Wednesday, 5 February 2025

भारत भी अवैध विदेशी नागरिकों को बाहर करे


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चुनावी वायदे के अनुसार अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों का निष्कासन शुरू कर दिया है। उसी क्रम में गैरकानूनी तरीके से रह रहे भारतीय नागरिकों के एक दस्ते को वायुयान से भारत भेज दिया गया जो संभवतः आज यहाँ पहुँच जायेगा। इसके पहले  ग्वाटेमाला, पेरू और होंडूरास जैसे देशों के नागरिकों को पकड़कर उनके देश भेजा जा चुका है। भारत आ रहे 200 से अधिक प्रवासियों में से लगभग 104 के बारे में जानकारी हासिल हो चुकी है ।  जो चित्र प्रसारित हुए उनमें विमान में बिठाये जा रहे उक्त प्रवासियों को हथकड़ी लगाई गई है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह - तरह की टिप्पणियां देखने मिल रही हैं जिनमें प्रधानमंत्री पर तंज कसे जाने के साथ देश की प्रतिष्ठा धूमिल होने की बात है। हमारे देश के किसी नागरिक पर विदेश में मुसीबत आने पर उसकी मदद करना सरकार का कर्तव्य है। और ऐसा किया भी गया है। पश्चिम एशिया के अनेक देशों में युद्ध की स्थिति में वहाँ कार्यरत भारतीयों को सुरक्षित निकालने में केंद्र सरकार के अभियानों की सफलता की सर्वत्र प्रशंसा हुई। सबसे बड़ा अभियान तो रूस - यूक्रेन के बीच जंग शुरू होने के बाद यूक्रेन में अध्ययनरत भारतीय छात्रों को वहाँ से सुरक्षित निकालने का था।  भारत के बचाव दल ने पाकिस्तान सहित कुछ अन्य देशों के छात्रों को भी सुरक्षित निकालने में सहायता की। ऐसे में ये सवाल  बेमानी कि  अवैध रूप से रह रहे भारतीय  प्रवासियों को हथकड़ी लगाने से देश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। किसी भी देश की यात्रा  के अलावा अध्ययन, नौकरी या कारोबार करने के लिए विधिवत अनुमति लेनी पड़ती है जो वीजा की शक्ल में होती है।अमेरिका में पढाई और नौकरी करने का आकर्षण नया नहीं है। वैसे भी उस देश को  दुनिया भर से आये प्रवासियों द्वारा ही बनाया गया।  लेकिन अब वह एक  संप्रभुता संपन्न राष्ट्र है जिसके अपने नागरिकता नियम हैं। चूंकि वहाँ संपन्नता है और जीवन यापन की गुणवत्ता बहुत ही अच्छी है इसलिए दुनिया भर के लोग इस देश में बसने को लालायित रहते हैं। वहाँ अध्ययन करने जाने वाले छात्र भी शिक्षा पूरी करने के बाद वहीं काम - धंधा तलाशकर बस जाते हैं और फिर नागरिकता हासिल करने में जुट जाते हैं। भारत में अमेरिका और कैनेडा का आकर्षण बेहिसाब है। जिन्हें वैध तरीके से वीजा मिल जाता है वे तो आसानी से वहाँ जाकर रहते हैं किंतु बिना वैध दस्तावेजों के पहुंचकर रहने वाले दलालों का सहारा लेकर पड़ोसी देशों की सीमा पार कर घुस आते हैं। ट्रम्प ने ऐसे ही लोगों को  निकाल बाहर करने की मुहिम छेड़ दी और उसी के तहत अवैध रूप से वहाँ बसे भारतीय प्रवासियों को वापिस भेजा गया है। अभी तो ये शुरुआत है। ऐसे हजारों भारतीय अवैध प्रवासी  वहाँ से वापिस भेजे जाएंगे। यदि ट्रम्प सरकार चाहे तो वह इन्हें सजा देकर जेल में डाल सकती है किंतु उस स्थिति में उस पर आर्थिक भार पड़ता। इसलिए अवैध प्रवासियों को उनके देश भेजने का निर्णय लिया गया। भारत में जिन लोगों ने इन प्रवासियों को भेजे जाने के तरीके को देश की प्रतिष्ठा से जोड़ा वे भावनात्मक दृष्टि से तो सही हैं किंतु हमारे देश का कोई व्यक्ति यदि किसी अन्य देश में अवैध तरीके से घुसे तो उसके प्रति सहानुभूति उचित नहीं लगती। जो प्रवासी भारतीय विदेशों में बसे हैं उन्होंने अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का सम्मान बढ़ाया है। ऐसे में बिना वैध दस्तावेजों के वहाँ घुसने वाले देश की प्रतिष्ठा को धूमिल करते हैं। भारत में भी बांग्लादेशी  और रोहिंग्या घुसपैठियों की समस्या लाइलाज होती जा रही है। अमेरिका ने अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर जो फैसला किया हमें उससे प्रेरणा लेकर अपने देश में घुस आये  घुसपैठियों को निकाल बाहर करने के बारे में कदम उठाना चाहिए। सबसे पहले उनके नाम मतदाता सूची से हटाकर उन्हें मिल रही सरकारी सुविधाएं रोकी जाएं। जो दल इसका विरोध करें उनका पर्दाफाश जनता के सामने हो जाएगा। अमेरिका यदि किसी ऐसे भारतीय प्रवासी के साथ अपमानजनक व्यवहार करे जिसके पास वैध दस्तावेज हों तब उसका विरोध करने में कोई संकोच करने की जरूरत नहीं होना चाहिए किंतु जो लोग गलत तरीके से किसी देश में घुसें उनसे हमदर्दी रखना गलत बातों को प्रोत्साहन देना है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी


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