आजादी का पर्व प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव की अनुभूति का अवसर है , चाहे वह देश में रहता हो या दुनिया के किसी अन्य हिस्से में। इसलिये इसकी रक्षा करना भी हम सभी का परम कर्तव्य है। स्वाधीनता अर्जित किये लगभग आठ दशक होने जा रहे हैं। इस दौरान अनगिनत कठिनाइयों से गुजरकर भारत ने विश्व में अपना सम्मानजनक स्थान बनाया तो उसके पीछे प्रत्येक देशवासी का योगदान है फिर चाहे वह किसान , श्रमिक, उद्योगपति - व्यवसायी, स्वरोजगार से जुड़ा छोटा उद्यमी ही क्यों न हो। असंगठित क्षेत्र में कार्यरत करोड़ों लोगों ने भी देश की विकास यात्रा को गतिशील बनाने में उल्लेखनीय भूमिका का निर्वहन किया है। आज का भारत आत्मनिर्भरता और आत्म सम्मान का प्रतीक है। वो दिन इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं जब हमें लोगों का पेट भरने के लिए खाद्यान्न आयातित करना पड़ता था। अपनी सुरक्षा के लिए भी हम बड़ी शक्तियों पर आश्रित थे। शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान, तकनीक जैसे क्षेत्रों में भारत ने सफलता के नये आकाश छूने का करतब कर दिखाया है। धरती से अंतरिक्ष तक हमारी उपस्थिति से पूरा विश्व प्रभावित है। निश्चित रूप से ये उपलब्धियाँ संतोष का विषय हैं। हमारी अर्थव्यवस्था ने दुनिया में पांचवा स्थान अर्जित कर लिया है और तीसरे स्थान की तरफ तेजी से अग्रसर है। वैश्विक समुदाय के रूप में भारतवंशी दुनिया के हर हिस्से में स्थापित हैं। उन्होंने अपनी प्रतिभा और परिश्रम से अपार सफलता अर्जित कर देश का सम्मान बढ़ाया है। हाल ही में हमें एक बड़े संघर्ष से गुजरना पड़ा। पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में किये गए ऑपरेशन सिंदूर में हमारी सामरिक क्षमता के प्रदर्शन से पूरा विश्व चमत्कृत रह गया। आतंकवाद के पोषक पाकिस्तान को भारतीय सेनाओं ने जो सबक सिखाया उससे पूरा देश गौरवान्वित हुआ। ये तभी संभव हो सका जब हम आर्थिक और सैन्य दृष्टि से मजबूत थे। लेकिन इन सुखद स्थितियों के बावजूद देश में एक वर्ग विशेष अपनी नकारात्मक सोच के साथ निराशा फैलाने में जुटा है। किसी भी उपलब्धि पर संदेह व्यक्त करना इनकी कार्यशैली है । यहाँ तक कि सेना के पराक्रम को भी झुठलाने में इन्हें लज्जा नहीं आती। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का जश्न मनाने और पाकिस्तान को हुए जबरदस्त नुकसान पर सेना का अभिननंदन करने के बजाय युद्ध में हुई क्षति का ब्यौरा मांगकर जवानों का मनोबल तोड़ने का प्रयास किया गया। सारी दुनिया जब भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती का गुणगान कर रही है तब व्यक्तिगत खुन्नस और घमण्ड में डूबे अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा उसे मृत बताये जाने का समर्थन करने वाले कुछ लोग देश की प्रतिष्ठा को धूमिल कर अपनी स्वार्थ सिद्धि में लगे हैं। जनता द्वारा लगातार ठुकराए जाने के बाद हताशा में डूबा ये वर्ग देश को भीतर से कमजोर कर राजनीतिक अस्थिरता फैलाने का षडयंत्र रच रहा है। जाहिर है भारत के उत्थान से परेशान विदेशी ताकतें इन कोशिशों को हवा दे रही हैं। चुनाव प्रणाली, न्यायपालिका और संसद जैसे संवैधानिक संस्थानों के प्रति अविश्वास का भाव उत्पन्न कर अराजकता में देश को धकेलने के इस सुनियोजित प्रयास के प्रति प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक को सतर्क होकर उसे विफल करने आगे आना चाहिए। सीमा के पार बैठे शत्रु की पहिचान करना कठिन नहीं है किंतु घर के भीतर के दुश्मनों के चेहरों को अनावृत करना आज के दौर की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। भारत की बढ़ती शक्ति से बेचैन वैश्विक शक्तियाँ आर्थिक, कूटनीतिक और सैन्य दबाव बनाकर हमें दबाना चाहती हैं। उनके आगे न झुकने का जो साहस देश ने दिखाया वह हमारे आत्मविश्वास का प्रतीक है। लेकिन इसे बनाये रखने के लिए सब एक आवाज में बोलें ये जरूरी है। राजनीतिक मतभिन्नता अपनी जगह है किंतु जहाँ बात देश के सम्मान और हितों की हो तब सारे मतभेद भुलाना ही राष्ट्रभक्ति है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक ओर जहाँ भारत के सामर्थ्य की सराहना दुनिया भर में हुई वहीं कुछ बड़े देश ईर्ष्या से भर उठे और अनुचित दबाव डालकर हमारे मनोबल को तोड़ना चाहते हैं। दुर्भाग्य से उन्हें अपने देश के ही कुछ तत्व प्रोत्साहित कर रहे हैं जिन्हें सिवाय अपने स्वार्थ के और कुछ नहीं दिखता। आज स्वाधीनता दिवस पर कुछ वक्त निकालकर देश के वर्तमान और भविष्य के बारे में भी चिंतन - मनन करें। सीमा के उस पार बैठे दुश्मन से तो हमारी सेना हर तरह से निपटने में सक्षम है लेकिन घर के भीतर बैठकर देश को कमजोर करने वाली ताकतों के हौसले धवस्त करने का दायित्व हम सबका है। स्वाधीनता दिवस पर इसका संकल्प लीजिये क्योंकि ये देश हमारा सबका है।
स्वाधीनता दिवस की अनंत शुभकामनाएँ।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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