Thursday, 6 February 2025

दिल्ली में झाड़ू चले या कमल खिले किंतु कांग्रेस का हाथ खाली ही रहेगा


दिल्ली विधानसभा के बहुप्रतीक्षित चुनाव हेतु  मतदान हो गया। इस बार कांग्रेस द्वारा काफी जोर लगाए जाने से  मुकाबला त्रिकोणीय प्रतीत हुआ किंतु एक बात सभी मान रहे हैं कि सत्ता आम आदमी पार्टी या भाजपा में से ही किसी एक को  मिलेगी। कांग्रेस का उद्देश्य  2015 और 2020 के चुनाव में एक भी सीट नहीं मिलने का दाग धोना मात्र रह गया। यद्यपि लगता नहीं है  कि वह उसमें सफल होगी और  इसका कारण  आम आदमी पार्टी को लेकर उसकी नीतिगत अस्पष्टता है। यदि अरविंद केजरीवाल कांग्रेस को गठबंधन का प्रस्ताव देते तब राहुल गाँधी बिना संकोच उसे स्वीकार कर लेते किंतु हरियाणा चुनाव में उत्पन्न तल्खी के कारण वह नहीं हो सका , जिसके बाद कांग्रेस ने  पूरी ताकत से उतरने का मन बनाया। हालांकि श्री गाँधी  प्रचार में देर से उतरे । यही नहीं उन्होंने अजय माकन द्वारा केजरीवाल सरकार के  विरुद्ध की जाने वाली पत्रकार वार्ता तक रद्द करवा दी। यही वजह है कि कांग्रेस को लेकर  यही सवाल उठता रहा कि  कि वह अपना मत प्रतिशत कितना बढ़ा सकेगी ? स्मरणीय है उसके परंपरागत दलित और मुस्लिम मतदाताओं ने पिछले दो चुनावों में आम आदमी पार्टी का साथ दिया था। चुनाव विश्लेषक भी इसी बहस में उलझे रहे कि क्या कांग्रेस आम आदमी पार्टी की पराजय का कारण बनेगी ? ये बात पूरी तरह सही है कि इस चुनाव में आम आदमी पार्टी को चिंता में डालने का काम कांग्रेस ने बखूबी किया। नई दिल्ली सीट पर संदीप दीक्षित को उतारकर अरविंद केजरीवाल पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने में भी  वह कामयाब रही । इससे अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में भी पार्टी कार्यकर्ताओं के उत्साह में वृद्धि हुई किंतु राष्ट्रीय नेतृत्व की प्रारंभिक उदासीनता के कारण  आम जनता को ये एहसास करवाने में नाकामयाब रही कि वह भी सत्ता की दौड़ में है। ऐसे में उसकी छवि वोट कटवा की होकर रह गई। यदि इस चुनाव में उसका मत प्रतिशत दहाई का आंकड़ा भी छू सके तो बड़ी बात होगी। यही वजह है कि मतदान के बाद  गत दिवस जितने भी एग्जिट पोल जारी हुए उनमें से 80 फीसदी भाजपा की हवा बता रहे हैं जबकि  20 प्रतिशत अभी भी आम आदमी पार्टी की सरकार बने रहने का दावा कर रहे हैं। हालांकि जिन  एजेंसियों के निष्कर्ष कल शाम प्रसारित हुए उनमें एक - दो ही जानी - पहिचानी और अनुभवी होने से भ्रम की स्थिति बनी हुई है। लोकसभा चुनाव के बाद हरियाणा में भी चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों और एग्जिट पोल की जिस तरह भद्द पिटी उसके बाद इन्हें संचालित करने वाली एजेंसियां बेहद सावधानी बरत रही हैं। कुछ ने तो सीटों का अनुमान लगाने और एग्जिट पोल से खुद को दूर ही कर लिया। सी - वोटर नामक संस्था के संचालक यशवंत देशमुख भी हरियाणा और महाराष्ट्र चुनाव में गलत साबित होने के बाद दिल्ली  को लेकर कोई ठोस भविष्यवाणी करने से बचते रहे।  लोकसभा चुनाव में अपना एग्जिट पोल गलत साबित होने पर विपक्षी दलों की तीखी आलोचना के कारण टीवी शो में रो पड़ने वाले एक्सिस माय इंडिया के प्रमुख प्रदीप गुप्ता ने हरियाणा में कांग्रेस की जीत का अनुमान लगाया किंतु वहाँ भाजपा की सरकार लौट आई। उसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र चुनाव में मतदान के एक दिन बाद एग्जिट पोल जारी किया जिसके पूरी तरह सच निकलने पर  उनकी  साख दोबारा कायम हो गई। दिल्ली चुनाव पर श्री गुप्ता गहन विश्लेषण के बाद आज शाम अपना एग्जिट पोल जारी करेंगे । वैसे भी मतदान खत्म होते ही एग्जिट पोल के निष्कर्ष जारी करना जल्दबाजी लगती है। तकनीक कितनी भी विकसित हो जाए किंतु मतदान के क्षेत्रवार आंकड़ों को एकत्र कर उनसे किसी नतीजे पर पहुँचने के लिए कुछ घंटे अपर्याप्त होते हैं। इसीलिए कई लोग  गत दिवस जारी हुए एग्जिट पोल पर संदेह जता रहे है। चूंकि दिल्ली विधानसभा के पिछले चुनावों में सर्वेक्षण बुरी तरह गलत साबित हुए थे इसलिए आम आदमी पार्टी का मानना है इस बार भी बाजी वही मारेगी। ज्यादातर विश्लेषक भी मान रहे हैं कि भाजपा और उसके बीच कड़ा मुकाबला है  किंतु एग्जिट पोल के इस निष्कर्ष पर आम सहमति है कि कांग्रेस का प्रदर्शन  इस बार भी शर्मनाक रहेगा । केजरीवाल सरकार के विरुद्ध शराब घोटाले को उजागर करने वाली पार्टी यदि जनता का भरोसा जीतने में एक बार फिर असफल होती है तो यह उसके लिए बड़ा झटका होगा क्योंकि  इंडिया गठबंधन के घटक दलों में  सपा, तृणमूल और शिवसेना (उद्धव) ने उसके बजाय आम आदमी पार्टी का समर्थन किया। इससे लगता है दिल्ली में चाहे आम आदमी पार्टी सत्ता में लौटे या भाजपा की ताजपोशी हो किंतु कांग्रेस का हाथ खाली ही रहेगा।


- रवीन्द्र वाजपेयी

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