारत के दूत रहने के दौरान  वहां कार्यरत रॉ के एक अधिकारी की जानकारी ईरान की गुप्तचर एजेंसी सवाक को दे दी थी । उसके बाद उस अधिकारी का अपहरण कर लिया गया था किंतु उसे छुड़ाने के लिए अंसारी ने कोई प्रयास नहीं किया। 2017 में देश की गुप्तचर एजेंसी रॉ के अनेक पूर्व अधिकारियों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि हामिद  अंसारी के कार्यकाल की जांच कराई जावे। एक पाकिस्तानी  पत्रकार ने तो ये कहकर सनसनी मचा दी थी कि वह उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के आमंत्रण पर भारत आया और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आई .एस.आई के लिये महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाईं। इस पर अपना पल्ला झाड़ते हुए अंसारी ने सफ़ाई दी कि विदेशी पत्रकारों को सरकार के कहने पर  आमंत्रित किया जाता था। इन सबसे ये स्पष्ट होता है कि उनको देश ने जो सम्मान दिया वे उसके पात्र नहीं थे। महमूद गजनवी को विदेशी नहीं मानने की उनकी सोच उनकी दूषित और  क्षुद्र मानसिकता का प्रमाण है। उनकी मानें तो गजनवी को राजनीतिक सुविधा के लिए विदेशी लुटेरा कहा जाता है। इतिहास साक्षी है कि भारत पर 17 बार हमला करने वाले गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को भी लूटा था। वह एक क्रूर व्यक्ति था जिसने सनातन धर्म के अनेक पवित्र स्थलों को ध्वस्त किया। अंसारी  उसे भारतीय लुटेरा बताकर क्या साबित करना चाहते हैं ये तो वही जानें किंतु गनीमत है उन्होंने  उसे लुटेरा तो माना।  दरअसल अंसारी की बातें उन वामपंथी इतिहासकारों की सोच से प्रभावित हैं जो अकबर को धर्मनिरपेक्ष मानते तथा औरंगजेब की शान में कसीदे पढ़ते है। अब देखना ये है कि राहुल गांधी , ममता बैनर्जी, अखिलेश यादव जैसे नेता महमूद गजनवी को भारतीय लुटेरा बताए जाने पर हामिद अंसारी की निंदा करते हैं या मुस्लिम तुष्टीकरण की खातिर उनकी हाँ में हाँ मिलाएंगे। असदुद्दीन ओवैसी की प्रतिक्रिया भी अपेक्षित है।  गौरतलब है कि अंसारी ने ये कहने से परहेज किया कि महमूद गजनवी धर्मांध मुसलमान था और उसने हिन्दू मंदिरों और जनता को ही निशाना बनाया। बड़ी बात नहीं भविष्य में वे महमूद गजनवी को धर्म निरपेक्ष और पृथ्वीराज चौहान को कट्टरपंथी बताने लग जाएं। आश्चर्य नहीं होगा यदि उनके भीतर छिपा इतिहासकार ये भी  बताने लगे कि महमूद गजनवी तो पर्यटक के रूप में आया था किंतु यहां  के लोगों ने उसे परेशान किया  जिसके कारण उसने लूटपाट की। देश के उपराष्ट्रपति रह चुके हामिद अंसारी द्वारा इस प्रकार की बयानबाजी इतिहास को झुठलाने के साथ ही विदेशी आक्रांताओं को निर्दोष साबित करने का घिनौना प्रयास है। वे कांग्रेस पार्टी के कृपापात्र रहे हैं। ऐसे में उससे ये अपेक्षा करना गलत नहीं है कि वह पूर्व उपराष्ट्रपति के इस विचार की निंदा करे। महमूद गजनवी को भारतीय लुटेरा कहकर भ्रम पैदा करने का प्रयास बेहद खतरनाक है। यदि इसका विरोध नहीं किया जाता तो वह दिन दूर नहीं जब चंगेज खां और नादिर शाह की तारीफ के पुल भी बांधे जाने लगेंगे।


- रवीन्द्र वाजपेयी

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