Tuesday, 24 September 2024

ओवैसी के बयान ने खोल दी वक्फ की पोल


वक्फ संशोधन विधेयक भले ही अभी जेपीसी के पास विचारार्थ हो किंतु उ.प्र के  कौशाम्बी जिले में ग्राम सभा की 96 बीघा भूमि उससे वापस लेकर ग्राम सभा के नाम दर्ज करने का एस. डी. एम का फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है। यह प्रकरण 1946 से लंबित था। वक्फ बोर्ड का दावा था कि अलाउद्दीन खिलजी के जमाने में बतौर माफीनामा वह भूमि मिली थी । सरकारी रिकार्ड में भी वह वक्फ संपत्ति दर्शाई गई थी किंतु 2 साल पहले यह खुलासा हुआ कि वह ग्राम सभा की भूमि है और उसके बाद अदालती आदेश पर उसे वापस ग्राम सभा के नाम दर्ज कर दिया गया। इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट राज्य शासन द्वारा मंगवाकर अवैध तौर पर हड़पी गई जमीनें एवं अन्य संपत्तियाँ वापस लेने की मुहिम शुरू किये जाने की खबर से वक्फ बोर्ड में घबराहट है।  कौशाम्बी जैसे मामले पूरे प्रदेश में होने की आशंका जताई जा रही है। राज्य की पिछली  गैर भाजपा सरकारों  में मुस्लिम वोट बैंक के लालच में वक्फ के अवैध कब्जों वाली संपत्तियों को छीनने का साहस ही नहीं हुआ । लिहाजा सार्वजनिक भूमि को वक्फ का बताकर अवैध कब्जे होते रहे। वक्फ संशोधन का विरोध करने के साथ ही मुस्लिम समुदाय द्वारा देश भर में हिंदुओं के धर्मस्थल के अलावा सरकारी इमारतों तक को वक्फ संपत्ति बताकर खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है। इसकी तीव्र प्रतिक्रिया हिन्दू  समाज में देखने मिल रही है। इसी के चलते उ.प्र की योगी सरकार कौशाम्बी प्रकरण को आधार बनाकर पूरे राज्य में वक्फ के कब्जे वाली संपत्तियों की वैधानिकता जाँचने  जा रही है। मुस्लिम समाज इससे भन्नाया हुआ है। उसकी हमदर्द सामजवादी पार्टी तथा कांग्रेस के पेट में भी मरोड़ होने लगा है क्योंकि वक्फ संशोधन के पक्ष में वे हिन्दू भी खड़े नजर आ रहे हैं जिन्होंने गत  लोकसभा चुनाव में भाजपा के विरोध में मतदान किया था। दरअसल जबसे हिंदुओं  के संज्ञान में ये बात आई कि वक्फ जिस संपत्ति पर अपना दावा कर दे वह बिना किसी लागलपेट के उसकी हो जायेगी, तबसे उनके बीच भय व्याप्त है। विशेष रूप  से मंदिरों जैसे धार्मिक स्थलों पर वक्फ के दावों की आशंका चिंता बढ़ा रही है। लेकिन कुछ दिनों पहले मुस्लिम समाज के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के भाषण का एक वीडियो तेजी से प्रसारित हुआ जिसमें वे मुसलमानों को वक्फ संशोधन का विरोध करने हेतु प्रेरित करने के साथ ही ये भी बोल गए कि उक्त विधेयक पारित होने पर वक्फ के हाथ से बड़े पैमाने पर संपत्तियाँ निकल जाएंगी। इसके बाद उन्होंने वह राज खोल दिया जिसके कारण मुस्लिम समाज इस संशोधन से भड़का हुआ है। ओवैसी ने खुले मंच से मुसलमानों को आगाह किया कि उ.प्र  में वक्फ के आधिपत्य में जो 1.21 लाख संपत्तियाँ हैं उनमें से 1.12 लाख के वैधानिक दस्तावेज नहीं हैं। इसलिए वक्फ संशोधन  कानून में बदला तो बिना दस्तावेज वाली संपत्तियाँ उसके हाथ से छिन जाएंगी। ओवैसी के इस बयान ने वक्फ के नाम पर देश भर में किये गए अवैध कब्जों की पोल खोलकर रख दी। लेकिन उ.प्र के कौशाम्बी में ग्राम सभा की 96 बीघा भूमि वक्फ से छीने जाने के बाद से योगी सरकार जिस तरह वक्फ के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करने सक्रिय हुई  वह अन्य राज्यों के लिए एक सबक है। यदि भाजपा और उसके सहयोगियों द्वारा शासित राज्यों में भी वक्फ द्वारा बिना वैधानिक दस्तावेजों के कब्जा की गई जमीनों एवं अन्य संपत्तियों को वापस लेने का अभियान छेड़ दिया गया तब गैर भाजपा राज्य सरकारें भी वैसा करने बाध्य होंगी। इस प्रकार संदर्भित संशोधन पारित होने के पहले ही वक्फ के कर्ताधर्ताओं में हड़कंप मचा हुआ है। इस बारे में ये बात भी ध्यान देने वाली है कि भले ही मौलवियों के दबाव में मुस्लिम समुदाय इस संशोधन का विरोध कर रहा हो किंतु एक वर्ग ऐसा है जो वक्फ संपत्ति पर समाज के कुछ  लोगों द्वारा कब्जा कर उसका लाभ लेने से नाराज हैं। ये आरोप भी लग रहा है कि वक्फ बोर्ड के कब्जे वाली संपत्तियों का समुचित रखरखाव न होने से उनसे अपेक्षित आय नहीं होती और समाज के जरूरतमंद लोगों के कल्याण के कार्यक्रम अधर में अटक जाते हैं। ये चर्चा भी  है कि वक्फ की अनेक संपत्तियों से होने वाली कमाई कुछ प्रभावशाली लोगों की जेब में चली जाती है। इस तरह की शिकायतें हिंदुओं सहित अन्य धर्मों के न्यासों में भी हैं किंतु वक्फ के पास सेना और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा जमीनें हैं। इसलिए उसमें होने वाले घोटाले भी बड़े ही होंगे। ओवैसी ने तो केवल उ.प्र का खुलासा किया है। बाकी  राज्यों में  भी यही स्थिति हो तो अचरज नहीं होगा। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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