Wednesday, 19 February 2025

मेहनत करने वाला भूखा नहीं रह सकता

अवैध तरीकों से अमेरिका गए भारतीय प्रवासियों की दूसरी खेप वापिस आने के बाद उनके जो खौफनाक अनुभव सामने आ रहे हैं उन्हें जानकर हर किसी के रोंगटे खड़े हो जायेंगे। ये उन लोगों की आँखें खोलने के लिए भी काफी है जो इन प्रवासियों के प्रति हमदर्दी दिखाते हुए सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि अपने देश में रोजगार उपलब्ध होता तब ये प्रवासी चोरी छिपे अमेरिका जाने का जोखिम क्यों उठाते ? लेकिन डंकी रूट कहे जाने वाले जिस रास्ते से दलालों के चंगुल में फंसकर ये लोग दक्षिण अमेरिकी देशों के घने जंगलों से होते हुए अमेरिका में घुसते हुए पकड़े गए उनमें सांप - बिच्छू और अन्य हिंसक पशुओं का खतरा हर समय मौजूद रहता है।  दलदलों और पहाड़ी नदी - नालों जैसी बाधाओं से जूझते हुए महीनों के सफर के बाद अमेरिका की धरती को छूने का अवसर मिलते ही वे पकड़ में आ गए। कैनेडा के रास्ते गए लोगों को तो शून्य से नीचे के तापमान में सफर करना पड़ा। जिसमें एक पति - पत्नी अपने दो बच्चों सहित मारे गए।  एक बात स्पष्ट रूप से सामने आई कि जो लोग अवैध प्रवासी के रूप में गए वे अमेरिका की सुविधा भरी ज़िंदगी के लालच में दलालों के फेर में फंसकर मुसीबत मोल ले बैठे। इन लोगों को हथकड़ी लगाकर वापिस भेजे जाने को देश का अपमान बताने वालों को भी ये सुनकर अच्छा नहीं लगा होगा कि इन प्रवासियों ने जिन तरीकों से अमेरिका में घुसने का प्रयास किया उनसे भी भारत की प्रतिष्ठा को चोट पहुंची। ये तर्क भी बेमानी साबित हो रहा है  कि देश में काम न मिलने और व्यवसाय लायक पूंजी नहीं होने से उन्होंने अपना वतन छोड़ सात समंदर पार करने का दुस्साहस किया। अमेरिका से आई दूसरी खेप में दो व्यक्ति ऐसे भी थे जो हत्या के प्रकरण में फंसे हुए थे। इसीलिए उन्हें विमान से बाहर आते ही गिरफ्तार कर लिया गया।  अन्य अपराधियों के अभी भी अमेरिका में होने की आशंका सुरक्षा एजेंसियों को है। इसी के साथ ये बात ज्यादातर मामलों में सामने आई कि अवैध रूप से अमेरिका में घुसने के लिए ज्यादातर लोगों ने अपनी खेती - बाड़ी बेच डाली। एक व्यक्ति ने तो दलाल को 1 करोड़  से ज्यादा की रकम दी। बाकी लोगों ने भी लाखों रुपये का भुगतान किया। सवाल ये है कि इतने पैसे से ये लोग छोटा सा व्यवसाय शुरू कर देते तो पेट पालने लायक कमाई तो  हो ही जाती। जिस वर्ग के लोग अवैध तरीकों से अमेरिका या कैनेडा जाने का प्रयास करते हैं वे पेशेवर दृष्टि से योग्य होते तो उन्हें  चोर की तरह जाने की जरूरत नहीं पड़ती। उस दृष्टि से ऐसे लोगों के प्रति सहानुभूति रखना गलत है। अभी तो बहुत थोड़े लोग ही वापस आये हैं। जो जानकारी आई उसके अनुसार अमेरिका में लाखों भारतीय अवैध प्रवासी हैं जिन्हें किश्तों में वापिस भेजे जाने के संकेत मिले हैं। अमेरिका की हालिया यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अवैध प्रवासियों से किसी भी प्रकार की हमदर्दी जताने से इंकार कर सरकार की नीति घोषित कर दी। विपक्ष सहित अनेक लोगों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा वह अमेरिका सरकार द्वारा अवैध प्रवासियों के साथ किये गए अमानवीय व्यवहार का विरोध नहीं करने का साहस नहीं दिखा सकी किंतु अवैध  प्रवासियों द्वारा उपयोग किये  गए तरीकों की जानकारी आने के बाद उनके प्रति हमदर्दी निरर्थक है। ये बात भी चिंताजनक है कि गंभीर अपराध करने के बाद विदेश भाग जाने वाले अवैध प्रवासियों में शामिल हैं। अमेरिका के नये राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उनके विरुद्ध जो कड़ा रवैया अपनाया उसे भारत विरोधी मानने की बजाय लोगों को इस बात के लिए सतर्क करने की आवश्यकता है कि वे दलालों के फेर में अपना धन और ज़िंदगी दोनों दांव पर न लगाएं। अमेरिका जाने के लिए निकले कुछ प्रवासियों को तो हत्या की धमकी तक झेलनी पड़ी क्योंकि  पूरा  पैसा लेने के बाद भी  यहाँ के दलालों द्वारा दूसरे देशों में बैठे एजेंटों का हिस्सा नहीं दिया गया।  अमेरिका से लुटे - पिटे वापिस आये इन प्रवासियों द्वारा उठाई गई तकलीफों की जो जानकारियां  धीरे - धीरे आ रही हैं वे विचलित कर देने वाली हैं। ऐसे में बेहतर होगा कि विदेश जाने के लिए पागल होने वाली प्रवृत्ति को निरुत्साहित किया जाए। इस काम में सरकार के साथ ही समाज को भी आगे आना चाहिए। हमारे देश में श्रमिकों की मांग कम नहीं है। बिहार, उ.प्र , छत्तीसगढ़ , उड़ीसा के लाखों लोग अन्य राज्यों में  मेहनत करते हुए रोजी - रोटी कमा रहे हैं। ये बात आज भी उतनी ही प्रमाणित है कि परिश्रम करने वाला कभी भूखा नहीं रह सकता। गैर कानूनी तरीकों से परदेस जाकर चोरों की तरह रहने से लाख गुना अच्छा है अपने देश में चैन से रहकर पेट भरने के लिए उद्यम करना। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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