दिल्ली में चल रहे आंदोलन की जड़ में नीट परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक होने से छात्रों में उपजा गुस्सा था। हालांकि दोबारा परीक्षा होने के बाद परिणाम भी आ गए लेकिन शिक्षा प्रणाली में व्याप्त वि संगतियों के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के त्यागपत्र की मांग उठ खड़ी हुई। इसकी शुरुआत कांग्रेस द्वारा की गई और उसकी छात्र इकाई द्वारा अनेक शहरों में धरना - प्रदर्शन भी किये गए किंतु तभी राहुल गाँधी अपनी निजी यात्रा पर विदेश चले गए। वे कहाँ और क्यों गए इसे हमेशा की तरह गोपनीय रखा गया।लेकिन इसी बीच देश के प्रधान न्यायाधीश द्वारा अपनी एक टिप्पणी में कॉकरोच शब्द का उपयोग किया गया जिसका संदर्भ कुछ और था किंतु अमेरिका में बैठे एक युवक अभिजीत दिपके ने उससे नाराज होकर जब काॅकरोच जनता पार्टी का गठन सोशल मीडिया पर किया तब रातों - रात उससे करोड़ों लोग जुड़ गए। इससे उत्साहित होकर उसने भारत आने का ऐलान कर दिया। विपक्षी दलों से निराश सरकार विरोधी तबके को अभिजीत में क्रांतिदूत नजर आया । दिल्ली आकर उसने एक औपचारिक आयोजन में श्री प्रधान के इस्तीफे की मांग हेतु सरकार के सामने समय सीमा रखी और पूरी न होने पर संसद का सत्र शुरू होने वाले दिन जंतर मंतर से चलो संसद का आह्वान किया। उसके चलते हजारों लोग संसद भवन की ओर बढ़ने लगे जिन्हें रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और अश्रुगैस छोड़ी। उस दौरान क्या - क्या हुआ उसे दोहराने की जरूरत नहीं है। इधर जंतर मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को पुलिस ने उठाकर सरकारी अस्पताल में भर्ती कर दिया किंतु उनका अनशन जारी रहा । बाद में उन्हें मेदांता अस्पताल पहुंचा दिया गया और दो दिन पहले उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों के हाथ से जूस पीकर भूख हड़ताल तोड़ दी। साथ ही शिक्षा मंत्री के त्यागपत्र की मांग से भी पीछे हट गए। गुरुवार की आधी रात जब वांगचुक जूस ग्रहण कर रहे थे उसी समय प्रधानमंत्री का वीडियो संदेश प्रसारित हुआ जिसमें पेपर लीक के दोषियों को कड़ा दंड देने हेतु कानून बनाने की घोषणा की गई। इसके बाद काॅकरोच जनता पार्टी और सरकार के बीच संवाद कायम हुआ और गत दिवस एक बैठक भी हुई। केंद्रीय मंत्री द्वय जगत प्रकाश नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ बातचीत में शामिल पार्टी प्रवक्ताओं ने बाद में बताया कि सरकार पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवार को 1 करोड़ रु देने के अलावा 20 जुलाई के संसद मार्च में हुए उपद्रव के आरोपियों पर दर्ज आपराधिक प्रकरण वापस लेने सहमत है किंतु श्री प्रधान के त्यागपत्र की मांग पर 24 घंटे बाद अर्थात आज 2 बजे तक जवाब। देगी। पार्टी ने इस माँग से पीछे न हटने की बात दोहराते हुए धमकी भी दी कि आंदोलन को पूरे देश में फैला दिया जाएगा। उसके बाद गत रात्रि प्रधानमंत्री नये वीडियो संदेश के साथ आये और युवाओं की मिजाजपुर्सी का भरपूर प्रयास किया। आज सुबह से ही इस बात को लेकर उत्सुकता है कि सरकार शिक्षा मंत्री को हटाने के लिए राजी होती है या नहीं ? हालांकि श्री प्रधान को मंत्री पद से हटाया जाना कोई बड़ी समस्या नहीं है। प्रधानमंत्री चाहें तो शिक्षा मंत्री क्या किसी अन्य मंत्री को भी एक क्षण में हटा सकते हैं। लेकिन इतने दबाव और आलोचना के बाद भी उनको मंत्री बनाये रखने के बाद एक नई नवेली पार्टी की जिद पर यदि ऐसा किया जाता है तब उससे प्रधानमंत्री की वजनदारी पर सवाल उठेंगे। उल्लेखनीय है जंतर मंतर से इतर संसद में भी विपक्ष , शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़ा रहकर कार्यवाही नहीं चलने दे रहा। सोमवार को सरकार पेपर लीक रोकने एक कड़े कानून का प्रस्ताव लेकर भी आ रही है। लेकिन उसकी सबसे बड़ी चिंता परिसीमन और विदेशी अनुदान संबंधी विधेयक को लेकर है जिन पर भाजपा की भावी व्यूहरचना निर्भर है। प्रधानमंत्री अतीत में भी भूमि अधिगृहण और कृषि सुधार जैसे कानून वापस ले चुके हैं जिसके बाद उनके 56 इंची सीने के दावे का मखौल भी उड़ा किंतु उसके उपरांत मिली चुनावी सफलताओं ने उनकी नेतृत्व क्षमता का दबदबा बनाये रखा। लेकिन यहाँ सवाल ये है कि स्थापित दलों के सामने अड़े रहने के बाद यदि वे एक नवोदित पार्टी के सामने जिसका कोई विधिवत ढांचा नहीं है, झुक जाते हैं तब क्या उनकी मजबूत छवि पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा? लेकिन राजनीति की समझ रखने वाले जानते हैं कि बड़ी लड़ाई जीतने के लिए कभी - कभी रणनीति के तहत कदम पीछे भी खींचना पड़ते हैं। आज दोपहर के बाद स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार का अगला कदम क्या होगा और आंदोलन की दिशा भी।
नोट:- उक्त आलेख शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के पहले प्रकाशित हुआ था।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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