नीट नामक परीक्षा के पेपर लीक हो जाने की आशंका के चलते विगत 3 मई को हुई परीक्षा को रद्द कर दिया गया। अब जल्द ही इसकी अगली तारीख घोषित की जाएगी। नीट का पूरा नाम नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट है। हिंदी में इसे राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा कहा जाता है। यह परीक्षा एन.टी.ए (नेशनल टेस्टिंग एजेसी) द्वारा आयोजित होती है। भारतीय चिकित्सा परिषद (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) और भारतीय दन्त परिषद (डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया) की मंजूरी से देश भर में चल रहे मेडिकल और डेंटल कॉलेजों (सरकारी या निजी) के एमबीबीएस , बीडीएस , आयुष , पशु वेटनरी पाठ्यक्रमों में प्रवेश इसी परीक्षा के परिणाम के आधार पर होता है। वर्ष 2024 में भी परीक्षा के चलते हुए ही पेपर लीक होने की शिकायत मिलने पर उसे रद्द किया गया था। इस साल परीक्षा हो जाने के 10 दिन बाद उसे रद्द किया गया। मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। सर्वोच्च न्यायालय में याचिकाएं भी लगी हैं जिनमें मांग है कि आगे से ये परीक्षा न्यायालय की निगरानी में आयोजित की जावे क्योंकि परीक्षार्थियों का एन. टी. ए से भरोसा उठ गया है। परीक्षा का रद्द होना सरकार और संबंधित विभाग के लिए भले ही सामान्य बात हो लेकिन उन लाखों बच्चों के लिए ये बहुत बड़ा धक्का होता है जो अथक परिश्रम करते हुए परीक्षा की तैयारी करते हैं। साथ ही उनके अभिभावकों के लिए भी परीक्षा का रद्द हो जाना दर्दनाक अनुभव है जो गाढ़ी कमाई अपने नौनिहालों का भविष्य संवारने के लिए कोचिंग आदि पर व्यय करते हैं। पेपर लीक करने वालों ने इस बार गैस पेपर का सहारा लिया। बहरहाल जांच एजेंसियों द्वारा गिरफ्तारियों का दौर शुरू हो चुका है। इस कांड के तार कहां - कहां और किस - किससे जुड़े हुए हैं इसका कुछ - कुछ पर्दाफाश तो हो चुका है। सीबीआई की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि पेपर लीक होने के पीछे कौन - कौन लोग हैं ? लेकिन बिना जांच के भी ये कहा जा सकता है कि परीक्षा से प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर जुड़े सरकारी विभाग या संस्थान इस घोटाले के लिए कसूरवार हैं क्योंकि ऐसी परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए पुख्ता व्यवस्था की जाती है। ऐसे में शक की सुई प्रथम दृष्टया तो विभागीय अमले की ओर ही घूमती है। ये बात भी शत - प्रतिशत सत्य हैं कि ऐसे कांडों में मोटा आर्थिक लेनदेन होता है । सूचना क्रांति के इस दौर में किसी दस्तावेज की एक प्रति को पलक झपकते ही पूरी दुनियां में प्रेषित किया जा सकता है। सवाल ये है कि सर्वोच्च न्यायालय उन याचिकाओं पर क्या फैसला करता है जिनमें एन. टी.ए पर अविश्वास जताते आग्रह किया गया है कि वह इस परीक्षा को अपनी निगरानी में आयोजित करे। हालांकि ऐसा होना व्यवहारिक नहीं होने से संभव नहीं है किंतु केंद्र सरकार की तमाम उपलब्धियों पर नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक हो जाने से सवालिया चिन्ह लग गए हैं। एक बार जब ये हादसा हो चुका हो तब प्रश्नपत्र की गोपनीयता बनाए रखने के अचूक इंतजाम क्यों नहीं किए गए इसका उत्तर मिलना चाहिए। और यदि किए गए तब चूक कहां और कैसे हुई इसका खुलासा जल्द हो। रद्द हुई परीक्षा को जल्द आयोजित किए जाने के आश्वासन के साथ ये गारंटी भी मिलनी चहिए कि पेपर लीक होने की घटना दोहराई नहीं जा सकेगी। जिन अपराधियों और लालची विभागीय लोगों ने लाखों बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने का पाप किया उन्हें इतनी कड़ी सजा दी जाए जिससे भविष्य में अन्य कोई भी ऐसा दुस्साहस न करे। हालांकि अपराधी तो अदालत से दंडित हो जाएंगे किंतु जिस विभाग द्वारा उक्त परीक्षा का संचालन होता है उसके मंत्री और दिग्गज प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी है। ऊंचे ओहदे पर विराजमान यह वर्ग किसी भी अच्छे काम का श्रेय लूटने में तो आगे - आगे दिखाई देता है लेकिन घपले और घोटाले की जिम्मेदारी दूसरों पर थोपकर दाएं - बाएं हो लेता है।। पिछली बार जब नीट का प्रश्न पत्र लीक हुआ था तभी से उसकी पुनरावृत्ति रोकने के बारे में गंभीरता बरती जाती तब ये दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति पैदा नहीं होती। होना तो ये चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद होकर संबंधित मंत्री और आला अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करें। अन्यथा न जाने कितने युवाओं के सपने इस भ्रष्ट और निकम्मी व्यवस्था के चलते मिट्टी में मिलते रहेंगे।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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