Monday, 23 September 2024

रेल पटरियों पर अवरोध जनता को भयभीत करने का षडयंत्र


कश्मीर घाटी में पत्थरबाजी, दिल्ली में किसानों का धरना, जेएनयू, जामिया मिलिया, जादवपुर, उस्मानिया और अलीगढ़ मुस्लिम वि.वि में  छात्र आंदोलन, दिल्ली के शाहीन बाग का धरना आदि को व्यवस्था विरोधी प्रयोग कहा गया। उनका एकमात्र निहित उद्देश्य केंद्र में बैठी मोदी सरकार को अस्थिर करना था। किसान आंदोलन की आड़ लेकर पंजाब में नये सिरे से सिर उठाने वाला खालिस्तानी आंदोलन उसकी अगली पायदान बना। इसे कैनेडा, अमेरिका और ब्रिटेन में बैठे अलगाववादी संगठनों का समर्थन मिलना अपने आप में काफी कुछ कह देता है। नागरिकता संशोधन जैसे कानूनों का भी जिस प्रकार संगठित विरोध हुआ वह किसी सुनियोजित षडयंत्र का हिस्सा ही था। उसी की पुनरावृत्ति वक्फ संशोधन को लेकर सामने आई है। देश में एक वर्ग ऐसा है जो राष्ट्रवादी ताकतों को मजबूत होते देख जल - भुन रहा है। यहाँ तक कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और भारत विरोधी भावनाओं के भड़कने से भी ये तबका मन ही मन प्रसन्न है। लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से कुछ लोग इस बात का प्रचार करने में जुटे हुए हैं कि हिंदुत्व भारतीय राजनीति में प्रासंगिक हो गया है और जनता पर उनका प्रभाव पहले जैसा नहीं रहा। इस अवधारणा को मीडिया का एक संगठित समूह जमकर हवा दे रहा है। यही वजह है कि श्री मोदी से परेशान  राष्ट्रविरोधी शक्तियों का हौसला बुलंद हो रहा है। जिसका ताजा प्रमाण है रेल पटरियों पर पत्थर, लोहे की सलाखें और गैस के सिलेंडर रखकर गाड़ियों को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिशों में अचानक वृद्धि होना। गत दिवस म.प्र में सेना से जुड़ी एक रेलगाड़ी की पटरी पर विस्फोटक रखे पाए गए। पहली बार जब ऐसी खबर आई तब लगा कि ये किसी सिरफिरे  की करतूत है किंतु बीते कुछ दिनों में जिस तेजी से रेल पटरियों पर दुर्घटना करवाने वाला सामान रखा जा रहा है उसके बाद अब ये बात निःसंकोच कही जा सकती है कि इसके पीछे देश विरोधी किसी बड़ी कार्ययोजना का हाथ है। पूरे देश में फैली हजारों कि. मी लंबी रेल पटरियों की कदम - कदम पर निगरानी संभव नहीं है। इसी का लाभ विघटनकारी ताकतें उठा रही हैं। उनका उद्देश्य आम जनता के मन में भय उत्पन्न करने के साथ सरकार के बारे में अविश्वास उत्पन्न करना ही है। ये बात सर्वविदित है कि रेल भारत में आवागमन का सबसे सस्ता, सुलभ और सुरक्षित साधन है। प्रतिदिन करोड़ों यात्री इसके जरिये सफ़र करते हैं। समय - समय पर दुर्घटनाएं होने के बाद भी रेल यात्रा की उपयोगिता और आवश्यकता से कोई असहमत नहीं हो सकता। एक बड़े वर्ग के लिए तो इसका उपयोग करना मजबूरी भी है। इसी तरह मालगाड़ी सामान ढोने के लिए सबसे आसान माध्यम है। रेलवे को यात्री गाड़ियों के परिचालन से होने वाली आर्थिक क्षति की भरपाई माल ढुलाई के व्यवसाय से ही होती है। निजी क्षेत्र के अलावा सेना के सामान की आवाजाही के लिए मालगाड़ी सबसे अधिक उपयोग में आती है। ये देखते हुए रेलवे का निर्बाध परिचालन सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में है। इसलिए उसमें अवरोध उत्पन्न करने का श्रंखलाबद्ध प्रयास हर दृष्टि से देश विरोधी गतिविधि कहा जाएगा। इससे जुड़े कुछ लोग पकड़े जाने के बाद भी अब तक इसे संचालित करने वाले गिरोह का पर्दाफाश नहीं हो सका। लेकिन सतही तौर पर ये प्रतीत होता है कि कश्मीर घाटी में युवकों को पैसे देकर सुरक्षा बलों पर पत्थर फिकवाने जैसी योजना रेल पटरियों पर अवरोध उत्पन्न करने की हरकत से मेल खाती है। इसे अंजाम देने वाली ताकतें पर्दे के पीछे रहकर नौजवानों को कुछ रुपयों का लालच देकर लोगों की जान से खेलने के साथ ही राष्ट्रीय संपत्ति को क्षति पहुँचाने का षडयंत्र रच रही हैं। ये बहुत ही गंभीर स्थिति है जिससे निपटने के लिए बेहद सतर्कता रखनी चाहिए। इसे कुछ खुराफाती दिमागों की उपज कहकर उपेक्षित करना बड़ी भूल होगी। इसके जरिये देश विरोधी तत्व जनता को भयभीत करने के साथ ही सरकार को कमजोर साबित करने का जो कुचक्र रच रहे हैं उसके पीछे वही सब है जो लोकसभा चुनाव के पहले देश ने देखा और उसके बाद वही हरकतें रूप बदलकर सामने आ रही हैं। ये भी गौरतलब है कि जब भी कहीं चुनाव होते हैं तब - तब देश को अस्थिर करने वाले पूरी ताकत से सक्रिय हो जाते हैं। वर्तमान में भी कुछ राज्यों के चुनाव होने से उनकी हरकतों में वृद्धि हुई है। सरकार तो अपने स्तर पर सक्रिय है ही किंतु जनता को भी सतर्क रहना चाहिए। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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