भाजपा इस बात का जश्न मना रही है कि नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद पर सर्वाधिक समय तक रहने का स्व.पं. जवाहरलाल नेहरू का कीर्तिमान तोड़ दिया। हालांकि वे स्व. इंदिरा गांधी के मुकाबले काफी पीछे हैं। लेकिन किसी गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री का 12 वर्ष से पद पर बने रहना कल्पनातीत था। यद्यपि स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने उस भ्रांति को ध्वस्त किया था कि विपक्ष में सरकार चलाने की योग्यता नहीं है। उन्होंने 1999 से 2004 तक लगातार गठबंधन सरकार चलाकर राजनीतिक कौशल का परिचय तो दिया ही ये बात भी साबित कर दी कि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा ही कांग्रेस का विकल्प है। इसीलिये दस साल बाद जब डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार के विरुद्ध सत्ता विरोधी लहर उत्पन्न हुई तब जनता ने नरेंद्र मोदी को स्पष्ट बहुमत प्रदान किया । उल्लेखनीय है श्री वाजपेयी और श्री मोदी कभी कांग्रेस में नहीं रहे। भाजपा को मुख्यधारा की पार्टी बनाने में अटल जी और लालकृष्ण आडवाणी की जोड़ी का योगदान अविस्मरणीय है। लेकिन उसका विस्तार राष्ट्रीय स्तर पर करने का श्रेय श्री मोदी को ही दिया जाना चाहिए। हालांकि इसमें गृहमंत्री अमित शाह की भूमिका को स्वीकार नहीं करना उनके साथ अन्याय होगा परंतु आज भाजपा जिस शिखर पर है उसके मुख्य शिल्पकार तो प्रधानमंत्री मोदी ही हैं। आज बीते 12 वर्षों की उनकी उपलब्धियों के साथ गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने जो कर दिखाया उसका भी उल्लेख होना चाहिए जिससे प्रभावित हो जनता ने उन्हें देश की बागडोर सौंप दी। अपने पहले कार्यकाल में ही उन्होंने अपनी क्षमता का प्रमाण दे दिया था। इसीलिए 2019 में और बड़ी सफलता के साथ सत्ता में लौटे। हालांकि 2024 के परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे किन्तु उनकी स्वीकार्यता कायम रही और बीते दो सालों में कभी भी ऐसा नहीं लगा कि उनकी सरकार बैसाखियों पर टिकी होने से अस्थिर है। हालांकि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी दावे करते रहे कि ये सरकार गिरने वाली है। लेकिन हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली , बिहार, असम, प. बंगाल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव जीतकर श्री मोदी ने उन दावों की हवा निकाल दी। ऐसा नहीं है कि उनके कार्यकाल में रामराज आ गया है और देश एक आदर्श स्थिति में पहुंच गया। लेकिन सबसे बड़ी उपलब्धि ये है कि उन्होंने देश के आत्मविश्वास को उस ऊंचाई तक पहुंच गया जहां से वह लंबी छलांग लगाने का साहस कर सकता है। आज की दुनिया में भारत की जो मजबूत और सम्मानजनक स्थिति है उसमें प्रधानमंत्री की कूटनीतिक सक्रियता और ठोस निर्णय लेने की क्षमता का योगदान उल्लेखनीय है। आंकड़ों और सरकारी दावों से पूरी तरह अलग वास्तविकता के धरातल पर उतरकर देखें तो जनसामान्य में ये भरोसा तो उत्पन्न हुआ ही है कि श्री मोदी विपरीत हालातों के बाद भी देश को आगे ले जाने में सफल होंगे। उनकी सरकार द्वारा संचालित जनहित के कार्यों एवं योजनाओं का प्रचार तो सरकार एवं भाजपा करती रहती है इसलिए उनका बखान करने की जरूरत नहीं है। लेकिन ये कहना सही होगा कि डॉ. मनमोहन सिंह की तुलना में मोदी सरकार का प्रदर्शन इसलिए बेहतर है क्योंकि इसने लोगों में ये विश्वास जगाया है कि देश आर्थिक और सैन्य क्षेत्र में एक बड़ी ताकत है जिसकी उपेक्षा करना किसी के लिए भी संभव नहीं रहा। पं. नेहरू ने जब सत्ता संभाली तब उनके सामने देश के पुनर्निर्माण की चुनौती तो थी किंतु राजनीतिक दृष्टि से वे चुनौती विहीन रहे। उनके विपरीत सत्ता में आते ही चाहे गांधीनगर हो या नई दिल्ली,श्री मोदी को हर कदम पर चुनौतियों से जूझना पड़ा। और इसीलिए उनके कार्यकाल के 12 वर्ष हर दृष्टि से उल्लेखनीय हैं। इस दौरान देश हर मोर्चे पर आगे बढ़ा है। दुनिया में श्री मोदी के प्रति आदर और आकर्षण दोनों बढ़े जिसका लाभ भारत की छवि को भी मिल रहा है। चुनौतियों और श्री मोदी का पिछले जन्म का साथ लगता है। लेकिन बजाय डरने के वे उन पर विजय प्राप्त करने के लिए कमर कसकर तैयार रहते हैं। उनका उत्साह और परिश्रम वृति युवाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत है। ये कहना अतिशयोक्ति नहीं है कि वे राष्ट्रीय राजनीति में सबसे लोकप्रिय व्यक्तित्व हैं और यही उनकी शक्ति है। हालांकि उनके विरोधी भी कम नहीं हैं किंतु लाख कोशिशों के बावजूद वे उन्हें घेरने में कामयाब नहीं हो पा रहे । राजनीति में उतार - चढ़ाव आते रहते हैं। इसलिए किसी व्यक्ति या पार्टी के भविष्य के बारे में स्थायी अवधारणा बना लेना सही नहीं होता। लेकिन वर्तमान परिदृश्य में उनके कद और काबलियत के बराबर कोई शख्सियत नजर नहीं आ रही। रही बात उनके शत्रुओं में वृद्धि की तो चाणक्य नीति का ये उद्धरण इसका जवाब है कि जिसकी शक्ति बढ़ती है, उसी के शत्रु भी बढ़ते हैं।
- रवीन्द्र वाजपेयी
No comments:
Post a Comment