Monday, 26 January 2026

आज का भारत आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का प्रतीक है


     अभूतपूर्व वैश्विक उथल - पुथल के बीच भारत आज अपना 77 वाँ गणतंत्र दिवस मना रहा है। स्वाधीनता तो 15 अगस्त 1947 को मिल गई थी किंतु सही मायने में 26 जनवरी 1950 को देश ब्रिटिश दासता से मुक्त हुआ जब भारत ने अपना संविधान लागू कर एक संप्रभु गणराज्य के तौर पर खुद को विश्व पटल पर स्थापित किया।
    आज राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष सुश्री उर्सुला वॉन डेर लेयेन की उपस्थिति ने पूरी दुनिया को संकेत दे दिया कि आज का भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए फैसले लेने में स्वतंत्र है। उल्लेखनीय है सुश्री लेयेन कल भारत के साथ मुक्त व्यापार संधि हस्ताक्षरित करने वाली हैं जिसे उन्होंने मदर ऑफ ऑल डील्स कहकर पूरी दुनिया में हलचल मचा दी। बीते दो दशक से इस संधि पर वार्ताओं का दौर चल रहा था। संभवतः कतिपय कूटनीतिक और आर्थिक मजबूरियों के कारण बात अटकी रही ।
   बीते एक साल में दबाव की कूटनीति के अंतर्गत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को घेरने का भी हरसंभव प्रयास किंतु उन्हें सफलता हाथ नहीं लगी। ट्रम्प को लगता था कि टैरिफ नामक उनकी धौंस के आगे भारत घुटनाटेक हो जाएगा किंतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक स्वाभिमानी राष्ट्र के रूप में अपनी स्वतंत्र नीति लागू करते हुए पूरी दुनिया में संभावनाएं ढूंढ़ी जिसका परिणाम अनेक देशों के बाद यूरोपीय यूनियन के साथ होने जा रही मुक्त व्यापार संधि है।
     गत वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के  अंतर्गत पाकिस्तान  स्थित आतंकवादियों के अड्डे तो तबाह किए ही उसके बेहद संवेदनशील ठिकानों पर भी सटीक निशाने साधे। उस युद्ध से ट्रम्प चिढ़ गए क्योंकि पाकिस्तान में छिपाकर रखे गए अमेरिकी परमाणु अस्त्रों के जखीरे के निकट तक भारतीय मिसाइलों ने धमाके कर डाले। उसी के बाद से अमेरिका पाकिस्तान के प्रति नर्म होकर भारत को दबाने में जुट गया। ट्रम्प ने युद्धविराम करवाने का श्रेय लूटने का भरसक प्रयास किया किन्तु भारत ने जब उनके दावे की पुष्टि से इंकार किया तब उन्होंने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर 50 फीसदी  टैरिफ लगाकर अपनी खीझ निकाली।

   लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि अपने हितों की रक्षा करने के लिए वह अपना रास्ता खुद चुन सकता है। इस नीति के कारण वैश्विक मंचों पर हमारी गणना एक ऐसे देश के तौर पर होने लगी जो अमेरिका  जैसी विश्व शक्ति के दबाव को भी ठुकराने का माद्दा रखता है। 
       इसीलिए आज का गणतंत्र दिवस कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे समय जब पूरी दुनिया अस्थिरता और अनिश्चितता से जूझ रही है तब भारत ने राजनीतिक स्थिरता के साथ ही आर्थिक और सामरिक क्षेत्र में जो दृढ़ता दिखाई उसकी वजह से वैश्विक समस्याओं को सुलझाने के लिए पूरा विश्व हमारी ओर निहार रहा है। जो यूरोप कभी अपनी नस्लीय श्रेष्ठता के अहंकार में डूबकर भारत को सपेरों और मदारियों का देश समझकर उसका मजाक उड़ाता था आज वही अमेरिकी आतंक से बचने भारत के पास आने मजबूर है। रूस , चीन , द. अफ्रीका , ऑस्ट्रेलिया , न्यूजीलैंड सहित लैटिन अमेरिकी देशों तक में भारत के साथ कूटनीतिक और आर्थिक रिश्ते मजबूत करने का भाव जाग उठा है।

    लेकिन हमारे घर  में ही कुछ तबके हैं जो देश की बढ़ती शक्ति और महत्व को स्वीकार करने के बजाय लोगों का मनोबल गिराने के काम में जुटे हैं। निहित राजनीतिक स्वार्थों की खातिर ये वर्ग सेना के पराक्रम पर संदेह करने की हद तक जाने में भी संकोच नहीं करता। लोकतंत्र के भविष्य और चुनाव प्रक्रिया को लेकर जो दुष्प्रचार किया  जाता है उसके पीछे जनता को  भड़काकर बांग्लादेश और नेपाल जैसी आग में भारत को  झुलसाने का षडयंत्र ही है। विदेशों में बैठी भारत विरोधी ताकतें इस षडयंत्र को बढ़ावा देने तत्पर रहती हैं। लेकिन जनता ने लगातार इसे विफल कर लोकतंत्र और संविधान द्वारा संचालित निर्वाचन प्रणाली में अपना विश्वास व्यक्त दोहराया है।
       बीते एक दशक में भारत ने हर क्षेत्र में ऊंची छलांगें लगाई हैं। इस कारण हर देशवासी का मन आत्मविश्वास से भरा हुआ है। कोरोना के बाद जब दुनिया भर की  बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हिल उठीं तब हमारी अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ते हुए पूरी दुनिया का हौसला बढ़ा रही है। आज का भारत आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का प्रतीक  है। हमारे अड़ोस - पड़ोस में जब अराजकता व्याप्त है तब जीवंत लोकतंत्र के कारण देश की छवि एक परिपक्व देश के तौर पर स्थापित हो चुकी है।

     हर्षोल्लास के इस अवसर पर हमें इस बात का भी आत्मावलोकन करना चाहिए कि देश को मजबूत बनाने में हमारी भूमिका क्या है क्योंकि गणतंत्र तभी सार्थक होता है जब उसमें प्रत्येक नागरिक का सकारात्मक योगदान हो।  यह राष्ट्रीय पर्व हमारे दायित्वबोध को जाग्रत करे इसी अपेक्षा और अनुरोध के साथ गणतंत्र दिवस पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।


- रवीन्द्र वाजपेयी

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