Monday, 27 April 2026

दिन ब दिन हिंसक हो रहा अमेरिकी समाज



अमेरिका में गत दिवस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा वाशिंगटन के एक सुप्रसिद्ध होटल में पत्रकारों के लिए आयोजित रात्रि भोज में उस समय अफरातफरी मच गई जब आयोजन आयोजन कक्ष के बाहर हथियारबंद एक व्यक्ति ने कई गोलियां चलाकर दहशत फैला दी। सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल सभी विशिष्टजनों को सुरक्षित निकाला और उस व्यक्ति को दबोच लिया। उसकी गोली एक सुरक्षा कर्मी को भी लगी किन्तु वह लाइफ जैकेट पहने हुए था इसलिए बच गया। हालांकि कोई बड़ी अनहोनी नहीं हुई। अब तक जो कुछ भी सामने आया उसके अनुसार पेशे से इंजीनियर हमलावर ट्रम्प सरकार से असंतुष्ट था। इस घटना के पीछे किसी बड़े षड़यंत्र की आशंका का पता नहीं चल सका।  ट्रम्प ने स्वयं भी कहा कि ईरान युद्ध से इसका कोई संबंध नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार से नाराज कोई व्यक्ति इस तरह का कदम क्यों उठाएगा जिसमें अव्वल तो खुद उसकी जान जाने का खतरा था और बच जाने पर पूरी जिंदगी जेल में सड़ना तय है। इसके साथ ही ये बात भी विचारणीय है कि एक साधारण  नागरिक महंगे स्वचालित हथियार आखिर क्यों रखेगा? लेकिन इस प्रश्न का उत्तर अमेरिका में इसलिए अप्रासंगिक है क्योंकि अपने लोकतंत्र पर इतराने और दुनिया के सबसे सम्पन्न और शक्तिशाली राष्ट्र होने के घमंड में चूर इस देश में आम आदमी  किसी भी तरह की पिस्तौल , रिवाल्वर, रायफल यहां तक कि ए.के 47 जैसी स्वचालित गन भी बिना लायसेंस के खरीदकर रख सकता है। इसका एक आशय ये भी है कि वहां प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सुरक्षा का प्रबंध खुद करना पड़ता है। साथ ही सरकार अपने नागरिकों को इतना समझदार समझती है कि वे इन हथियारों का उपयोग गलत उद्देश्य से नहीं करेंगे। लेकिन इसी अमेरिका के दो राष्ट्रपति अब्राहम  लिंकन और जॉन एफ.कैनेडी के  अलावा रॉबर्ट कैनेडी और मार्टिन लूथर किंग जैसे अनेक दिग्गज नेता इसी हथियार स्वतंत्रता के शिकार हो चुके हैं। इसके बाद वहां इस व्यवस्था को नियंत्रित करने पर काफी बहस चली। कुछ राज्यों ने प्रतिबंधात्मक नियम भी बनाए। लाइसेंस प्राप्त विक्रेता से ही शस्त्र खरीदने के साथ ही खरीददार की पृष्ठभूमि जांचने जैसी अनिवार्यता भी रखी गई और न्यूनतम आयु का निर्धारण भी किया गया। बावजूद इसके अमेरिका में गन कल्चर का बोलबाला रोका नहीं जा सका। दुनिया भर को उपदेश देने वाले अमेरिका की कानून व्यवस्था में भी तमाम विसंगतियां हैं। अनेक महानगर तो अपराधिक गतिविधियों के लिए कुख्यात हैं। इनमें रात्रि  के समय किसी सुनसान इलाके में जाना जान जोखिम में डालने जैसा है। लूटमार करने वाले  मांग पूरी नहीं होने पर बेरहमी से गोली मारकर भाग जाते हैं।  ये कहने में कुछ भी गलत नहीं है कि अमेरिका में पिस्तौल और बंदूक जैसी खतरनाक चीज आसानी से उपलब्ध होने से उसके उपयोग के प्रति भी गंभीरता का नितान्त अभाव है। बीते कुछ सालों में सभ्यता के ठेकदार इस देश में किशोरावस्था के अनेक बच्चों ने बंदूक चलाकर अपने विद्यालय के सहपाठियों की हत्या कर डाली जिसका कारण मामूली आपसी विवाद निकला। समाजशास्त्रियों ने  ऐसी घटनाओं के बारे में निष्कर्ष निकाला कि माता - पिता के झगड़े संतानों को भी तनावग्रस्त बना रहे हैं। परिवार नामक संस्था के टूटते जाने का जो मनोवैज्ञानिक दुष्प्रभाव बच्चों पर पड़ता है उसके कारण सामाजिक विघटन की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। आर्थिक समृद्धि और सामाजिक सुरक्षा के बावजूद आम अमेरिकी तनाव में जी रहा है। यद्यपि इस सबका गत दिवस वॉशिंगटन के होटल में हुए गोलीकांड से सीधा संबंध नहीं है जहां राष्ट्रपति ट्रम्प की पार्टी चल रही थी। लेकिन इस घटना से अमेरिका में हथियारों की आसान उपलब्धता के औचित्य पर तो प्रश्नचिन्ह लगा ही। इतने सम्पन्न देश में तो कानून व्यवस्था इतनी अच्छी होनी चाहिए कि आम नागरिक को पिस्तौल और बंदूक जैसी चीज़ें खरीदने की जरूरत ही न पड़े। मनोवैज्ञानिक भी इस बात को मानते हैं कि उत्तेजना की स्थिति में किसी व्यक्ति के पास हथियार होना उसके लिए आत्मघाती होने के साथ ही किसी अन्य की जान के लिए भी खतरा बन सकता है। हमारे देश में भी अपने खुद के हथियार से आत्महत्या करने के प्रकरण आए दिन सामने आते हैं। ऐसे में अमेरिका जैसे देश में जहां परिवार टूटने के साथ ही सामाजिक ढांचे की दरार चौड़ी होती जा  रही हो, हथियार रखने की आजादी खून की होली खेलने का अवसर प्रदान करती है। यद्यपि ये उसका आंतरिक मामला है किंतु भारतीय मूल के लाखों लोग अमेरिका में बसे होने से वहां खेल - खेल में गोलियां चल जाने की हर खबर उनकी कुशलता के प्रति चिंता उत्पन्न कर देती है।


- रवीन्द्र वाजपेयी

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