Thursday, 15 October 2026

एस आई.आर पर विपक्ष में ही विरोधाभास



एक ओर तो मुख्य चुनाव आयुक्त  ज्ञानेश कुमार और एस .आई.आर ( मतदाता सूचियों के विशेष सघन परीक्षण ) प्रक्रिया के विरुद्ध दिल्ली में कांग्रेस की अगुआई में इंडिया ब्लॉक के सदस्यों के अलावा, आम आदमी पार्टी और कॉकरोच जनता पार्टी सड़कों पर उतरकर वोट चोरी के आरोप लगा रही है। संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक हो रहे प्रदर्शनों में ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा जा रहा है । दूसरी तरफ पंजाब में सभी प्रमुख पार्टियों का रुख चुनाव आयोग के प्रति एकदम उलट है। मतलब दिल्ली में चुनाव आयेगा और ज्ञानेश कुमार को गरियाने और एस.आई.आर की समूची प्रक्रिया को रद्द करने जैसी जिद पकड़े बैठे विपक्षी दलों का सुर पंजाब में पूरी तरह बदला हुआ है। पंजाब में एसआईआर प्रक्रिया संपन्न होने के बाद जब मतदाता सूचियों  से 13.60 लाख फर्जी नाम हटाए गए, तो अन्य राज्यों में आसमान सिर पर उठाने वाले गैर भाजपा दलों विशेष रूप से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने  कोई बखेड़ा खड़ा नहीं किया। पंजाब की राजनीति में सिखों की प्रतिनिधि मानी जाने वाली बादल परिवार के नेतृत्व वाले अकाली दल ने भी मतदाता सूचियों से लाखों नाम हटाये जाने पर किसी प्रकार की आपत्ति नहीं जताई। इतना ही नहीं सत्ता में बैठी आम आदमी पार्टी के साथ ही विपक्ष में बैठे तमाम दलों  ने चुनाव आयोग की तारीफ के पुल बांधे हैं। पंजाब की राजनीतिक पार्टियों द्वारा चुनाव आयोग की प्रशंसा से उनका शीर्ष नेतृत्व भौचक है क्योंकि दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव , अरविंद केजरीवाल और ममता बैनर्जी अपनी पार्टी के सांसदों एवं अन्य नेताओं को एकत्र कर  एस.आई.आर प्रक्रिया के अंतर्गत देश भर में 13 करोड़ से ज्यादा वोटरों के नाम मतदाता सूचियों से काट दिये जाने को वोट चोरी बताकर लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए  गिरफ्तारियां दे रहे हैं। लेकिन इसके विपरीत भाजपा की घोर विरोधी आम आदमी पार्टी शासित पंजाब में सभी राजनीतिक पार्टियां एस.आई.आर पर संतोष व्यक्त करते हुए उसका स्वागत कर रही हैं। स्मरणीय है पंंजाब विधानसभा के आगामी चुनाव के लिए चुनाव आयोग द्वारा राज्य की अंतिम मतदाता सूची जारी करते हुए बताया गया कि एस.आई.आर अभियान के दौरान  13.60 लाख (6.34%) अयोग्य नामों की छंटनी की गई है। लेकिन पंजाब चुनाव आयोग द्वारा किये गए इस सफाई अभियान के बाद राज्य के राजनीतिक दलों द्वारा जिस प्रकार एक स्वर में आयोग की प्रशंसा करते हुए  समूची  प्रक्रिया पर संतोष व्यक्त किया वह दिल्ली में चल रहे सियासी माहौल को देखते हुए पूरी तरह विरोधाभासी है। गौरतलब है दिल्ली में चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध खोले गए मोर्चे में एसआईआर की समूची प्रक्रिया को रद्द कर पुरानी मतदाता सूची को ही लागू मान लेने की मांग प्रमुख है। इसके अलावा बिहार और प. बंगाल के विधानसभा चुनाव भी दोबारा करवाने की आवाज उठ रही है। हालांकि विपक्ष के भीतर ही इस मुद्दे पर एकजुटता का अभाव है। उदाहरण के तौर पर ममता बैनर्जी और  तेजस्वी यादव जहाँ एसआईआर को अपनी पराजय का कारण मानते हैं वहीं केरलम में जहाँ कांग्रेस सरकार बनी वहाँ के गृहमंत्री रमेश चेन्नीथला और कुछ अन्य कांग्रेस नेता सार्वजनिक रूप से ये कह चुके हैं केरल में  चुनाव आयोग द्वारा करवाई गई एस.आई.आर के कारण चुनाव पूरी तरह सही हुए तथा वाम मोर्चा की सरकार द्वारा बनवाए गए फर्जी मतदाताओं के नाम कट जाने से चुनाव पूरी तरह पारदर्शी हो सके। आश्चर्य की बात है राहुल गाँधी ने अपनी पार्टी के वरिष्ट नेता के उक्त बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसी प्रकार तमिलनाडु में सत्ता से बाहर हुई द्रमुक को तो एस.आई.आर से शिकायत है लेकिन अभिनेता से नेता बने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने इस बारे में कुछ नहीं कहा। पंजाब और केरल के दोनों दृष्टांत ये साबित करते हैं कि एसआईआर और चुनाव आयोग के प्रति विपक्ष में भी एकरूपता नहीं है। जहाँ जो जीत जाता है उसके लिए चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह पाक साफ है लेकिन पराजित पक्ष को उसमें दुनिया की सारी खराबियां नजर आती हैं। यही वजह है कि लाख कोशिशों के बाद भी वोट चोरी केवल राजनीतिक दलों का मुद्दा बनकर रह गया और आम जनता को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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