Friday, 15 May 2026

पटाखा फैक्टरी में विस्फोट के लिए पुलिस और प्रशासन भी बराबरी के जिम्मेदार


म.प्र के जबलपुर शहर के समीप  बरगी बांध में एक पखवाड़े पहले हुई क्रूज डूबने की घटना की जांच हेतु आयोग गठित कर दिया गया । जो जानकारी आई है उसके अनुसार क्रूज को काट दिए जाने के कारण दुर्घटना के असली कारणों का पता लगा पाना सम्भव नहीं रहा। लेकिन सतही तौर पर जो प्रतीत हुआ उसके अनुसार प्रशासनिक लापरवाही के कारण अनेक जिंदगियां असमय खत्म हो गईं। प्रदेश भर में क्रूज़ और नावों का संचालन रोकने के बाद संबंधित महकमे ने चुप्पी साध ली। बरगी क्रूज दुर्घटना के घाव अभी हरे ही थे कि गत दिवस प्रदेश के देवास नगर में एक पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट में 5 श्रमिकों के चीथड़े उड़ गए वहीं घायलों में एक दर्जन की हालत गंभीर है।  पटाखा फैक्टरी में बारूद का होना स्वाभाविक है किंतु जो जानकारी मिली उसके अनुसार फैक्टरी में कई टन बारूद जमा की गई थी जबकि उसे मात्र 15 किलो विस्फोटक रखने का लाइसेंस जारी हुआ था। चूंकि बरसात के पहले फैक्टरी संचालक को किसी बड़े ऑर्डर की आपूर्ति करनी थी इसलिए उसने  नियम विरुद्ध जाने का दुस्साहस किया और स्वीकृत मात्रा से कई गुना अधिक विस्फोटक एकत्र कर फटाफट पटाखे बनाने शुरू कर दिए। छह माह पूर्व प्रारंभ उक्त फैक्टरी का निर्माण भी पूरी तरह नहीं हुआ है। हालांकि दुर्घटना का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है किंतु भीषण गर्मी में अधूरे निर्माण के बावजूद बारूद जैसी ज्वलनशील चीज का जंगी स्टॉक और बिना समुचित सुरक्षा प्रबंधों के 600 श्रमिकों को काम पर लगाने से ये अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि फैक्टरी मालिक को नियम - कानून की रत्ती भर परवाह नहीं थी । इसी प्रकार 15 किलो विस्फोटक रखने का लाइसेंस होने पर भी उक्त फैक्टरी को कई टन विस्फोटक की आपूर्ति करने वाले भी खुद को कानून से ऊपर समझते हैं वरना वे इतनी बड़ी हिमाकत नहीं करते। लेकिन ऐसी दुर्घटना के लिए शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी को उपेक्षित नहीं किया जा सकता। ये सवाल स्वाभाविक रूप से उठ खड़ा होता है कि पटाखा बनाने वाली उक्त फैक्टरी में अनुमति से बहुत ज्यादा विस्फोटक आता रहा तो प्रशासन को इसकी जानकारी क्यों नहीं लगी? और यदि सरकारी अमला इस बारे में जानता था तब तो उसे भी निरपराध श्रमिकों की मौत के लिए बराबरी से दोषी माना जाना चाहिए। इस दुर्घटना ने एक और आशंका पैदा कर दी कि किसी शहर में विस्फोटकों का जखीरा आ जाने पर भी पुलिस और प्रशासन को उसकी भनक नहीं लगती। इसे दूसरे कोण से देखने पर ये भी कहा जा सकता है कि इस आपराधिक कृत्य को भ्रष्ट तंत्र का संरक्षण था जो अपनी जेब गर्म करने के फेर में जनता की जान को खतरे में डालने से लेशमात्र भी परहेज नहीं करता। कुल मिलाकर ये कहना गलत नहीं होगा कि चाहे बरगी बांध में क्रूज डूबने की घटना हो या फ़िर देवास की पटाखा फैक्टरी में हुआ विस्फोट, इनकी जड़ में प्रशासनिक उदासीनता या अनदेखी ही मूल कारण होता है।  यदि बरगी में क्रूज का रखरखाव सही तरीके से हुआ होता ,यात्रियों को समय पर लाइफ जैकेट पहनने की अनिवार्यता होती और क्रूज डूबने की शुरुआत होते ही बचाव कार्य प्रारंभ हो जाता तब अनेक लोगों की जान बच सकती थी। इसी तरह देवास की पटाखा फैक्टरी के निर्माण और सुरक्षा प्रबंधों की समय रहते समुचित जांच की गई होती तब गत दिवस हुआ हादसा टाला जा सकता था। और फिर 15 किलो की जगह कई टन विस्फोटक का फैक्टरी में जमा होना हे ये साबित करने के लिए काफी है कि फैक्टरी मालिक की पहुंच और पकड़ स्थानीय प्रशासन तक थी। कुछ समाचारों में बताया गया है कि उसकी भाजपा  सांसद से काफी निकटता रही है। यदि ये सही है तब विस्फोटकों के अवैध भंडार के पीछे राजनीतिक दबाव की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। हकीकत जो भी हो लेकिन फैक्टरी मालिक द्वारा किए जा रहे गैर कानूनी कार्यों पर रोक - टोक नहीं होना ये साबित करने के लिए पर्याप्त है कि उसने प्रशासनिक व्यवस्था को या तो खरीद लिया था या किसी अन्य कारण से सरकारी अमला उस पर मेहरबान बने रहते हुए आँखें मूंदें बैठा रहा। इसलिए जांच के दायरे में उक्त पटाखा फैक्टरी के अलावा पुलिस और प्रशासन की नाकामी भी आनी चाहिए क्योंकि अप्रत्यक्ष तौर पर ही सही इस दुर्घटना में उनकी जिम्मेदारी भी कम नहीं है।


- रवीन्द्र वाजपेयी

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