Monday, 19 October 2026

अपना ऊर्जा संकट दूर करने भारत के दरवाजे आया अमेरिका



कुछ दिन पहले की बात है जब अमेरिकी राष्ट्रपति के सबसे बड़े आर्थिक सहयोगी इलान मस्क ने स्टारलिंक इंटरनेट सेवाओं की अनुमति नहीं मिलने के कारण मुकेश अंबानी पर निशाना साधते हुए उन्हें प्रधानमंत्री तक कह डाला। साथ ही ये तंज भी कसा कि भारत में कुछ बड़े लोग काम रुकवा देते हैं।  दरअसल मस्क चाहते थे कि स्टारलिंक को बिना नीलामी के भारत में काम करने की अनुमति दे दी जाए। उनका तर्क ये है कि लगभग डेढ़ सौ देश स्टारलिंक की सेवाएं ले रहे हैं इसलिए भारत को भी उसे अनुमति दे देनी चाहिए। लेकिन रिलायंस और एयरटेल नामक दो भारतीय  खिलाड़ी  उनके मुकाबले आ खड़े हुए। ऐसे में सरकार के लिए भी सीधे स्टारलिंक को अनुमति देना संभव नहीं रहा। इसके बाद  इलान मस्क ने डोनाल्ड ट्रम्प के जरिये भारत की अग्रणी आई. टी कंपनियों के कर्मचारियों की वीसा सुविधाएं खत्म करने का दबाव बनाया। साथ ही  भारत में सस्ती इंटरनेट सेवा प्रदान करने का दाना भी फेंका। तब भी काम नहीं बना तो अंबानी के बारे अच्छी टिप्पणियां करते हुए कड़वाहट कम करने की कोशिश की। इसी क्रम में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो का आज  भारत आगमन हो रहा है। लेकिन वे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली न आकर आर्थिक राजधानी मुंबई में कारोबारियों से मिलेंगे। लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि रूबियो जामनगर जाएंगे जहाँ मुकेश अंबानी की रिलायंस कंपनी की रिफाइनरी  है। रूस - यूक्रेन  युद्ध के दौरान रिलायंस ने रूस से आयातित कच्चे तेल से डीजल - पेट्रोल बनाकर यूरोपीय देशों को निर्यात कर अपनी क्षमता प्रमाणित की। अमेरिका को इससे बड़ी तकलीफ हुई। लेकिन भारत ने  ट्रम्प के दबाव को नजरंदाज करते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीदी जारी रखी और डीजल - पेट्रोल के निर्यात में भी कमी नहीं की। ईरान संकट लम्बा खिंचने के कारण पूरी दुनिया में तो ऊर्जा संकट उत्पन्न हुआ ही लेकिन अंततः अमेरिका में भी डीजल  की कमी होने से  दाम काफी ऊपर चले गए। जिससे जनता ट्रम्प से  नाराज हो उठी। महंगाई बढ़ने के कारण आगामी 3 नवम्बर को होने वाले मध्यावधि चुनाव में ट्रम्प की पार्टी के संसद में अल्पमत में आने का खतरा उत्पन्न हो गया।इससे बचने के लिए उन्होंने रूस से डीजल खरीदने के सौदे के साथ ही भारत पर लगे 100 फीसदी टैरिफ को एक माह के लिए टालते हुए रूस से कच्चा तेल खरीदने की छूट दे दी। और तो और रिलायंस की जामनगर रिफायनरी से डीजल खरीदने की पेशकश भी कर डाली। यद्यपि ट्रम्प अपनी इज्जत बचाने के लिए इस फैसले को दुनिया में कच्चे तेल के दाम नियंत्रित करने के साथ ही भारत को ऊर्जा संकट से बचाने से जोड़ रहे हैं। लेकिन असलियत यही है कि उन्होंने अपने यहाँ ऊर्जा संकट पैदा होने के कारण मजबूरन रूस से व्यापारिक रिश्ते कायम करने और भारत को 100 फीसदी टैरिफ से महीने भर की राहत देने का फैसला किया। अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो अपनी मुंबई यात्रा के दौरान  ऊर्जा सहयोग, व्यापार और निवेश, रक्षा, और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने संबंधी चर्चा कारोबारियों से करने के अलावा भारतीय अधिकारियों और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात करेंगे। लेकिन उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य जामनगर में रिलायंस रिफाइनरी का भ्रमण कर मुकेश अंबानी से डीजल खरीदने का सौदा करना है जिससे कि अमेरिका में व्याप्त ऊर्जा संकट से राहत मिले। इससे भी महत्वपूर्ण बात ये है कि जिन मुकेश अंबानी को इलान मस्क भारत में स्टारलिंक के लिए रोड़ा बता रहे थे उन्हीं के लिए अमेरिका में आइल रिफ़ायनरी लगाने के लिए लाल कालीन बिछाये जा रहे हैं। उल्लेखनीय है अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार तो बहुत हैं लेकिन रिफ़ायनरी नहीं होने से वह डीजल, पेट्रोल और गैस का आयात करने मजबूर है। ईरान संकट के कारण प. एशिया से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने से अमेरिका भी मुसीबत में फंस गया है। वेनेजुएला के तेल भंडारों पर कब्जा करने के बाद भी रिफाइनरी की कमी उसकी समस्या बन गई। और तब उसे भारत का महत्व समझ में आया जो कच्चे तेल को पेट्रोल - डीजल में बदलने के क्षेत्र में काफी आगे है।  बीते कुछ दिनों में भारत के प्रति अमेरिकी रुख में आया बदलाव उसकी मजबूरी का परिणाम है। इसीलिए कुछ दिनों पहले अमेरिका में कार्यरत भारतीयों को बंधुआ मजदूर कहने वाले उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस अब उनके प्रति अपना प्रेम व्यक्त कर रहे हैं। 


- रवीन्द्र वाजपेयी


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