म.प्र की राजधानी भोपाल में आज से शुरू हुए ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट के पूर्व बीते कुछ महीनों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जो परिश्रम किया उसका प्रतिफल इस निवेशक सम्मेलन में परिलक्षित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इसके उद्घाटन सत्र में उपस्थिति का जबरदस्त सांकेतिक महत्व है क्योंकि गुजरात के मुख्यमन्त्री रहते हुए उन्होंने वायब्रेंट गुजरात नामक जो निवेशक सम्मेलन आयोजित किये उनके चमत्कारिक सुपरिणाम देखने मिले। श्री मोदी की विकासमूलक सोच का ही परिणाम था जो उनके कार्यकाल में गुजरात ने औद्योगिक क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की। उनकी व्यापक सोच का ही प्रमाण है कि मुख्यमंत्री रहते हुए ही उन्होंने गुजरात में विदेशी निवेश आमंत्रित करने के लिए जापान और चीन जैसे देशों का भ्रमण तो किया ही अमेरिका, कैनेडा द. अफ्रीका और ब्रिटेन में बसे गुजराती मूल के प्रवासी भारतवंशियों को भी अपने पूर्वजों की धरती के विकास हेतु आमंत्रित किया। मोदी जी की उस दूरगामी सोच ने ही उन्हें विकास का पर्यायवाची बना दिया। यही वजह है कि 2014 में जब वे प्रधानमंत्री बने तो पूरी दुनिया के निवेशक भारत में पूंजी लगाने उत्साहित हुए। वार्षिक विकास दर वृद्धि के मामले में चीन को पीछे छोड़कर भारत ने दुनिया के विकसित देशों के साथ बैठने की जो हैसियत अर्जित की उसका श्रेय प्रधानमंत्री की विकास केंद्रित नीतियां और उन्हें लागू करने की प्रतिबद्धता ही है। ये संतोष का विषय है कि म.प्र के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी श्री मोदी की कार्यशैली को अपनाते हुए प्रदेश को आर्थिक दृष्टि से विकसित करने का संकल्प लेकर प्रयासों की पराकाष्ठा को मूर्तरूप प्रदान किया। मुख्यमंत्री का पदभार संभालते ही डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी अंचलों में निवेश आमन्त्रित करने हेतु ठोस कार्ययोजना तैयार की और छोटे - छोटे निवेशक सम्मेलन आयोजित करते हुए प्रदेश में विकास की संभावनाओं और अनुकूल परिस्थितियों को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। आज से जो ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट प्रारंभ हुई ये उन्हीं प्रारंभिक तैयारियों का प्रतिफल है। जो लोग इसे धन का अपव्यय बताकर आलोचना कर रहे हैं वे दरअसल कुंठित मानसिकता के शिकार हैं। उन्हें ये ध्यान रखना चाहिए कि मौजूदा दौर मार्केटिंग का है। कहने का आशय ये है कि म.प्र में विकास के लिए जरूरी तमाम मूलभूत चीजें उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए पर्याप्त बिजली, जल स्रोत, उपजाऊ कृषि भूमि, अपार वन और खनिज संपदा, सन्तुलित मौसम, शानदार सड़क नेटवर्क, देश के सभी हिस्सों से बेहतर रेल और हवाई संपर्क, सस्ता और पर्याप्त मानव संसाधन, संतोषजनक कानून व्यवस्था, बाहरी लोगों को समाहित करने की विलक्षण प्रवृत्ति आदि के कारण देश का यह हृदय प्रदेश औद्योगिक विकास के साथ ही व्यवसाय के लिए हर दृष्टि से आदर्श और अनुकूल है। पर्यटन उद्योग में भी यहाँ असीम अवसर हैं। आधा दर्जन से अधिक राष्ट्रीय उद्यान प्रतिवर्ष लाखों घरेलू और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। धर्म और आध्यात्म में रुचि रखने वालों के लिए उज्जैन, ओंकारेश्वर और अमरकंटक जैसे पवित्र स्थल हैं। पचमढ़ी जैसा हिल स्टेशन भी पूरे देश में प्रसिद्ध है। नर्मदा रूपी सदानीरा पवित्र नदी अपने आप में एक आकर्षण है। लाखों आस्थावान व्यक्ति इसकी परिक्रमा करते हैं। कुल मिलाकर यह प्रदेश आर्थिक विकास की ऊँची छलांग लगाने में पूर्णरूपेण सक्षम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से आयोजित यह ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट म.प्र में निवेश के फायदों को तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में सहायक सिद्ध होगा ये विश्वास किया जा सकता है। 2003 में दिग्विजय सिंह को जब जनता ने सत्ता से हटाया था तब इस प्रदेश के माथे पर बीमारू राज्य का कलंक लगा हुआ था। लेकिन अब यह प्रदेश विकास की दौड़ में आगे निकलने के लिए प्रतिबद्ध है। यह निवेशक सम्मेलन उस दिशा में मील का पत्थर साबित होगा इसमें कोई संदेह नहीं है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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