काॅकरोच जनता पार्टी ने आज से अपना आंदोलन फिर शुरू करने की धमकी दी है। उसका आरोप है कि जंतर मंतर आंदोलन समाप्त करने के लिए सरकार के साथ जो बातचीत हुई उसमें धर्मेंद्र प्रधान के त्यागपत्र और नीट पेपर लीक पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवार को एक करोड़ रु. की क्षतिपूर्ति के साथ ही इस आंदोलन के सिलसिले में दिल्ली के अलावा देश के किसी भी हिस्से में छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने के बात तय थी। श्री प्रधान ने तो त्यागपत्र दे दिया और पीड़ित परिवारों को आर्थिक क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो रही है किंतु छात्रों पर अपराधिक प्रकरण दर्ज होने और गिरफ्तारी की खबरें समझौते का उल्लंघन है। इसके बाद बिहार सरकार ने 26 तारीख तक छात्रों के विरुद्ध दायर सभी प्रकरण वापस लेने का फैसला कर लिया। लेकिन पार्टी के जन्मदाता अभिजीत दिपके का आरोप है कि दिल्ली और मुंबई में आंदोलन में शामिल अनेक छात्रों को पूछताछ के नाम पर जबरन थाने में बिठाकर रखा गया है जिससे उनके मन में भय व्याप्त है। उन्होंने एक वीडियो संदेश में स्पष्ट तौर पर कहा कि यदि उक्त कारवाई जारी रही तो पार्टी दोबारा आंदोलन शुरू कर देगी। इस सबके बीच आंदोलन के नेताओं ने वरिष्ट अधिवक्ता कपिल सिब्बल से संपर्क साधा जिन्होंने ऐसे मामलों में कानूनी सहायता का आश्वासन भी दे दिया। इस बारे विचारणीय बात ये है कि आंदोलन खत्म करते समय जो समझौता हुआ था उसमें छात्रों का उल्लेख था। लेकिन जो कारवाई हो रही है वह उन आपराधिक तत्वों के विरुद्ध है जिन्होंने पुलिस पर हमला किया, सरकारी वाहन तोड़े और पत्थरबाजी की। उल्लेखनीय है कि काॅकरोच जनता पार्टी पर जब ये आरोप लगा कि उसके आंदोलन में हिंसक तत्व घुस आये जिन्होंने पुलिस कर्मियों पर हमले किये तब उनका जबाब था कि भाजपा और रास्वसंघ ने अपने गुंडे आंदोलन में भेजकर हिंसा फैलाई। अब जब पुलिस वीडियो और सी.सी कैमरों की रिकार्डिंग के जरिये आंदोलन को हिंसक रूप देने वालों की धरपकड़ कर रही है तब काॅकरोच जनता पार्टी को अपनी असलियत सामने आने का डर सता रहा है। जिस समझौते के उल्लंघन का रोना पार्टी नेता रो रहे हैं उसमें भी अपराधी तत्वों को अभयदान का कोई जिक्र नहीं था। सर्वोच्च न्यायालय ने भी आंदोलन को लोकतांत्रिक अधिकार मानते हुए पुलिस की बर्बरता पर जहाँ ऐतराज जताया वहीं उस पर होने वाले हमलों पर भी चिंता जताई। काॅकरोच जनता पार्टी की मांग है कि दिल्ली पुलिस अपनी कारवाई के लिए माफी मांगे लेकिन दूसरी तरफ वह उपद्रवी तत्वों द्वारा पुलिस पर हमले और सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ के जिम्मेदार लोगों को बचाने में लगी है। इस दोहरे रवैये के कारण वह आलोचनाओं का शिकार हो रही है। आंदोलन के प्रति गंभीरता पर सवालिया निशान भी उसने स्वयं खड़े कर दिये जब सोशल मीडिया पर काॅकरोच जनता पार्टी के नेताओं के वे वीडियो जारी हुए जिसमें वे लड़के - लड़कियों के साथ किसी आलीशान होटल में नाचते हुए जश्न मनाते दिखे। जब इसे लेकर उनकी फजीहत शुरू हुई तब बजाय शर्मिंदगी व्यक्त करने के कहा गया कि जेन जी का यही तरीका है। यदि ये नाच - गाना आंदोलन खत्म करने वाली रात जंतर मंतर पर हुआ होता तब ये नेता वहाँ मौजूद भीड़ पर उसकी जिम्मेदारी डालकर बच निकलते । लेकिन अपना घर छोड़कर आंदोलन स्थल पर दिन - रात मौजूद रहे कथित जेन जी को घर वापसी का रास्ता पकड़ने का निर्देश देकर गिने - चुने दरबारियों के साथ नाच - गाने की महफ़िल सजाना उन हजारों युवक - युवतियों के साथ छलावा है जिनके बल पर तीन - चार पेशेवर लोगों ने पूरे देश को अशांत करने की कोशिश की। बहरहाल , आंदोलन की समाप्ति के बाद होटल में जश्न मनाते हुए इस पार्टी के नेताओं के वीडियो उन जेन जी लड़के - लड़कियों के लिए आँखें खोल देने वाले हैं जो उनके बहकावे में आकर कई हफ्ते धूप में पसीना बहाते रहे। और अब तो कपिल सिब्बल ने इस पार्टी को 1 करोड़ रु.देने की घोषणा भी कर दी। इसके बाद बड़ी बात नहीं यदि बड़ी बात नहीं अगला आंदोलन भी किसी होटल या रिसार्ट में आयोजित हो क्योंकि हर बात पर ये सफाई दी जाती है कि जेन जी कुछ अलग हटकर सोचने और करने में यकीन रखते हैं। आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारजन इन नाचते हुए जेन जी नेताओं को देखकर क्या सोच रहे होंगे इसकी कल्पना भी विचलित कर देती है। आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारजन इन नाचते हुए जेन जी नेताओं को देखकर क्या सोच रहे होंगे इसकी कल्पना भी विचलित कर देती है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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