किसी छुटभैये ने ये कहा होता तब उसको नजरंदाज किया जा सकता था किंतु 80 साल की आयु सीमा लाँघ चुका बुजुर्ग ऐसी निम्नस्तरीय बात सार्वजनिक मंच से कहे तब ये कहना अनुचित नहीं होगा कि उनका मानसिक संतुलन गड़बड़ा गया है या फिर वे अवसाद की स्थिति में हैं। संदर्भ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राजयसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा गत दिवस पटना के एक आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में की गई टिप्पणी है जिसकी वजह ने उनके साथ ही समूची कांग्रेस पार्टी कटघरे में खड़ी हो गई। दरअसल पटना में स्व. डॉ. श्री कृष्ण सिंह की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में भाषण देते हुए श्री खरगे बोल उठे सरकार में अनियमितता करने वालों को जेल भेजा जाएगा। इस पर भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि मोदी नहीं जाएंगे। उस पर चिल्लाते हुए श्री खरगे ने कहा, मोदी का बाप भी जाएगा। और इस बात को उन्होंने कई मर्तबा दोहराया जिससे ये स्पष्ट हो गया कि उनकी जुबान नहीं फिसली अपितु उन्होंने जान बूझकर वह टिप्पणी की। इसके बाद जो कुछ हुआ वह और भी शर्मनाक था क्योंकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मोदी नहीं जायेगा चिल्लाने वाले शख्स को भाजपाई मानकर उसकी पिटाई कर दी। लेकिन पार्टी की किरकिरी तब हुई जब पता चला कि संतोष नामक वह व्यक्ति भाजपा नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी का कार्यकर्ता ही था। सभागार से निकलने के बाद उस बेचारे ने बताया कि लोगों को गलतफहमी हुई है। उसके अनुसार वह तो पूरा वाक्य बोल रहा था कि जब तक जनता बगावत नहीं करेगी, तब तक मोदी कहीं नहीं जाएगा। लेकिन मेरा जब तक , वाला हिस्सा शोर - शराबे में दब गया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुझे बीजेपी का समर्थक समझकर पीट दिया। वहाँ उपस्थित संवाददाताओं ने भी इस बात की पुष्टि की कि विवाद की शुरुआत एक अधूरे वाक्य और गलतफहमी से हुई। श्री खरगे की उक्त टिप्पणी के विरोध में गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस अध्यक्ष की भाषा को राजनीतिक मर्यादाओं के विरुद्ध बताया वहीं पार्टी ने देशव्यापी प्रदर्शन की घोषणा कर डाली। पटना के कोतवाली थाने में खरगे के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। यद्यपि ये पहला अवसर नहीं है जब किसी कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी की हो। अतीत में ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहीं जिनके चलते कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान भी उठाना पड़ा। राहुल गाँधी तो श्री मोदी के बारे में जिस शैली और शब्दों का उपयोग करते हैं उससे आये दिन विवाद उत्पन्न होते हैं। उनके और प्रधानमंत्री के बीच सौजन्य भेंट भी कम ही होती है किंतु श्री खरगे और शुरू मोदी के आपसी संबंध काफी अच्छे हैं। विभिन्न अवसरों पर एक - दूसरे से मिलते समय दोनों परस्पर सम्मान व्यक्त करते नजर आते हैं। इसीलिए कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा प्रधानमंत्री के पिता को लेकर कही गई बात से लोगों को आश्चर्य हुआ। उम्मीद तो ये थी कि कांग्रेस के बुजुर्गवार अध्यक्ष अपनी स्तरहीन टिप्पणी के लिए तत्काल खेद व्यक्त करते हुए क्षमा मांग लेते। लेकिन अभी तक तो उनकी ओर से इस बारे में कुछ नहीं कहा गया। उल्टे कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बेहद बचकाने अंदाज में उनका बचाव करते हुए सफाई दी है कि उनका इशारा प्रधानमंत्री के वैचारिक मार्गदर्शक संगठन (रा .स्व .संघ) की ओर था। सवाल ये है कि श्री खेड़ा को ये दिव्य ज्ञान स्व प्रेरणा से हुआ या श्री खरगे ने उन्हें ऐसा कहने के लिए निर्देशित किया। हो सकता है कांग्रेस पार्टी और खुद खरगे जी अतीत में प्रधानमंत्री सहित अन्य भाजपा नेताओं की टिप्पणियों का उदाहरण देकर पटना में कही गई बात को उचित ठहराएं किंतु आरोप - प्रत्यारोप से अलग हटकर देखें तो श्री खरगे ने जो कहा वह उनके पद और उम्र को देखते हुए अप्रत्याशित और आपत्तिजनक था जिसके लिये वे बिना देर लगाए खेद व्यक्त कर देते तब आलोचना और फजीहत से बच जाते। अब तक उनके और श्री मोदी के बीच निजी संवाद एवं व्यवहार शालीनता की सीमा में ही रहा है। ये देखते हुए अब खरगे जी जब भी प्रधानमंत्री के रूबरू होंगे तब किस मुँह से उनका सामना करेंगे वे बड़ा सवाल है। हालांकि आज की राजनीति में मर्यादा और शालीनता जैसे शब्द अर्थ खोते जा रहे हैं । जंतर मंतर पर हुए आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री के बारे में लड़के - लड़कियों के कुछ गुटों ने जिस अश्लील शब्दावली का उपयोग किया उसकी सर्वत्र निंदा हुई और नई पीढी़ में संस्कारों के क्षरण को लेकर चिंता जताई जाने लगी। लेकिन जब खरगे जी जैसे वयोवृद्ध सार्वजनिक मंच पर इस तरह की भद्दी भाषा का प्रयोग करेंगे तब युवा पीढ़ी को कौन रोकेगा?
- रवीन्द्र वाजपेयी