Friday, 20 March 2026

अपनी बर्बादी के लिए ईरान खुद जिम्मेदार


ईरान पर अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई के कारण भड़की लड़ाई तीन सप्ताह  के बाद भी रुकने का नाम नहीं ले रही  किंतु ये स्पष्ट  है कि ईरान की कमर टूटने लगी है। यद्यपि वह इजराइल , कतर , सऊदी अरब , बहरीन , ओमान में मिसाइलें और ड्रोन छोड़कर  तेल और गैस भंडार तथा रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचा रहा है । होर्मुज नामक समुद्री मार्ग से तेल और गैस की आपूर्ति रोककर उसने दुनिया को संकट में डाल दिया। दो दिन पहले जब डोनाल्ड ट्रम्प ने नाटो देशों  से  होर्मुज खुलवाने सहयोग मांगा तब सभी ने ट्रम्प को  ठेंगा दिखा दिया किंतु अब वे  तैयार हो गए हैं। दूसरी तरफ सऊदी अरब ने भी ईरान को  चेतावनी दी है कि वह हमले बंद करे वरना उसके सब्र का बांध टूट जाएगा। ऐसी ही धमकी वे सभी देश दे रहे हैं जिन पर ईरान मिसाइलें दाग रहा है।  आज इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने तो पत्रकार वार्ता में उपस्थित होकर अपने जीवित रहने का प्रमाण दे दिया। वहीं अपने नेताओं के मारे जाने का सिलसिला जारी रहने से  कमजोर  होकर ईरान बदहवासी में हमले कर रहा है।  लेकिन इसकी कीमत उसे अपनी बर्बादी के तौर पर चुकानी पड़ रही है। अमेरिका और इजराइल के दावे कुछ हद तक अतिरंजित हो सकते हैं। लेकिन ईरान की नौसेना अमेरिकी घेराबंदी को तोड़ नहीं सकी। दुनिया भर में ईरान इस बात के लिए तो प्रशंसा बटोर रहा है कि उसने अभी तक अमेरिका के सामने घुटने नहीं टेके और इजराइल के अभेद्य सुरक्षा तंत्र में भी सेंध लगा दी परंतु अपनी ताकत का जरूरत से ज्यादा आकलन करने के साथ ही  ढेर सारे मोर्चे खोलकर उसने मुस्लिम देशों की  सहानुभूति  खो दी। लड़ाई लंबी खिंचेगी या युद्धविराम हो जाएगा ये  अभी अनिश्चित है क्योंकि इजराइल नहीं चाहेगा कि ईरान को घायल अवस्था में छोड़कर दोबारा सिर उठाने का मौका दिया जाए। मौके का लाभ उठाकर वह लेबनान की जमीन हथियाता जा रहा है। इधर अमेरिका और इजराइल  ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह नेस्तनाबूत करने के  लिए उसके सैन्य , व्यावसायिक, प्रशासनिक ठिकानों के साथ ही तेल और गैस भंडारों को नष्ट कर रहे हैं। शस्त्र भंडार और सैन्य उत्पादन इकाइयां जमींदोज हो जाने से उसका रक्षा उत्पादन ठप पड़ गया है। वहीं बैलेस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के भंडार खाली होने के कारण  मारक क्षमता भी दिन ब दिन घट रही है। यदि नाटो देश होर्मुज से समुद्री परिवहन के लिए एकजुट होकर आगे आए तब ईरान के लिए मुकाबला करना आसान नहीं रहेगा। आज उसे अपनी वह गलती कचोट रही होगी जब उसने हमास को उकसाकर इजराइल पर हमला करवा दिया। दरअसल मौजूदा युद्ध की नींव हमास के उस हमले से ही पड़ी । उस समय भी इजराइल ने पलटवार करते हुए हमास के संरक्षक ईरान पर जबरदस्त हवाई हमले किए थे। हालांकि वह लड़ाई  लंबी नहीं चली लेकिन गाजा पूरी तरह मलबे के ढेर में बदल गया । इस युद्ध का अंतिम परिणाम जो भी हो किंतु ईरान  में चौतरफा विनाश का जो मंजर दिखाई दे रहा उसे देखते  हुए उसकी कथित बहादुरी भी यूक्रेन की  तरह से ही हँसी का पात्र बनकर रह गई। ईरान की सत्ता जिन लोगों के पास है वे कितनी भी डींगें हांके किंतु हर पल बर्बादी उन्हें घेरती जा रही है जिसका परिणाम सिवाय पराजय के और हो ही नहीं सकता। इसके बाद ईरान मे खामेनेई शैली का इस्लामी कट्टरवाद जारी रहेगा, शाह रजा पहलवी वाला राजतंत्र लौटेगा या कोई नई व्यवस्था उत्पन्न होगी ये कह पाना कठिन है। अरब जगत के इस बड़े और ताकतवर देश के विनाश के लिये जाहिर तौर पर तो इजराइल और अमेरिका जिम्मेदार हैं लेकिन सही बात ये है कि खामेनेई के रहते अड़ियलपन और अव्यावहारिक नीतियां अपनाकर ईरान ने अपने पांव पर खुद ही कुल्हाड़ी मार ली जिसके कारण  देश दशकों पीछे चला गया। और क्या पता युद्ध के बाद वह एकजुट  रहेगा या उसके कई टुकड़े हो जाएंगे। 


-रवीन्द्र वाजपेयी

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