Saturday, 18 July 2026

वांगचुक को बलि का बकरा बनाया काॅकरोच जनता पार्टी ने



इसका संकेत तो गुरुवार को ही मिल गया था जिस दिन दिल्ली उच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देशित किया था कि वह  दिल्ली के जंतर मंतर पर अनशनरत लद्दाख़ की चर्चित शख्सियत सोनम वांगचुक का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करवाए और जरूरत होने पर उनकी चिकित्सा का प्रबंध भी करे। उल्लेखनीय है नीट परीक्षा के पर्चे लीक होने के बाद सोशल मीडिया पर धूमकेतु की तरह उभरी काॅकरोच जनता पार्टी द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के त्यागपत्र की मांग को लेकर लगातार किये जा रहे आंदोलन का जब कोई प्रभाव नहीं पड़ा तब राजधानी दिल्ली में जंतर मंतर पर श्री वांगचुक को अनशन पर बिठा दिया गया। लद्दाख़ को पूर्ण राज्य बनाये जाने की मांग को लेकर वे आंदोलन का नेतृत्व करते रहे हैं और कुछ महीनों तक जेल में भी रहे। लेकिन ये बात संदेहों को जन्म देती है कि अमेरिका में बैठे अभिजीत दीपके नामक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर काॅकरोच जनता पार्टी नामक एक संगठन की घोषणा की और देखते - देखते ही उसके साथ लाखों अनुयायी जुड़ते चले गए। उसके बाद जब वह भारत लौटा तब एक वर्ग विशेष ने उसे मसीहा बनाना चाहा किंतु दिल्ली आने के कुछ घंटों बाद ही जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन  ने काॅकरोच जनता पार्टी के ढोल की पोल खोल दी। अभिजीत को लगा था कि देश का युवा उन्हें हाथों - हाथ लेगा। लेकिन दिल्ली के अलावा भी वे जहाँ - जहाँ गए उनके आयोजन फ्लॉप शो साबित हुए। अंततः दिल्ली में अनशन का फैसला लिया गया और बजाय खुद मैदान संभालने के श्री वांगचुक को अनशन पर बिठा दिया। अभिजीत समझ चुके थे कि उनके नाम में वह आकर्षण नहीं है लिहाजा वांगचुक के कंधे पर बन्दूक रखकर निशाना लगाना चाहा। लेकिन ये दाँव भी कारगर नहीं रहा। जेएनयू और  कुछ ढपलीबाज   वामपंथी छात्रों को छोड़कर न तो वे युवा आये जिनके लिए वांगचुक को भूखा रखा गया और न आम जनता। राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने अनशन स्थल पर आकर मगरमच्छी आँसू तो खूब बहाये लेकिन मैदानी समर्थन नहीं दिया। यही वजह रही कि आंदोलन न गति पकड़ सका और न ही उसकी कोई दिशा ही स्पष्ट हुई। शिक्षा मंत्री का त्यागपत्र मांगने से हटकर जंतर मंतर में टुकड़े - टुकड़े  गैंग के देश विरोधी नारे गूंजने लगे। असल में इस आंदोलन को फुस्स करवाने में सभी प्रमुख विपक्षी दलों की भूमिका रही। अरविंद केजरीवाल भले ही श्री वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाये जाते जाने की मांग कर अपने को उनका हितैषी साबित करना चाह रहे हों लेकिन। उनकी पार्टी भी नहीं चाहती कि काॅकरोच जनता पार्टी उसका विकल्प बन जाए। आज पुलिस ने श्री वांगचुक को उठाकर अस्पताल भेज दिया जिसके बाद अब अभिजीत दीपके ने अनशन करने का ऐलान कर दिया। लेकिन नीट परीक्षा का परिणाम घोषित होने से इस आंदोलन की धार पहले ही कमजोर पड़ चुकी है। सोमवार से संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। विपक्षी पार्टियां  उसमें सरकार को घेरकर राजनीतिक फ़ायदा उठाना चाहेंगी। इसीलिए उन्होंने इस आंदोलन को दिखावटी समर्थन तो दिया किंतु  जंतर मंतर की सीमा से बाहर नहीं आने दिया। सरकार पर अनशन की उपेक्षा का जो आरोप है उसमें दम इसलिये नहीं है क्योंकि काॅकरोच जनता पार्टी अभी तक संगठित स्वरूप नहीं ले सकी। और श्री वांगचुक का इस आंदोलन से जुड़ना भी अप्रासंगिक था। उनकी छवि  आंदोलनजीवी की बन जाने से वे मीडिया की सुर्खियों में सिमटकर रह गये। रही - सही कसर पूरी कर दी जेएनयू के छात्र - छात्राओं ने जो बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना बनकर समूचे आंदोलन पर अतिक्रमण कर बैठे। हिंदू देवी - देवताओं का अपमान करने वाले एक स्टैंड अप कामेडियन ने भी आंदोलन को पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सच कहें तो काॅकरोच जनता पार्टी ने एक अच्छे भले मुद्दे का कचरा कर दिया। स्मरणीय है किसान आंदोलन अपने साथ देश भर के किसानों को नहीं जोड़ पाने के कारण अपनी मौत मर गया था, वहीं शाहीन बाग का धरना भी अंततः फुस्स होकर रह गया। ठीक वैसे ही ये आंदोलन भी अधोगति को प्राप्त हो रहा है  ये कहना गलत नहीं होगा कि काॅकरोच जनता पार्टी ने सोनम वांगचुक की जान खतरे में डालकर अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने की जो चाल चली थी वह उल्टी पड़ गई और अभिजीत दीपके का नौ नौसिखियापन भी उजागर हो गया। 

-रवीन्द्र वाजपेयी


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