केन्द्रीय बजट में आयकर छूट की सीमा 12 लाख किये जाने का आम तौर पर स्वागत हुआ। वेतन भोगियों के लिए यह सीमा 12.75 लाख है। असल में दिल्ली विधानसभा चुनाव में मध्यमवर्गीय मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए भाजपा ने यह दांव चला । ज्यादातर एग्जिट पोल में दिखाई भाजपा सरकार बनने की संभावना सही निकली तो उक्त निर्णय ट्रम्प कार्ड साबित होगा। चर्चा है ऐसे और भी निर्णय लिए जाएंगे क्योंकि दिल्ली का दंगल निपटते ही बिहार विधानसभा चुनाव की रणनीति पर भाजपा काम करने लगेगी। लोकसभा चुनाव के पहले तक भाजपा इस आत्मविश्वास में थी कि राम मंदिर बनने के बाद वह 400 पार के लक्ष्य को प्राप्त कर लेगी किंतु उ.प्र के अलावा राजस्थान, हरियाणा , प. बंगाल और महाराष्ट्र में लगे झटकों से वह 240 पर सिमट गई। नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू के समर्थन से भले ही नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बन गए किंतु भाजपा समझ गई कि केवल भावनात्मक बातों से लम्बे समय तक जनता का समर्थन प्राप्त करते रहना संभव नहीं रहा। दिल्ली की चुनौती उसके लिए लोकसभा से कम नहीं थी जहाँ 1998 से वह सत्ता से बाहर थी। 2013 में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद स्पष्ट बहुमत के अभाव में उसे विपक्ष में बैठना पड़ा तथा कांग्रेस की बैसाखी पर आम आदमी पार्टी ने सरकार बनाई और अरविंद केजरीवाल नई राजनीति के महानायक बनकर उभरे। लेकिन वह सरकार अल्पजीवी रही और 2015 में दोबारा चुनाव हुए। तब तक केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बन चुकी थी। ऐसे में भाजपा को विश्वास था कि वह दिल्ली में अपनी वापसी कर लेगी किंतु आम आदमी पार्टी के मुफ्त बिजली और पानी के वायदों ने जादुई असर दिखाया और वह 70 में से 67 सीटें जीत गई। भाजपा को 3 पर संतोष करना पड़ा जबकि कांग्रेस शून्य पर आ गई। भाजपा के लिए ये बड़ा झटका था क्योंकि आम आदमी पार्टी की महत्वाकांक्षा राष्ट्रीय क्षितिज पर स्थापित होने की थी और देखते ही देखते वह राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने में कामयाब भी हो गई । 2020 में भी उसने दिल्ली में शानदार कामयाबी हासिल करते हुए 62 सीटें जीतीं । 2019 के लोकसभा चुनाव में जबरदस्त मोदी लहर के बाद आम आदमी पार्टी का दिल्ली विधानसभा में जीतना बड़ी घटना थी। लेकिन भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन से जन्मी पार्टी भी प्रचलित ढर्रे पर चल पड़ी जिसकी वजह से केजरीवाल एंड कंपनी का दामन जिस प्रकार दाग़दार होता चला गया। लेकिन मुफ्त की सुविधाओं के आकर्षण से दिल्लीवासी आम आदमी पार्टी के मोहपाश में फंसे हुए थे। भाजपा इसका तोड़ नहीं ढूँढ़ पा रही थी क्योंकि उसके पास श्री केजरीवाल की टक्कर का कोई चेहरा नहीं था।। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में भी दिल्ली की सातों सीटें जीतने के बाद उसको ये समझ में आ गया कि लोकसभा चुनाव में समर्थन देने वाले अपने मतदाताओं को यदि विधानसभा में आम आदमी पार्टी के पक्ष में जाने से रोका जा सके तो वह दिल्ली की सत्ता प्राप्त कर सकती है। और यहीं से आयकर छूट की सीमा बढ़ाने का विचार जन्मा। देर से ही सही किंतु भाजपा नेतृत्व के दिमाग़ में ये बात आ ही गई कि मध्यमवर्गीय नौकरपेशा और व्यापारी को खुश करने से पूरा माहौल बदला जा सकता है। दिल्ली में भाजपा की प्रचंड जीत होने पर उसका श्रेय काफी कुछ 12 लाख तक आय को कर मुक्त करने को ही मिलेगा। इसी क्रम में आज रिजर्व बैंक ने भी ब्याज दर घटा दी। अब जो खबर आ रही है वह भी जनता को खुश कर सकती है। इसका इशारा परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने टोल टैक्स में राहत देने पर विचार के रूप में किया। उनके अनुसार कानूनी सलाह के बाद जल्द ही टोल टैक्स संबंधी उन विसंगतियों को दूर किया जाएगा जिनसे जनता नाराज होती है। यदि ऐसा होता है तो पूरे देश को राहत मिलेगी। इसी के साथ केंद्र सरकार को चाहिए वह पेट्रोल और डीजल को भी जीएसटी के अंतर्गत लाये जिससे कि उनके दाम कम हों। महंगाई घटाने में ये फैसला क्रांतिकारी साबित होगा और केंद्र सरकार के बारे में गैर भाजपा शासित राज्यों में भी सकारात्मक संदेश जाएगा। दिल्ली में केजरीवाल के करिश्मे को केंद्र सरकार का महज एक फैसला यदि फुस्स करने में कामयाब हो जाता है तो ऐसे ही कुछ और फैसलों से बिहार, प. बंगाल, तमिलनाडु और केरल के आगामी मुकाबलों में भी भाजपा बड़ी सफलता हासिल कर सकती है। छोटी - छोटी सौगातें बांटने की बजाय समाज के हर हर वर्ग को राहत देने वाले निर्णय लिए जाएं तो उनका दूरगामी प्रभाव होता है। और फिर सबका साथ, सबका विकास केंद्र सरकार का ध्येय वाक्य भी तो है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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