Saturday, 2 August 2025

राहुल द्वारा एटम बम फोड़े जाने का इंतजार

कांग्रेस नेता राहुल गाँधी इन दिनों चुनाव आयोग पर हमलावर हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद से ही वे वोटों की चोरी का रोना रोते फिर रहे हैं। उधर चुनाव आयोग का कहना है कि उसके बुलाने पर श्री गाँधी आते नहीं और न ही पत्रों का जवाब देते हैं। पहले विपक्ष की ओर से ईवीएम में गड़बड़ी का शोर मचाकर मतपत्रों से मतदान करवाने का दबाव बनाया जाता रहा। लेकिन चुनाव आयोग ने ऐसे सभी दलों को बुलाकर आरोप साबित करने कहा तब कोई नहीं पहुंचा। बिहार में मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण के बाद 65 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम कट जाने से भी विपक्ष भन्नाया हुआ है । संसद इसके कारण चल नहीं पा रही । सर्वोच्च न्यायालय में भी याचिकाएँ विचाराधीन हैं। आयोग ने मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन कर आपत्तियाँ आमंत्रित की हैं जिसके बाद अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। लेकिन राहुल बीते कुछ दिनों से ये दावा करते आ रहे हैं कि उनके पास चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों में गड़बड़ियों के पुख्ता प्रमाण आ गए हैं। संभवतः ये कर्नाटक का मामला है जो उनके अनुसार छह महीने तक की गई खोजबीन के बाद उजागर हुआ है। बकौल श्री गाँधी ये एटम बम है  जिसके फूटने के बाद चुनाव आयोग मुँह दिखानें लायक  नहीं रह जाएगा। इसी के साथ उन्होंने आयोग के कर्मचारियों को धमकी दे डाली कि गड़बड़ी करने पर उन्हें बख्शा नहीं जाएगा भले ही वे सेवा निवृत्त हो चुके हों। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आयोग ने अपने अमले को निडर होकर कार्य करते रहने का निर्देश दिया। मतदाता सूचियों में गड़बड़ी के  आरोप नई बात नहीं है। चूंकि इसका काम सरकारी कर्मचारी करते हैं जिनकी चुनाव  ड्यूटी की तरह  इस कार्य में भी कोई रुचि नहीं होती।  ऐसे में कुछ नाम छूटना तो आम है किंतु जबसे बी.एल.ओ नामक व्यवस्था हुई तबसे इस तरह की गड़बड़ी कम होने लगी। इसी तरह मतदाता पर्चियाँ घर - घर पहुंचाए जाने से मतदान के प्रति उत्साह भी बढ़ा है। लेकिन बड़े पैमाने पर अतिरिक्त नाम जोड़ने की शिकायतें जैसी श्री गाँधी बता रहे हैं , गले नहीं उतरती। जो लोग काम - धंधे के सिलसिले में बाहर रहते हैं उनके नाम दो अलग शहरों या राज्यों में बतौर मतदाता दर्ज होने के तो प्रकरण जरूर हैं। बिहार में  पुनरीक्षण के दौरान काटे गए लोगों में ऐसे मतदाता भी हैं। लेकिन श्री गाँधी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में लाखों  नाम जोड़कर चुनाव चोरी करने का जो आरोप लगाते रहते हैं उसका ठोस प्रमाण वे आज तक नहीं दे सके। चुनाव आयोग ऐसे आरोपों पर खुलकर कहता आया है कि सबूत है तो चुनाव याचिका लगाएं या अदालत में शिकायत दर्ज करवाएं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उनके द्वारा कही गई बातों में गंभीरता और प्रामाणिकता की अपेक्षा रहती है। ऐसे में वे जिस एटम बम का हल्ला मचा रहे हैं उसे फोड़ने में विलंब क्यों किया जा रहा है ये सवाल उठ खड़ा होता है। यदि जैसा वे कह रहे हैं वैसा है तब उन्हें ज्यादा प्रतीक्षा नहीं करना चाहिए और बिहार की मतदाता सूचियों के अंतिम प्रकाशन के पहले धमाका कर अपनी विश्वसनीयता कायम करना चाहिए। साथ ही  वे सरकार और आयोग पर चाहे जितने हमले करें किंतु उसके कर्मचारियों और अधिकारियों को परिणाम भुगतने की धमकी देना  शोभनीय नहीं है। हालांकि आजकल चुनावों के दौरान विपक्षी नेताओं द्वारा सरकारी अमले को इस तरह से डराने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है किंतु चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। यदि यही चलन जारी रहा तो भविष्य में न्यायपालिका पर भी इसी तरह दबाव बनाया जाने लगेगा। बहरहाल श्री गाँधी ने जिस एटम बम को फोड़ने की धमकी चुनाव आयोग को दी उसके धमाके का पूरा देश इंतजार कर रहा है। लेकिन उन्हें ये ध्यान रखना होगा कि यदि वह बम फुस्स निकला तब उसके नुकसान से वे और कांग्रेस दोनों बच नहीं सकेंगे। 


- रवीन्द्र वाजपेयी


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