Thursday, 12 September 2024

12 वर्ष तक के सभी बच्चों को आयुष्मान योजना में शामिल किया जाए

लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 70 साल और उससे अधिक के सभी बुजुर्गों को आयुष्मान योजना के अंतर्गत प्रति वर्ष 5 लाख रु. तक का चिकित्सा बीमा  निःशुल्क  देने का जो वायदा किया था उसे गत दिवस केंद्र सरकार ने पूरा कर दिया। अब तक गरीब वर्ग को ही यह सुविधा थी किंतु इस योजना के अंतर्गत किसी भी  आय वर्ग के बुजुर्ग को एक साल में 5 लाख तक का इलाज निःशुल्क करवाने की  व्यवस्था की गई है। जिन गरीब बुजुर्गों के पास पहले से आयुष्मान कार्ड हैं उन्हें 5 लाख रु. का अतिरिक्त बीमा नई योजना में मिलेगा और जो  अपने साधनों से चिकित्सा बीमा करवाते आ रहे हैं वे भी लाभान्वित होंगे। इस प्रकार हर व्यक्ति 70 वर्ष का होते ही आयुष्मान योजना के अंतर्गत आ गया फिर चाहे वह धनकुबेर रतन टाटा हों या फिर रोज कमाने, रोज खाने वाला श्रमिक। पहले उम्मीद थी कि नरेंद्र मोदी सरकार तीसरी पारी के पहले बजट में ही चुनावी वायदे को पूरा कर देगी किंतु उस समय तत्संबंधी घोषणा नहीं की गई। अब जबकि कुछ ही दिनों में हरियाणा और जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं तब उक्त ऐलान को भाजपा का चुनावी दाँव भी कहा जा सकता है। लेकिन केंद्र सरकार ने आर्थिक स्थिति रूपी विभाजन रेखा को दूर करते हुए चूंकि केवल 70 वर्ष की आयु को आधार बनाया है इसलिए देश भर के वृद्ध जन इससे राहत महसूस कर रहे होंगे। भारत में औसत आयु  निरंतर वृद्धि की ओर है । इसके साथ ही एक नई समस्या बुजुर्गों के अकेलपन की भी उठ खड़ी हुई है। संयुक्त परिवारों के टूटने से भी माता - पिता को वृद्धावस्था में एकाकीपन झेलने मजबूर होना पड़ रहा है। कामकाज के लिए अपना गाँव या शहर छोड़कर बाहर जाने का सिलसिला तो बहुत पुराना है किंतु अब तो बड़ी संख्या में युवा शिक्षा हेतु भी दूसरे शहर तो क्या विदेश तक जाने लगे हैं और फिर वहीं नौकरी कर बस जाते हैं। इन सब वजहों से अकेले रह रहे बुजुर्गों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। और जब वे बीमार पड़ते हैं तब इलाज हेतु तत्काल पैसे की व्यवस्था के अलावा भागदौड़ उनका हौसला तोड़ देती है। हर किसी के पास घर में इतनी नगदी भी नहीं होती जितनी निजी अस्पताल में भर्ती होते ही जमा करवानी पड़ती है। जिन सेवा निवृत शासकीय कर्मचारियों को निःशुल्क इलाज की सुविधा है , उनके अलावा जो बुजुर्ग निजी तौर पर चिकित्सा बीमा करवाकर रखते हैं वे तो आकस्मिक स्थिति उत्पन्न होने पर निश्चिंत होकर अस्पताल जाकर भर्ती हो जाते हैं किंतु निम्न और मध्यम आय वर्ग में बहुत बड़ी संख्या उन बुजुर्गों की है जिनके पास चिकित्सा संबंधी किसी भी प्रकार का सुरक्षा चक्र नहीं है। केंद्र सरकार की ताजा घोषणा से उनको बहुत बड़ी मानसिक शांति प्राप्त हुई है।  इसका कितना लाभ भाजपा को आने वाले चुनावों में मिलेगा ये बात उतनी महत्वपूर्ण नहीं जितनी ये कि केंद्र सरकार ने देश भर के बुजुर्गों को पारिवारिक भावना का एहसास करवाया है। लेकिन इस  बात की निगरानी सरकारी तौर पर रखी जानी चाहिए कि निजी अस्पताल वाले इन बुजुर्गों को परेशान न करें। कोरोना के दौरान ये देखने मिला था कि निःशुल्क चिकित्सा सुविधा प्राप्त शासकीय कर्मचारियों के अलावा चिकित्सा बीमा धारकों को अग्रिम भुगतान किये बिना निजी अस्पतालों में भर्ती करने से इंकार कर दिया गया। ये शिकायत बाद में भी आती रही। इसका कारण सरकार द्वारा अस्पतालों को समय पर भुगतान नहीं किया जाना रहा। लेकिन ये भी सच है कि देश भर में अनेक निजी अस्पतालों के लिये आयुष्मान योजना रुपये छापने की मशीन बन गई। बड़े पैमाने पर फर्जीबाड़े  सामने आने के बाद इसकी उपयोगिता और सार्थकता पर सवाल भी उठे।  अब चूंकि  70 साल के हो चुके  समस्त  बुजुर्गों को आयुष्मान योजना में शामिल कर लिया गया है तब स्थानीय प्रशासन को ये सतर्कता रखनी होगी कि किसी भी वृद्ध को इलाज से वंचित न होना पड़े। आयुष्मान योजना निश्चित रूप से स्वस्थ भारत की कल्पना को साकार करने की दिशा में क्रांतिकारी कदम थी। उसमें प्रत्येक आय वर्ग के वृद्धों को शामिल करने से केंद्र सरकार की संवेदनशीलता का पता चलता है किंतु  इसे एक पायदान और ऊपर ले जाते हुए कम से कम 12 वर्ष तक के  सभी बच्चों को भी इसके अंतर्गत लाना चाहिए। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि बच्चों का इलाज भी महंगा होता जा रहा है।  विकसित भारत के लिए देश के भविष्य को स्वस्थ रखना बेहद जरूरी है। वैसे तो शिक्षा और स्वास्थ्य पूरी तरह से सरकार का दायित्व होना चाहिए किंतु जब तक ऐसा नहीं होता तब तक जिस तरह वृद्ध जनों के प्रति केंद्र  सरकार ने अपनी संवेदनशीलता दिखाई वैसी ही नई पीढ़ी के नौनिहालों हेतु भी सामने आनी चाहिए। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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