प्राकृतिक सुंदरता के साथ ही शांतिप्रियता के लिए प्रसिद्ध हिमाचल प्रदेश इन दिनों अशांत है। राजधानी शिमला की एक मस्जिद के अवैध निर्माण का हिन्दू संगठनों ने जब विरोध किया तब उसे तोड़ने की कवायद शुरू हुई। मस्जिद के मौलवी की ये सफाई किसी के गले नहीं उतरी कि उसे नहीं पता मस्जिद में हुआ अवैध निर्माण किसने करवाया। वह विवाद जैसे - तैसे सुलझा तो मंडी जिले की एक मस्जिद में अवैध निर्माण के विरोध में शुरू हुआ हिंदुओं का आंदोलन देखते - देखते पूरे प्रदेश में फैल गया। हिमाचल में मुस्लिम आबादी उंगलियों पर गिनने लायक है। लेकिन बीते कुछ वर्षों में वहाँ उ.प्र से मुसलमानों के आकर बसने का सिलसिला शुरू हुआ और उसी के साथ तनाव की नींव पड़ गई। ये लोग यहाँ किस कारण से बसे ये स्पष्ट नहीं है। हिमाचल में कोई मुस्लिम धार्मिक केंद्र भी नहीं है। अवैध रूप से दुकानें खोलने और सड़कों पर रेहड़ी लगाने वालों में मुस्लिमों की बढ़ती संख्या के बीच जब उनमें से कुछ के दस्तावेजों की जाँच हुई तब पता चला कि ज्यादातर की जन्मतिथि 1 जनवरी है। ये जानकारी भी उजागर हुई कि राज्य के अनेक शहरों में दशकों से वीरान पड़ी मस्जिदों में अचानक नमाज की शुरुआत हो गई जिसमें अन्य राज्यों से आये लोगों की बड़ी संख्या नजर आई। हिन्दू संगठनों का आरोप है कि मुस्लिम आबादी जिस रहस्यमय तरीके से बढ़ी वह किसी बड़े षडयंत्र का हिस्सा लगता है। बहुसंख्यक आबादी को ये भी महसूस होने लगा कि अन्य राज्यों से आ रहे मुस्लिम माहौल को तनाव ग्रस्त बना रहे हैं। मस्जिदों के इर्द गिर्द रहने वाले हिन्दू परिवारों की महिलाएं इन बाहरी तत्वों की अश्लील हरकतों से असहज महसूस करने लगीं। जब इसकी शिकायत की गई तो जवाब मिला आप अपनी आँखें बंद कर लीजिये। हिन्दू व्यापारियों के प्रतिष्ठानों के सामने जबरन अपना कारोबार शुरू करने से भी विवाद पैदा हो रहे हैं। बड़ी मंडियों में अचानक अपरिचित व्यापारियों की आमद होने से स्थानीय व्यवसायी परेशानी में हैं। शिमला की मस्जिद के अवैध निर्माण को तोड़ने के लिए सख्त कदम उठाये जाने का सकारात्मक असर भी हुआ। इसी क्रम में गत दिवस राज्य के एक मंत्री विक्रमादित्य सिंह द्वारा कहा गया कि उ.प्र की तरह ही हिमाचल में भी खाद्य सामग्री बेचने वालों को अपनी आईडी और नाम लिखना होगा। इस हेतु एक समिति विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बनाये जाने की बात भी कही गई । विक्रमादित्य पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह के पुत्र हैं । उनकी माँ प्रतिभा देवी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थीं और विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद की दावेदार रहीं । लेकिन हाईकमान ने सुखविंदर सिंह सुक्खू की ताजपोशी करवा दी। विक्रमादित्य मंत्री बन तो गए किंतु कुछ विधायकों के इस्तीफे के बाद उत्पन्न राजनीतिक संकट के दौरान उन्होंने पद छोड़ दिया। यद्यपि बाद में त्यागपत्र वापस ले लिया लेकिन मुख्यमंत्री से उनके मतभेद बने हुए हैं। इसलिए जब खाद्य सामग्री विक्रेताओं को अपनी पहिचान के साथ कर्मचारियों का नाम प्रदर्शित करने के फैसले की खबर उनके हवाले से आई तो लोग चौंक गए क्योंकि ऐसा ही आदेश उ.प्र की योगी सरकार द्वारा जारी किये जाने पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आसमान सिर पर उठा लिया था। लेकिन कुछ घंटों बाद ही खबर आ गई कि कांग्रेस हाईकमान इस आदेश से बहुत नाराज है और विक्रमादित्य को दिल्ली तलब किया गया है। मुख्यमंत्री श्री सुक्खू ने भी स्पष्टीकरण दिया कि अभी उक्त निर्णय लागू नहीं किया गया। लेकिन इस सबसे कांग्रेस का अधकचरापन एक बार फिर सामने आ गया। दुकान के मालिक का नाम या पहिचान प्रदर्शित करना धर्मनिरपेक्षता के लिए कौन सा खतरा है ये समझ से परे है। असली मुद्दा हिमाचल प्रदेश में आ रहे बाहरी लोगों की पहिचान उजागर करना है। मैदानी इलाकों से पहाड़ी राज्य में आकर बसने वालों का सत्यापन जरूरी है। हिमाचल के कुछ इलाके सीमावर्ती होने से सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी हैं। उस लिहाज से संदर्भित निर्णय रोककर राज्य सरकार और कांग्रेस हाईकमान इस राज्य के सामाजिक ताने - बाने को नष्ट करने में सहायक बन रही है। जिन इलाकों में दूर - दूर तक मुस्लिम आबादी न हो वहाँ अचानक मस्जिद बनने लगे तो संदेह होना स्वाभाविक है। उत्तराखंड पहले से ही इस समस्या से जूझ रहा है और अब एक और पहाड़ी राज्य में वैसे ही हालात बन रहे हैं । संयोग से दोनों की सीमाएं चीन से मिलती हैं।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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