म.प्र में सीहोर जिले के पं. प्रदीप मिश्रा पिछले कुछ वर्षों से चर्चाओं में हैं। कुबेरेश्वर धाम नामक प्राचीन धर्मस्थान उनका कार्यक्षेत्र है। 2022 में उनके द्वारा रुद्राक्ष महोत्सव शुरू किया गया जिससे कुबेरेश्वर की ख्याति दूर - दूर तक फैलने लगी। लेकिन उनके प्रत्येक आयोजन में अव्यवस्था का बोलबाला आम हो चला है। पं. मिश्रा साधारण पूजा - पाठ से बढ़ते - बढ़ते नामी - गिरामी या यूँ कहें कि पांच सितारा शख़्सियत बन गए। बड़े प्रवचनकार होने के कारण राजनेता भी उनके प्रति आकर्षित होने लगे। और फिर जिन धर्मगुरुओं या प्रवचनकारों के पास नेताओं की आवक बढ़ती है , शासकीय अधिकारी भी उनकी भक्त मंडली में शामिल हो जाते हैं। परिणामस्वरूप उन्हें बिना कुछ किये वी.आई.पी की हैसियत मिल जाती है। पं. मिश्रा भी उसी श्रेणी में आ चुके हैं। इसीलिए उनके आयोजनों में होने वाली बदइंतजामी पर शासन और प्रशासन आँखें मूँद लेते हैं। जबरदस्त भीड़ और वाहनों की असीमित संख्या से भोपाल - इंदौर मार्ग में लंबा जाम लगने से आवागमन बाधित हो जाता है। लेकिन सबसे बड़ी बात जो पं. मिश्रा द्वारा किये जाने वाले धार्मिक आयोजनों के साथ स्थायी रूप से जुड़ गई वह है उनमें होने वाली मौतें। लाखों की भीड़ पवित्र रुद्राक्ष प्राप्त करने के साथ ही पं.मिश्रा के दर्शन की अभिलाषा से जमा तो हो जाती है किंतु उसके भोजन, पेयजल, आवास आदि की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से धक्का - मुक्की होती है जिसमें अनेक श्रद्धालु अपनी जान गँवा बैठते हैं। बीते कुछ दिनों से वहाँ कांवड़ यात्रा में शामिल होने आये लाखों श्रद्धालुओं को भी पिछले आयोजनों की तरह से ही भारी कष्ट उठाने पड़े और आधा दर्जन मौतें भी हो गईं। पं. मिश्रा ने पहले तो इस पर औपचारिक दुःख व्यक्त कर दिया किंतु जब चौतरफा आलोचना हुई तो मृतकों को अपने परिवार का हिस्सा बताकर अपनी संवेदनशीलता प्रदर्शित की। इधर राजनीतिक जगत संभलकर प्रतिक्रिया दे रहा है। जिनके मिश्रा जी से मधुर रिश्ते हैं उनकी मानें तो ये सब होता रहता है। इतनी बड़े जनसमूह के एकत्र होने से धक्का - मुक्की और अन्य प्रकार की अव्यवस्था उनकी नजर में सामान्य घटना है। राजनेताओं के लिए भीड़ चूंकि प्राणवायु की तरह होती है इसलिये जो भी भीड़ जुटा सके वह उनकी नजर में महत्वपूर्ण हो जाता है। और ये बात केवल कुबेरेश्वर वाले पं. मिश्रा नहीं बल्कि उन जैसी अन्य आध्यात्मिक शख्सियतों पर भी लागू होती है जिनके आयोजनों में आजकल राजनेताओं से अधिक जनता जमा होने लगी है। यही वजह है कि कुबेरेश्वर में लगातार हो तरह हादसों के बावजूद शासन - प्रशासन दोनों ने समुचित व्यवस्थाओं के लिए जरूरी कदम नहीं उठाये। वहाँ आये लोगों में पं. मिश्रा के साथ ही पुलिस और प्रशासन के प्रति जिस प्रकार से नाराजगी दिखाई दी वह किसी अकल्पनीय स्थिति को जन्म दे सकती थी क्योंकि समाजविरोधी तत्व ऐसे आयोजनों में कारस्तानी दिखाने से बाज नहीं आते। बहरहाल, कुबेरेश्वर में बीते कुछ दिनों में जो कुछ भी हुआ उससे एक बात तो स्पष्ट है कि पं. मिश्रा भले ही अच्छे प्रवचनकार हों और उनका आध्यात्मिक ज्ञान भी उच्चस्तरीय हो किंतु बड़े आयोजनों के प्रबंधन में वे बेहद कमजोर हैं। काफी पहले से प्रचार कर लाखों लोगों का जमावड़ा कर लेने के बाद उनके भोजन - आवास आदि को भगवान भरोसे छोड़ देना बेहद गैर जिम्मेदाराना और शर्मनाक है। मिश्रा जी के साथ ही स्थानीय प्रशासन भी बराबरी का कसूरवार है जिसने कुबेरेश्वर में पिछले आयोजनों में हुई मौतों और अव्यवस्था के बाद भी समुचित कदम नहीं उठाये। हमारे देश में आस्था का अतिरेक दिन ब दिन बढ़ते जाने से धार्मिक आयोजन कुप्रबंध के लिए कुख्यात होते जा रहे हैं। कुबेरेश्वर के अलावा भी अन्य धार्मिक स्थलों पर ऐसे ही हादसे होना आम बात है। जैसा कि प्रारंभ में कहा गया चूंकि नेता और नौकरशाह भी प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर ऐसे आयोजनों से जुड़े होते हैं इसलिये उनमें होने वाली तमाम गलतियाँ नजरंदाज कर दी जाती हैं। यदि व्यवस्था का यही स्तर बना रहा तब कुबेरेश्वर के भावी आयोजनों में भी श्रृद्धालु धक्के खाने मजबूर होंगे और रुद्राक्ष की चाहत में कुछ लोगों को मौत नसीब होती रहेगी।
- रवीन्द्र वाजपेयी
No comments:
Post a Comment