Saturday, 8 February 2025

केजरीवाल की महत्वाकांक्षाओं पर दिल्ली की जनता ने झाड़ू फेर दी


दिल्ली विधानसभा चुनाव की मतगणना में अब तक आये रुझानों के अनुसार भाजपा 47 सीटों पर बढ़त के साथ स्पष्ट बहुमत की सरकार बनाने की स्थिति में आ गई है। अंतिम क्षणों में उलटफेर की उम्मीदें लगाए बैठी आम आदमी पार्टी के हाथ निराशा आई  है । अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसौदिया  जैसे बड़े चेहरे हार चुके हैं। मुख्यमंत्री आतिशी बमुश्किल 989 मतों से जीतीं । अनेक मंत्री हारने के कगार पर हैं। 2020 में 62 सीटें जीतने वाली पार्टी 23 पर सिमट गई। वहीं  कांग्रेस द्वारा शून्य का अपना रिकार्ड बरकरार रखा गया। इस पराजय ने  श्री केजरीवाल की आसमान छूती महत्वाकांक्षाओं पर झाड़ू फेर दी। राष्ट्रीय पार्टी बनने के बाद उनकी पार्टी  खुद को भाजपा का विकल्प मानने लगी थी और अरविंद अपने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कद का समझने लगे थे। बात यहीं तक सीमित नहीं रही। विपक्ष के साथ गठबंधन में रहकर भी केजरीवाल एंड कंपनी श्रेष्ठता के अहंकार में डूबकर ईमानदारी का  स्व प्रदत्त प्रमाणपत्र छाती पर चिपकाए पूरे जमाने को बेईमान बताने का षडयंत्र रचती रही। अन्ना हजारे के लोकपाल आंदोलन का सहारा लेकर सत्ता की राजनीति में आने पर अरविंद केजरीवाल अंधेरी कोठरी में रोशनदान के तौर पर उभरे। भ्रष्टाचार विहीन राजनीति के ध्वजावाहक के रूप में दिल्ली की जनता ने उनको ऐतिहासिक समर्थन दिया। लेकिन इसका श्रेय ईमानदार राजनीति के दावे को दिया जाए या आम आदमी पार्टी द्वारा किये गए मुफ्त  बिजली - पानी के वायदे को, ये गहन विश्लेषण का विषय बन गया है। सबसे बड़ी विडंबना ये हुई कि देश के तमाम भ्रष्ट  नेताओं की सूची जारी करने वाले श्री केजरीवाल भी भ्रष्टाचार के उसी गंदे नाले में डुबकी लगाने में पीछे नहीं रहे। सादगी के उनके आश्वासन विलासिता के भौंडे प्रदर्शन में बदल गए। जनता को मुफ्त के दाने फेंककर शराब घोटाले के जरिये करोड़ों की उगाही करने के खुलासे ने इस पार्टी के उजले चेहरे पर जो कालिख पोती उसी की परिणिती है आज के चुनाव परिणाम। पार्टी के संस्थापक सदस्यों को धकियाकर  बाहर करने वाले अरविंद को आज दिल्ली की जनता ने जिस तरह धकियाया वे उसी के लायक हैं। जमानत पर जेल से बाहर आने पर मुख्यमंत्री पद छोड़ते समय उन्होंने कहा था कि जनता की अदालत से बरी होने पर ही पद ग्रहण करेंगे। जनता ने अपना फैसला सुना दिया किंतु उनमें इतनी नैतिकता नहीं कि उसको स्वीकार कर अपने पापों का प्रायश्चियत करें। उल्टे वे चुनाव आयोग को बलि का बकरा बनाने की घिनौनी हरकत हार के पहले से ही करने लगे। ये चुनाव प्रधानमंत्री श्री मोदी के प्रति जनास्था का एक और प्रमाण है। लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटों के घटने पर उनका आभामण्डल धूमिल होने की उम्मीदें लगाए बैठे विघ्नसंतोषी तत्वों के चेहरे आज उतरे हुए हैं। अयोध्या की मिल्कीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद अखिलेश यादव जैसे बड़बोले नेता की भी फजीहत हो गई है। इंडिया गठबन्धन के भविष्य पर भी गहरे काले बादल मंडरा रहे हैं। 2 013 में भाजपा को रोकने के लिए  आम आदमी पार्टी की सरकार बनवाने की गलती कांग्रेस को कितनी महंगी पड़ी ये एक बार फिर सामने आ गया। राहुल गाँधी की आत्ममुग्धता ने पार्टी को इस चुनाव में भी शर्मिंदगी झेलने मजबूर कर दिया है। इस  परिणाम का राष्ट्रीय राजनीति पर दूरगामी असर पड़ेगा क्योंकि महाराष्ट्र में शरद पवार और उद्धव ठाकरे का वर्चस्व ध्वस्त करने के बाद भाजपा ने श्री केजरीवाल के अरमानों पर झाड़ू फेर दी है जिन्हें समर्थन देकर ममता बेनर्जी, अखिलेश यादव और उद्धव ठाकरे ने राहुल गाँधी की उपेक्षा करने में संकोच नहीं किया। हरियाणा और महाराष्ट्र के बाद दिल्ली की शानदार जीत ने भाजपा और श्री मोदी को और मजबूती प्रदान कर दी जिसका असर बिहार और प. बंगाल के आगामी चुनाव पर पड़ना तय है। इंडिया गठबंधन में बिखराव के साथ ही कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के अलावा अन्य विपक्षी पार्टियों में टूटन की आशंका  बढ़ गई है। उद्धव ठाकरे के 6 सांसद टूटने की खबर इसका संकेत है। मुफ्त बिजली - पानी के बावजूद केजरीवाल कुनबे का सफाया कर दिल्ली की जनता ने ये संदेश भी दे दिया कि केवल रेवड़ियां बाँटकर उसे बहलाया नहीं जा सकता।


- रवीन्द्र वाजपेयी

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