सही बात ये है कि यूक्रेन का जो हिस्सा रूस ने कब्जा लिया उसे तो वह लौटाने वाला नहीं क्योंकि उसको यूरोप के साथ व्यापार करने के लिए जो समुद्री मार्ग चाहिए उस तक पहुँच यूक्रेन से ही संभव है। इसलिये चाहे ट्रम्प जोर लगा लें या जिनपिंग, रूस जहाँ तक बढ़ चुका उससे पीछे हटने वाला नहीं है। पुतिन समझ चुके हैं कि अमेरिका इस लड़ाई से पीछा छुड़ाने के लिए बेचैन है क्योंकि इजरायल और हमास के बीच की लड़ाई ही उसके लिए बोझ बनने लगी है। वहीं यूरोप में इतनी दम नहीं कि वह लंबे समय तक जेलेंस्की की अंतहीन जरूरतें पूरी कर सके। ट्रम्प की मुश्किल ये है कि टैरिफ के नाम पर वे जो रायता फैला चुके हैं वही उनसे समेटते नहीं बन रहा।
विश्व राजनीति में आने वाले महीने काफी उथलपुथल भरे होंगे।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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