अक्तूबर 2023 को इजरायल पर हमास ने बड़ा हमला बोला जिसमें 1200 इजरायली नागरिकों की जान गई और 251 को बंधक बना लिया गया। इसी के साथ इजरायल ने हमास के खिलाफ जंग का एलान किया। इस बीच गाजा में इजरायली हमलों के विरोध में हिजबुल्लाह ने भी उत्तरी इजरायल को निशाना बनाना शुरू किया। उस हमले को एक साल पूरा होने में सप्ताह भर बाकी है। इस अवधि में इजरायल ने जो रौद्र रूप दिखाया उसके कारण रूस और यूक्रेन युद्ध की खबरें फीकी पड़ गईं। हमास द्वारा अचानक किये गये मिसाइल हमलों ने इजरायल की अचूक मानी जाने वाली एयर डिफेंस प्रणाली पर सवाल उठा दिये। हमास के लड़ाके जिस तरह इजरायली नागरिकों का अपहरण करने में कामयाब हुए उससे पूरी दुनिया स्तब्ध रह गई। यहाँ तक कि अमेरिका भी आश्चर्य में डूब गया। वह हमला इजरायल की गुप्तचर एजेंसियों के गाल पर भी बड़ा तमाचा था जो दुनिया भर में धाक जमा चुकी थीं। हमास के हमले के पीछे ईरान का हाथ बताया गया जो अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन है और इजरायल को मिटाने आमादा है। असल में अमेरिका के प्रयासों से सऊदी अरब और इजरायल के बीच दोस्ती की शुरुआत स्वरूप एक समझौता अंतिम स्थिति में आ गया था जिसके बाद अरब जगत का समूचा शक्ति संतुलन बदल जाता। सं. अरब अमीरात के देशों से इजरायल के व्यापारिक संबंध कायम होने के बाद ईरान परेशानी में था। उसे लगा कि सऊदी अरब और इजरायल में दोस्ताना कायम होने पर इस्लामिक जगत में इजरायल विरोधी भावना मंद पड़ जायेगी। वैसे भी लगातार युद्ध करते - करते अनेक देश हताश हो चुके हैं। अन्य कुछ देश भी इजरायल के विरोधी तो हैं किंतु सीधे टकराव से बचने लगे हैं। लेबनान और यमन ही हैं जो ईरान की तरह अभी भी उसके प्रति नफरत से भरे हुए हैं। गत वर्ष जब हमास ने इजरायल पर सैकड़ों मिसाइलें दागकर उसका मनोबल तोड़ने की कोशिश की तब उसने दोगुनी ताकत से पलटवार किया और हमास को समूल नष्ट करने के संकल्प के साथ गाजा पट्टी की आपूर्ति रोक दी। स्मरणीय है अतीत में हुए समझौते में गाजा और पश्चिमी हिस्से के रूप में फिलीस्तीन के दो टुकड़े कर दिये गए। बीच में इजरायल है। दोनों को बिजली , पानी सहित अन्य जीवनोपयोगी वस्तुओं की आपूर्ति वही करता है। हमास का हमला गाजा की तरफ से हुआ जिसकी सीमाएं मिस्र और लेबनान से मिलती हैं। इजरायल का जवाबी आक्रमण गाजा वासियों के लिए बरबादी लेकर आया। लाखों लोग बेघर हो गए । पूरी दुनिया इजरायल पर युद्ध विराम के लिए दबाव डालती रही किंतु वह रुकने तैयार नहीं। लेकिन इस युद्ध का केंद्र अचानक गाजा के साथ ही लेबनान भी बन गया। इसका कारण वहाँ बैठा हिज़बुल्लाह नामक संगठन है जो इस्लामिक आतंकवाद का मुखिया बना हुआ था। लेकिन बीते कुछ दिनों में ही इजरायल ने उसके सभी शीर्ष नेताओं को मार डाला। लेबनान की राजधानी बेरुत आधे से ज्यादा मलबे में तब्दील हो चुकी है। हिजबुल्लाह की पीठ पर ईरान का हाथ होने से अब ये आशंका व्यक्त की जा रही है कि इजरायल का अगला निशाना वही होगा। इसके डर से ईरान के सर्वोच्च नेता को अति सुरक्षित स्थान पर छुपना पड़ा। कहा जा रहा है पश्चिम एशिया लंबे युद्ध में फंसने जा रहा है। इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने संरासंघ महासभा को संबोधित करते हुए जो तेवर दिखाये उनसे लगता है वह इस बार इस्लामिक आतंकवाद की कमर तोड़ने पर आमादा है। ईरान भी उससे सीधे टकराने का साहस नहीं कर पा रहा। अमेरिका चूंकि इजरायल के साथ खुलकर खड़ा है इसलिए वह कदम पीछे खींचने तैयार नहीं है। लेकिन इस संकट में जो सबसे बड़ी बात सामने आई वह ये कि अरब राष्ट्रों को इजरायल के साथ संबंध सुधारकर पश्चिम एशिया को आग में जलने से बचाने की अकलमंदी दिखानी चाहिए। इजरायल विज्ञान और तकनीक में जितना आगे है उसके सामने तेल संपदा संपन्न तमाम अरब देश भी कहीं ठहरते नहीं हैं। सं. अरब अमीरात इस बात को समझ चुका है और सऊदी अरब के नये शासक भी इजरायल के साथ अच्छे रिश्तों का फ़ायदा समझकर उससे निकटता स्थापित करना चाह रहे हैं जिसमें ईरान रोड़े अटका रहा है। इस्लामिक देशों को अपने यहाँ बैठे आतंकवादियों को संरक्षण देना बंद करना होगा जिनके कारण उनकी छवि भी खराब होती है। इसमें दो राय नहीं कि बीते कुछ दशकों से इस्लाम के नाम पर फैलाई जा रही दहशतगर्दी ने पूरी दुनिया को अशांत कर रखा है। अरब राष्ट्रों से लाखों लोग जान बचाकर यूरोपीय देशों में शरण लेने पहुंचे लेकिन वहाँ भी उन्होंने आंतक के बीज बो दिये। इजरायल ने हमास पर जो हमला किया वह आक्रमण का जवाब था। इसी तरह हिजबुल्लाह के विरुद्ध उसकी कारवाई भी तब हुई जब उसने हमास के समर्थन में इजरायल पर मिसाइलें दागीं। कुल मिलाकर इजरायल जो कर रहा है उसके लिए उसे हमास ने उकसाया। उसकी जगह कोई और देश होता तो वह भी ऐसा ही करता।
- रवीन्द्र वाजपेयी