Thursday, 7 August 2025

मोदी द्वारा सही समय पर सही जवाब


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आज से लागू 25 फीसदी आयात शुल्क के बाद गत दिवस घोषणा कर दी कि आगामी 27 अगस्त से इसे 50 प्रतिशत कर दिया जाएगा।  इसी बीच उनका एक और बयान आ गया जिसके अनुसार भारत पर इसके अतिरिक्त आयात शुल्क सहित कुछ प्रतिबंध लगाए जाएंगे। चूंकि भारत ने उनके दबाव के सामने झुकने का कोई संकेत नहीं दिया इसलिये वे बौखलाहट में हैं। रूस से कच्चा तेल  खरीदने के  मामले में भारत ने ये कहते हुए  आईना दिखा दिया कि खुद अमेरिका और उसके समर्थक अनेक देश रूस के साथ हर तरह का व्यापार कर रहे हैं। दूसरी बात जिससे ट्रम्प भन्नाए हुए हैं वह है कृषि क्षेत्र में अमेरिका को प्रवेश की अनुमति नहीं देना। अभी तक तो भारत सरकार अपने प्रवक्ताओं के जरिये कूटनीतिक औपचरिकताओं के साथ अमेरिका को जवाब दे रही थी किंतु आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से कह दिया कि यद्यपि उन्हें इसके लिए व्यक्तिगत कीमत चुकानी पड़ेगी किंतु  भारत अपने किसानों, मछुआरों और डेयरी क्षेत्र से जुड़े लोगों के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा। उनके इस बयान में भले ही  ट्रम्प का नाम नहीं लिया गया किंतु आशय स्पष्ट है कि अमेरिका को भारत के कृषि क्षेत्र पर हावी होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रधानमंत्री रोज - रोज किसी विषय पर बोलने के बजाय सही समय और सही जगह अपनी बात रखते हैं। उक्त  बात  उन्होंने आज दिल्ली में  प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक और हरित क्रांति के जनक स्वर्गीय डॉ. एम़ एस़ स्वामीनाथन की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में  आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए कही।  इस विवाद में अब तक भारत की ओर से जो कुछ कहा गया उसे साधारण प्रतिक्रिया माना जा रहा था। लेकिन अब प्रधानमंत्री का खुलकर सामने आना सरकार की नीति का ऐलान माना जाएगा। ट्रम्प इससे नाराज होकर और कड़े कदम उठा सकते हैं किंतु भारत ने बजाय उत्तेजित होने के सुलझे हुए तरीके से अपनी बात रखने का तरीका चुना । श्री मोदी ने बिना नाम लिए अमेरिका को संदेश दे दिया कि भारत अपने हितों की रक्षा हेतु कटिबद्ध है। इसके साथ ही कूटनीतिक मोर्चे पर भी जवाब देने की रणनीति बना ली गई है जिसके तहत राष्ट्रीय रक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रूस भेजे गए। ट्रम्प ने पिछले दिनों शिगूफा छोड़ा था कि भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीदी घटाई जा रही है। ऐसा कहकर वे दिखाना चाह रहे थे कि वह झुक गया। लेकिन भारत ने इसका खंडन करते हुए स्पष्ट कर दिया कि वह अपने 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में रक्षा सलाहकार का मॉस्को प्रवास किसी बड़े मिशन का हिस्सा माना जा सकता है। इसके साथ ही ये खबर भी आ गई कि श्री मोदी शंघाई सहयोग संगठन के सम्मेलन में भाग लेने चीन जाएंगे।   लेकिन उसके पहले वे जापान की यात्रा भी करेंगे जो अमेरिका  समर्थक होने के बाद भी ट्रम्प के रवैये से त्रस्त है। उल्लेखनीय है हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी चीन गए थे जहाँ उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी. जिनपिंग से हुई । ऐसा लगता है उसी दौरान श्री मोदी के वहाँ जाने की रूपरेखा तैयार हुई क्योंकि गलवान घाटी में हुई मुठभेड़ के बाद उनके और जिनपिंग के बीच बातचीत बंद सी थी। चूंकि यूक्रेन और रूस की जंग के बाद चीन और भारत दोनों रूस से कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीददार बनकर सामने आये जिससे अमेरिकी लॉबी द्वारा उस पर लगाए आर्थिक प्रतिबंध बेअसर हो गए। ट्रम्प इसे लेकर ही भारत पर हमलावर हैं। ऐसे में कूटनीतिक मोर्चेबंदी मजबूत करने का दांव खेलकर भारत ने ये दिखा दिया कि वह अमेरिका के अनुचित दबाव में झुकने के बजाय उसका सामना करने तैयार है। प्रधानमंत्री द्वारा प्रदर्शित दृढ़ता का ही परिणाम है कि जिन उद्योगपतियों को अमेरिका द्वारा आयात शुल्क बढ़ाये जाने से नुकसान होने का अंदेशा है वही इसे अवसर मानकर सरकार के साथ खड़े हैं। आम जनता भी यही चाहती है कि भारत इस संकट का सामना साहस के साथ करे।  श्री मोदी द्वारा आज दिये बयान से इतना तो स्पष्ट हो ही गया कि भारत ट्रम्प के गैर जिम्मेदाराना व्यवहार से उत्तेजित हुए बिना अपने हितों की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ा रहेगा। किसी शक्तिशाली राष्ट्र की यही पहिचान भी है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी


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