Thursday, 30 July 2026

कोचिंग माफिया पर भी शिकंजा कसा जाए



लोक परीक्षा संशोधन विधेयक गत दिवस लोकसभा में पारित होने के बाद आज राज्यसभा में विचारार्थ रखा जा रहा है। सत्ता पक्ष के संख्या बल को देखते हुए वहाँ भी इसके स्वीकृत होने की पूरी संभावना है जिसके बाद राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित होकर इसे कानून की शक्ल मिल जायेगी। नीट परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक हो जाने के बाद देश भर में सरकार द्वारा ली जाने वाली परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों की गोपनीयता भंग होने को लेकर छात्रों के साथ ही उनके अभिभावकों के मन में भी व्यवस्था को लेकर जबरदस्त गुस्सा देखने मिला। कुछ परीक्षार्थियों द्वारा आत्महत्या करने के कारण शिक्षा मंत्रालय की अक्षमता का मुद्दा उठ खड़ा हुआ। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के अध्यक्ष से लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान निशाने में आने लगे। इस चिंगारी को नई -  नवेली कॉकरोच जनता पार्टी ने हवा देकर दिल्ली के जंतर मंतर पर आंदोलन खड़ा कर दिया जिसकी परिणिति श्री प्रधान के त्यागपत्र से हुई। हालांकि शिक्षा मंत्रालय से जुड़े अनेक अधिकारियों पर भी गाज गिरी किंतु परीक्षा संचालित करवाने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के शीर्ष पदाधिकारी को आश्चर्यजनक ढंग से अभय दान दे दिया गया। चौतरफा दबाव के बाद सरकार ने प्रश्न पत्र लीक होने से रोकने के लिए विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति भी गठित कर दी और उसी के साथ प्रश्न पत्र लीक करने वालों को कड़ा दंड देने वाला कानून बनाने की पहल संदर्भित विधेयक के माध्यम से कर दी।  नीट परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक होने के मामले में कई लोग गिरफ़्त में आ चुके हैं। मामले के त्वरित निपटारे हेतु फास्ट ट्रैक कोर्ट भी गठित किया गया है। सीबीआई इस प्रकरण में जाँच एजेंसी है। इस बारे में  जिन लोगों पर अपराधिक मामले दर्ज हुए उनमें कुछ कोचिंग संचालकों के अलावा प्रश्न पत्र तैयार करने वाले शिक्षक, और दलाल किस्म के लोग हैं। देर - सवेर कुछ और लोगों का पर्दाफ़ाश होना तय है। लेकिन सबसे बड़ी जरूरत है शिक्षा जैसे पवित्र पेशे में आई इस बुराई की जड़ों में मठा डालने की। और इसके लिए शिक्षा का व्यवसायीकरण रोकना पहली आवश्यकता है। आजकल अखबारी पन्नों के अलावा होर्डिंग्स और डिजिटल मीडिया पर कोचिंग संस्थानों के बड़े - बड़े विज्ञापन इस बात का प्रमाण हैं कि शिक्षा अब पूरी तरह एक उद्योग बन चुकी है जिसमें पूँजी का खेल होने से मुनाफाखोरी चरम पर है। कोचिंग व्यवसाय को माफिया कहा जाना बेशक अटपटा लगता है ।  लेकिन बिहार की राजधानी पटना में दो कोचिंग संचालकों के  विवाद में गोली चलने तक की नौबत आ आ गई जिसके चलते एक संचालक को जेल जाना पड़ा। राजस्थान का कोटा शहर तो कोचिंग की राजधानी कहलाता है। ये बात भी धीरे - धीरे सामने आती जा रही है कि प्रश्न पत्र लीक होने में कोचिंग संचालकों की भी भूमिका रहती है। इनकी अनाप - शनाप कमाई का अंदाज इनके द्वारा प्रचार पर किया जाने वाला खर्च है। अखबार के प्रथम पृष्ठ कोचिंग संस्थानों के विज्ञापनों से भरे रहते हैं। ये कहना भी गलत नहीं होगा कि बिल्डर और ऑटोमोबाइल उद्योग की  टक्कर के विज्ञापनदाता इन दिनों कोचिंग संस्थान हैं।  चूंकि इनका व्यवसाय इनके संस्थान से सफल होकर निकलने वाले छात्रों पर ही टिका होता है इसीलिये ये परीक्षा परिणाम आते ही करोड़ों के विज्ञापनों की झड़ी लगा देते हैं। यही सब देखते हुए प्रश्न पत्र लीक मामले में कतिपय कोचिंग संचालक शक के दायरे में है। जैसी कि चर्चा है उसके अनुसार इस बार की नीट परीक्षा के अलावा अतीत में संघ लोकसेवा आयोग सहित राज्यों की प्रवेश और चयन परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक होने में शिक्षा माफिया की सक्रिय हिस्सेदारी है। इसीलिये सरकार को चाहिए कोचिंग संस्थानों पर शिकंजा कसने के लिए सख्त इंतजाम करे क्योंकि इनके कारण हमारे देश में शाला स्तर की शिक्षा की गुणवत्ता का सत्यानाश हो रहा है। हाल ही में एक सर्वे ने ध्यान खींचा जिसके अनुसार आई.आई.टी जैसे विश्वस्तरीय संस्थान के प्राध्यापक से अधिक वेतन और भत्ते कोटा के कुछ कोचिंग संस्थान देते हैं। भले ही इसकी पुष्टि न की जा सके किंतु प्रश्न पत्र लीक होने के मामलों में कोचिंग माफिया की गर्दन में फँदा डालना बेहद जरूरी है। वरना कितने भी कानून बना लिए बजाएं पैसे की ताकत के आगे व्यवस्था लाचार नजर आयेगी। इसके साथ ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी और संघ लोक सेवा आयोग में होने वाली नियुक्तियों में राजनीतिक प्रतिबद्धता को परे रखते हुए योग्यता और प्रामणिकता का ध्यान रखा जाए। वरना आगे पाट पीछे सपाट की स्थिति बनी रहेगी। 

- रवीन्द्र वाजपेयी


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