Thursday, 1 January 2026

बजट में आयकर और जीएसटी पर क्रांतिकारी निर्णय की अपेक्षा



आज से एक माह बाद केन्द्र सरकार आगामी वित्तीय वर्ष के लिए बजट पेश करेगी। प्रशासनिक स्तर पर तो इसकी तैयारियां काफी पहले शुरू हो जाती हैं किंतु ऐसे नीतिगत निर्णयों के बारे में प्रधानमंत्री सहित नीति आयोग के सदस्य और विभिन्न क्षेत्रों के आर्थिक विशेषज्ञ  विमर्श करते हैं जिनका अर्थव्यवस्था पर  दूरगामी असर होता है। वैसे तो  पी. वी. नरसिम्हा राव के शासनकाल से ही भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ने लगा था जिसे बाद में अटलबिहारी वाजपेयी और फिर डॉ. मनमोहन सिंह ने भी जारी रखा। लेकिन 2014 में नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आते ही भारत को बड़े देशों के साथ प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया। आत्मनिर्भर भारत के  नारे का विपक्ष चाहे जितना उपहास करे किंतु  संपन्न देशों की कोई भी बैठक भारत  के बिना पूरी नहीं होती। वैश्वीकरण की शुरुआत  में विकसित देशों के  लिए भारत केवल बड़ा उपभोक्ता बाजार था। इसीलिए  ये आशंका थी कि विश्व व्यापार संगठन के साथ जुड़ने से हमारी आत्मनिर्भरता नष्ट हो जाएगी। और ऐसा हुआ भी जब विदेशी  उत्पाद भारतीय बाजारों में छा गए। इससे कई घरेलू उद्योग बंद हो गए। लेकिन मोदी सरकार ने भारत को  उपभोक्ता  की छवि से उबारकर एक बहुमुखी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए कदम उठाए। जिनमें  स्वदेशी की भावना से प्रेरित होकर निर्यातक बनने का उत्साह था। हालांकि आज भी हम पूरी तरह से आत्मनिर्भर नहीं बन सके किंतु  सरकार आम भारतीय का मनोबल ऊंचा करने में सफल रही तो उसका कारण सही नीतियां और उन पर समयबद्ध अमल करने की प्रतिबद्धता है। कोरोना जैसी विषम परिस्थिति में भी जनता के स्वास्थ्य और उदर पोषण संबंधी व्यवस्था ने देश को अराजकता से बचा लिया। लाभार्थी योजनाओं के जरिए  वंचित वर्ग के  जीवन स्तर को उठाने के साथ ही  छोटी -  छोटी जरूरतें पूरी करने के लिए नगद राशि जैसी योजनाओं को शुरू करना बड़ी चुनौती थी। लेकिन सरकार ने ये साबित किया कि व्यवस्था में जो छिद्र हैं उन्हें भर दिया जाए तो आम जनता को भ्रष्टाचार से  बचाते हुए भी लाभान्वित किया जा सकता है। ये कहना गलत नहीं होगा कि कुछ अपवाद छोड़  दें तो  केंद्र सरकार में  बड़े फैसले लेकर  उन्हें जमीन पर उतारने की इच्छाशक्ति है। गत वर्ष के  बजट में आयकर छूट की सीमा 12 लाख तक बढ़ाने और उसके बाद जीएसटी की दरों में कमी तथा बीमा क्षेत्र को उससे मुक्त करने जैसे साहसिक कदम उठाना निश्चित रूप से बढ़ते आत्मविश्वास का प्रमाण है। इसी तरह निःशुल्क चिकित्सा हेतु 5 लाख रु. की आयुष्मान  योजना का लाभ 70 वर्ष के हो चुके सभी वरिष्ट नागरिकों को  प्रदान करने का निर्णय भी जनहित में ही है। इनसे साबित हो गया कि सरकार का आर्थिक प्रबंधन बेहतर हुआ जिसके कारण वह जनहित  में बड़े निर्णय करने में सक्षम है। भारत का दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाने से ये उम्मीद करना गलत नहीं होगा कि आयकर को पूरी तरह समाप्त कर ऐसी वैकल्पिक कर प्रणाली लागू की जाए जिससे काले धन नामक वायरस से देश को मुक्ति मिले तथा हर व्यक्ति ज्यादा से ज्यादा कमाई करने प्रेरित हो ताकि उसका जीवन स्तर सुधरने के साथ ही देश भी मजबूती से खड़ा हो सके। प्रमाणित सत्य है कि करों का जाल जितना छोटा होगा लोगों का आर्थिक व्यवहार उतना ही साफ - सुथरा होता है। इसी तरह जीएसटी में भी ज्यादा से ज्यादा 5 और 12 प्रतिशत की दो दरें ही रहें जिससे  उपभोक्ता और उत्पादक दोनों को लाभ होने के साथ ही व्यवस्था संबंधी जटिलता खत्म हो जिसका परिणाम भ्रष्टाचार में कमी के रूप में देखने मिलेगा। प्रधानमंत्री द्वारा दो दिन पहले ली गई बैठक में हुए विचार - विमर्श का विवरण तो अज्ञात है किंतु सरकार यदि चाहे तो आयकर और जीएसटी के ढांचे में क्रांतिकारी परिवर्तन कर सकती है। अर्थव्यवस्था की मजबूती और विश्व में सबसे ज्यादा विकास दर से बड़े फैसलों की जमीन तैयार है। इनके अलावा पेट्रोल - डीजल को जीएसटी में शामिल करना भी जनता को भी राहत पहुंचाने वाला होगा। वैसे भी अनेक राज्यों के विधानसभा चुनाव सामने होने से प्रधानमंत्री  राहत का पिटारा खोले बिना नहीं रहेंगे।

- रवीन्द्र वाजपेयी 


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