जंतर मंतर आंदोलन धर्मेंद्र प्रधान के त्यागपत्र से समाप्त हो गया। उसकी आयोजक काॅकरोच जनता पार्टी ने स्पष्ट नहीं किया कि वह राजनीतिक दल बनेगी या दबाव समूह के रूप में समय - समय पर उभरती रहेगी। इस पार्टी ने जंतर मंतर का आंदोलन जिस तरह संचालित किया उससे स्पष्ट हो गया कि यदि प्रधान न्यायाधीश काॅकरोच वाली टिप्पणी नहीं करते तब भी किसी और नाम से ये प्रयोग होता । इस पार्टी ने उस वर्ग को आकर्षित किया जिसकी चिंता न अतीत है और न ही वर्तमान। उसके लिए उसका भविष्य ही एकमात्र लक्ष्य है। पहले यूजीसी और फिर नीट पेपर लीक ने इस वर्ग को चिंता में डाल दिया जिसे इसने लपक लिया। कोशिश तो देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी ने भी की थी लेकिन उसके नेता मुद्दे को बीच में छोड़कर विदेश यात्रा पर चले गए। आम आदमी पार्टी ने भी प्रयास किया परंतु युवाओं में उसकी विश्वसनीयता नहीं बची। इसीलिए उसने अपने पुराने साथियों को इस पार्टी के रूप में आगे कर युवा असंतोष की चिंगारी को भड़काने का तानाबना बुना। लेकिन अपने तमाम प्रयासों के बाद भी आंदोलन की सफलता का सेहरा अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, आतिशी और संजय सिंह अपने सिर पर नहीं बांध सके। दूसरी बात ये हुई कि आंदोलन के सबसे बड़े चेहरे अभिजीत दिपसे ने खुद को दलित बताकर अपनी पहचान स्पष्ट कर दी। इसीलिए भीम आर्मी के चंद्रशेखर रावण ने भी आंदोलन में घुसपैठ बढ़ाई।जंतर मंतर पर ब्राह्मण वाद विरोधी नारे भी इसीलिए लगे। जेएनयू की टुकड़े - टुकड़े गैंग ने भी जंतर मंतर पर अपनी ढपली पीटकर अश्लीलता का हरसंभव परिचय दिया। सरकार द्वारा मांगे मान लेने के बाद आंदोलन तो खत्म हो गया किंतु नये आंदोलन के बीज बिखेर गया। युवा शक्ति की जीत का ढिंढोरा पीटते हुए डाॅ. अंबेडकर का चित्र लहराने वाले अभिजीत दिपके और उनके सिपहसालारों ने जिस डिजिटल क्रांति का आगाज किया वह अब उन्हीं के गले पड़ने जा रही है। कॉकरोच जनता पार्टी की तर्ज पर आरक्षण के विरोध में एक पेज इंस्टाग्राम पर बनाये जाते ही उसके साथ 35 लाख लोग जुड़ गए। स्मरण रहे यूजीसी विवाद के समय भी सवर्ण जातियों के युवाओं का गुस्सा सामने आया था। नीट पेपर लीक के चलते वह ठण्डा होता दिखा किंतु काॅकरोच जनता पार्टी ने राख के नीचे दबी चिंगारी को हवा दे दी। इसीलिए जंतर मंतर से उसका डेरा उठते ही इंस्टाग्राम परआरक्षण हटाओ आंदोलन का शोला भड़क उठा। इसका नारा है सभी जातियाँ एक समान,मेरा बस ये देश महान। सामान्य और कुछ ओबीसी श्रेणी के युवाओं ने इस डिजिटल अभियान को हवा दी है। इसके एडमिन की मांग है कि जाति के आधार पर मिलने वाले आरक्षण को पूरी तरह खत्म कर सरकारी नौकरियों और कॉलेज में प्रवेश प्रतिभा, अंक और योग्यता के आधार पर हों।आर्थिक आधार पर मदद की जाए जिससे कमजोर आर्थिक और सामाजिक हैसियत वाले युवाओं के सपने साकार हो सकें। इस पेज पर आरक्षण भेदभाव है जैसे नारे लगाए गए हैं। पेज के एडमिन और समर्थकों ने घोषणा की है कि वे इसे काॅकरोच जनता पार्टी की तरह ही एक बड़े आंदोलन में बदलेंगे। इसी तरह E20 जनता पार्टी नामक डिजिटल अभियान भी शुरू हो गया जो एक तरह का डिजिटल कैंपेन उन लोगों द्वारा शुरू किया गया है, जो मानते हैं कि देशभर में E20 पेट्रोल को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्राहकों के पास 100% शुद्ध पेट्रोल खरीदने का विकल्प भी होना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल भी पंपों पर मिलना चाहिए ताकि फैसला ग्राहक खुद कर सकें। इस कैंपेन से भी लोग तेजी से जुड़ रहे हैं। हालांकि ये अभियान उतना सड़क पर नहीं उतर सकता किंतु आरक्षण हटाओ आंदोलन से कुछ ही दिनों में करोड़ों लोग जुड़ गए तब और एक नया जंतर मंतर खड़ा होकर सरकार को चुनौती देने मैदान में उतर आया तब क्या दिपके, केजरीवाल, राहुल, और सोनम वांगचुक इस जेन जी के पक्ष में भी खड़े होने का साहस दिखाएंगे? काॅकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में ब्राह्मणवाद को गालियाँ दी गईं तो जेन जी के प्रशंसक इसे अभिव्यक्ति की आजादी का नया दौर बताते हुए इतरा रहे थे किंतु अब सवाल ये है कि आरक्षण हटाओ आंदोलन में शामिल जेन जी आंबेडकरवाद के विरुद्ध नारेबाजी करे तब क्या दिपके और चंद्रशेखर रावण उसका समर्थन करेंगे? जंतर मंतर आंदोलन की सफलता से आत्ममुग्ध तबके को ये जा लेना चाहिए कि नीट परीक्षा में सफल हुए लाखों छात्र ऐसे भी हैं जिन्हें ज्यादा अंक मिलने के बाद भी उन्हें इसलिए प्रवेश नहीं मिल सका क्योंकि आरक्षण प्राप्त कम अंकों वाले छात्र को उपकृत किया गया। डिजिटल आंदोलन का ये सिलसिला कहाँ जाकर रुकेगा ये कहना कठिन है क्योंकि जेन जी नामक जो जिन्न बोतल से बाहर आ गया है उसे दोबारा बंद करना बहुत बड़ी समस्या है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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