Thursday, 17 September 2026

भारत का बढ़ता सम्मान मोदी की सबसे बड़ी सफलता



राजनीति के अपने रंग - ढंग हैं जिनमें चुनावी जीत ही सब कुछ मानी जाती है। सिद्धांतों के नाम पर ढोंग नेताओं की पहचान और अपना हित साधना आदर्श बन गया है। लोकतंत्र के कंधों पर नये सामंत सवार  हैं। विचारधारा के पोषक  मजाक का पात्र बन रहे हैं। स्वाधीनता के बाद का एक दशक छोड़ दें तो उसके बाद सियासत प्रदूषित होती चली गई । ऐसे में एक शख्स ने  सबका साथ, सबका विकास , सबका विश्वास जैसे संकल्प के साथ बागडोर संभाली और 12 वर्षों में भारत को एक मजबूत आर्थिक और सैन्य शक्ति के तौर पर स्थापित कर दिया। इस व्यक्ति का नाम है नरेंद्र मोदी जिनका आज 76 वां जन्मदिन है। गुजरात के  मुख्यमंत्री के रूप में विकास का पर्याय बनकर प्रभावित करने वाले श्री मोदी को जब भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के चेहरे के तौर पर प्रस्तुत किया तब आम भारतीय के मन में भी उत्साह नजर आया जिसके फलस्वरूप भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला। 12 वर्षों में एक भी छुट्टी नहीं लेने वाले प्रधानमंत्री ने जनता की उम्मीदों  को पूरा करने का अभियान पदभार ग्रहण करते ही प्रारंभ कर दिया था। हालांकि जन कल्याण की योजनाओं में घुसे बिचौलियों और दलालों को हटाने के लिए  जनधन खाते खुलवाये जाने पर  खूब सवाल उठे।  स्वच्छता अभियान और शौचालय जैसे अभियान का भी मजाक उड़ाया गया। उज्ज्वला सहित प्रधानमंत्री आवास योजना की सफलता पर भी संदेह व्यक्त किये गए। लेकिन इनकी वजह से  लोगों के जीवन स्तर में जो  सुधार  आया वह एक तरह की  सामाजिक क्रांति ही है। इसीलिये अगले  लोकसभा चुनाव में श्री मोदी को पहले से अधिक जन समर्थन मिला। यद्यपि उसके बाद के साल बेहद कठिनाइयों से भरे रहे। कोरोना नामक महामारी ने पूरे विश्व को चपेट में ले लिया। लेकिन जब विकसित कहे जाने वाले देश अपने नागरिकों की रक्षा करने में असमर्थ नजर आ रहे थे तब भारत में कोरोना का टीकाकरण अभियान जिस तरह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ उसने देश की आपदा प्रबंधन क्षमता से विश्व को परिचित करवाया। मुसीबत के उस दौर में करोड़ों लोगों को निःशुल्क अनाज  के साथ ही गरीबों के खातों में नगदी राशि ट्रांसफर जैसी व्यवस्थाओं ने देश को अराजकता से बचा लिया। वरना भूख के वशीभूत लोग श्रीलंका और नेपाल जैसे हालात उत्पन्न कर  सकते थे। लॉक डाउन के  दौरान अधो संरचना के बड़े - बड़े काम संचालित कर विकास के पहियों को चलायमान रखने की सोच श्री मोदी की दूरदर्शिता का जीवंत प्रमाण है। विश्व के अनेक छोटे  देशों को भी उपहार में वैक्सीन देने के निर्णय ने उनकी छवि वैश्विक नेता की बना दी। वहीं आपदा में अवसर खोजने की सोच ने देश को दवा उत्पादन में अग्रणी बना दिया। सैन्य सामग्री के मामले में आत्मनिर्भर बनने उठाये गए कदमों का ही सुपरिणाम है कि भारत इस क्षेत्र में निर्यातक के तौर पर उभर सका। 2024 में भले ही उन्हें स्पष्ट बहुमत न मिला हो किंतु जन भावनाओं के अनुरूप वे तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। उनकी विशेषता ये है कि सत्ता में आने के बाद भी वे सैद्धांतिक प्रतिबद्धता नहीं भूले । राम मंदिर, तीन तलाक़, धारा 370 , वक्फ संशोधन , और शिक्षा नीति के बारे में लिए  फैसले उनकी दृढ़ता का प्रमाण हैं। एक देश एक चुनाव और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों पर भी सरकार आगे बढ़ रही है। उत्तर पूर्वी राज्यों में विकास की गंगा बहाने से वे मुख्य धारा से जुड़ने लगे हैं। कश्मीर घाटी में श्रीनगर तक भी रेल पहुँच गई है। सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूरी दुनिया ने देखी। नक्सली आतंक की समाप्ति और कश्मीर सहित देश के अनेक हिस्सों में देश विरोधी तत्वों की कमर तोड़ना मोदी सरकार की बड़ी कामयाबी है। आज का भारत विश्व की बड़ी अर्थव्यस्थाओं को टक्कर देने में समर्थ है। अमेरिका द्वारा थोपे गए टैरिफ का जिस मजबूती से जवाब दिया गया वह प्रधानमंत्री के कूटनीतिक कौशल को दर्शाता है। उनके कार्यकाल में देश ने जो अर्जित किया उसकी सूची बहुत लंबी है। कुछ विफलताएं भी इस दौरान देखने मिलीं किंतु ये कहना गलत नहीं है कि श्री मोदी ने हर भारतीय में अभूतपूर्व आत्मविश्वास भर दिया। दुनिया में आज भारत की जो धाक है उसमें उनके योगदान को नकारना असंभव है। हाल ही में संपन्न ब्रिक्स सम्मेलन इसका जीवंत प्रमाण है। हालांकि आज भी गरीबी और बेरोजगारी जैसी समस्याएं हैं और देश के अनेक इलाके पिछड़ेपन का शिकार हैं। लेकिन प्रधानमंत्री  जिस ईमानदारी और समर्पण भाव से जुटे हुए हैं उससे लगता है सबका विकास रूपी  नारा हकीकत में बदलकर रहेगा। 76 साल की उम्र में उनमें किसी युवक से ज्यादा ऊर्जा है । उनके नेतृत्व में भाजपा का जो विस्तार हुआ वह बड़ी उपलब्धि है। बिहार और प.बंगाल इसके उदाहरण हैं। वे दीर्घायु हों और देश को विकास के उच्चतम शिखर तक ले जाएं यही मंगलकामना है।

- रवीन्द्र वाजपेयी


No comments:

Post a Comment