Thursday, 30 April 2026

पूर्वानुमानों से काफी मिलते - जुलते हैं एग्जिट पोल



गत दिवस प. बंगाल में दूसरे चरण का मतदान संपन्न होते ही पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो गई। उसके बाद से ही एग्जिट पोल आने लगे जो कि काफी कुछ अपेक्षित ही हैं। मसलन प. बंगाल में ज्यादातर एजेंसियों ने भाजपा सरकार बनने की संभावना जताई है। इक्का - दुक्का अभी भी ममता बैनर्जी द्वारा चौका लगाए जाने की भविष्यवाणी कर रहे हैं। एक्सिस माय इंडिया ने पहले चरण वाली 152 सीटों का जो एग्जिट पोल जारी किया उसके अनुसार 2021 की स्थिति उलट रही है। अर्थात भाजपा 100 के करीब और तृणमूल कांग्रेस 50 के इर्द - गिर्द रहेगी। कल हुए 142 सीटों के मतदान का एग्जिट पोल सम्भवतः आज जारी होगा। लोकसभा चुनाव में एग्जिट पोल  गलत निकलने के कारण उक्त एजेंसी के संचालक प्रवीण गुप्ता को काफी आलोचना झेलनी पड़ी। उसके बाद के सभी चुनावों में उन्होंने  पर्याप्त समय लिया। बिहार में भी उनका एग्जिट पोल एक दिन बाद ही जारी हुआ था। आज एक्सिस माय इंडिया का बचा हुआ एग्जिट पोल भी यदि भाजपा को बहुमत मिलने की बात कहता है तब फिर सुश्री बैनर्जी के लिए ये बहुत बड़ा धक्का होगा। असम के बारे में तो किसी को संदेह था ही नहीं कि  हिमंता बिस्वा सर्मा की सरकार बड़े बहुमत के साथ लौटेगी। सभी एग्जिट पोल एक स्वर से उसकी पुष्टि कर रहे हैं। केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भाजपा के गठबंधन वाली एनडीए की सरकार  दोबारा बनने की संभावना भी आश्चर्यचकित नहीं कर रही। इसी तरह केरल में वाम मोर्चे की सरकार को हटाकर 10 साल बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ की वापसी भी सुनिश्चित मानी जा रही थी। लेकिन पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में तमिल फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता विजय द्वारा बनाई गई पार्टी ने मैदान में उतरकर अनिश्चितता पैदा कर दी। हालांकि ज्यादातर एग्जिट पोल सत्तारूढ़ द्रमुक के नेतृत्व वाली स्टालिन सरकार के लौटने की भविष्यवाणी कर रहे हैं लेकिन एक्सिस माय इंडिया ने विजय की पार्टी के सबसे बड़े दल के तौर पर उभरने की भविष्यवाणी कर सनसनी मचा दी है । इस पोल के अनुसार तमिलनाडु में त्रिशंकु विधानसभा बनने जा रही है। यदि वाकई ऐसा हुआ तब विजय , द्रमुक को साथ लेंगे या अन्ना द्रमुक - भाजपा गठबंधन के साथ गठजोड़ करेंगे,  ये सवाल राजनीतिक विश्लेषकों को परेशान कर रहा है। विजय की नई - नवेली पार्टी यदि सत्ता में आ गई तब 6 दशक बाद तमिलनाडु में उस द्रविड़ राजनीति का वर्चस्व समाप्त होगा जो पेरियार रामास्वामी से अन्ना दौरई, करुणानिधि, एम. जी रामचंद्रन और जयललिता से होते हुए स्टालिन तक निर्बाध चली आ रही है। द्रमुक के विभाजन के बाद  अन्ना द्रमुक बनी किंतु प्रदेश की राजनीति पर इन दोनों का ही कब्जा बना रहा। यदि विजय ने इसे तोड़ा तो वह इस राज्य की राजनीति की दिशा बदल सकता है क्योंकि वैसा होने पर भाजपा और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियां अपना जनाधार बढ़ाने में सक्षम होंगी जो उक्त दोनों दलों की पिछलग्गू बनने के लिए मजबूर हैं। हालांकि विजय के हाथ में सत्ता जाने की बात गले नहीं उतर रही किंतु तमिलनाडु की जनता द्रमुक और अन्ना द्रमुक से ऊबकर किसी नए विकल्प का चयन कर ले तो ये इस राज्य के लिए शुभ संकेत होगा। लौटकर प. बंगाल की चर्चा करें तो ये बात तो हर कोई मान रहा है कि पहले तो भाजपा ने ममता बैनर्जी को बुरी तरह घेरकर मुकाबले के इकतरफा होने की आशंका को नष्ट किया और फिर  आक्रामक रणनीति के सहारे तृणमूल के चुनाव प्रबंधन की जड़ों को कमजोर  किया।  सुश्री बैनर्जी ने मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को मुद्दा बनाकर लड़ाई कोलकाता बनाम केंद्र करने की भरसक कोशिश की किंतु जिस तरह बिहार में लालू प्रसाद यादव के जंगल राज की खौफनाक यादें ताजा कर  भाजपा ने तेजस्वी यादव को पटकनी दे दी ठीक वही रणनीति अपनाकर  प.बंगाल में महिला सुरक्षा और तृणमूल की गुंडागर्दी के मुद्दे को गर्माकर बदलाव की भावना को लोगों के दिल में बिठाया। रही - सही कसर पूरी हो गई केंद्रीय बलों की तैनाती से जिसके कारण मतदाताओं को आतंकित कर मतदान करने से रोकने जैसी हरकतों पर नियंत्रण लग सका। बहरहाल अब तो मतदान हो चुका और 4 मई की सुबह तक अनुमानों के घोड़े दौड़ते रहेंगे किंतु जैसा कि ज्यादातर एग्जिट पोल बता रहे हैं यदि प. बंगाल में ममता सरकार को हटाकर भाजपा अपना झंडा फहराने में कामयाब हुई तब राष्ट्रीय राजनीति में नरेंद्र मोदी और उनके मुख्य रणनीतिकार अमित शाह का कद और ऊंचा हो जाएगा। जिसका प्रभाव अगले वर्ष होने वाले उ.प्र, पंजाब और गुजरात विधानसभा के चुनाव पर पड़ना तय है। तृणमूल के हाथ से सत्ता खिसकने से अखिलेश यादव का हौसला भी पस्त होगा। वहीं कांग्रेस के हाथ केरल की सत्ता आने से वह इंडिया गठबंधन से बाहर निकलकर एकला चलो की नीति अपनाएगी। वैसे भी अब इस गठबंधन में कोई दम नहीं बची है। एक लिहाज से अच्छा ही होगा यदि क्षेत्रीय पार्टियों के चंगुल से कांग्रेस मुक्त हो क्योंकि उन्हीं के चलते उसकी दुर्दशा हुई है। 


-रवीन्द्र वाजपेयी 


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