प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वाधीनता दिवस पर लालकिले की प्राचीर से अपने उद्बोधन में वैसे तो बहुत सी घोषणाएं कीं किंतु आम जनता को जिसने सबसे ज्यादा खुश किया वह थी जीएसटी की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव करते हुए आम उपभोक्ताओं पर सीधे असर डालने वाली चीजों पर जीएसटी कम करना। जो संकेत मिले हैं उनके अनुसार 12 और 28 प्रतिशत की दो दरें समाप्त कर दी जाएंगी। हानिकारक और रईसों के उपयोग में आने वाली महंगी कारों जैसी चीजों को 40 फीसदी की नई दर के दायरे में लाया जाएगा। प्रधानमंत्री ने इसे जीएसटी सुधार का नाम दिया है। जैसी कि जानकारी है उसके अनुसार सितंबर के प्रारंभ में ही जीएसटी काउंसिल की बैठक में इन सुधारों को लागू करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उल्लेखनीय है प्रधानमंत्री ने जीएसटी सुधारों के जरिये देश की जनता को दीपावली पर उपहार देने कहा है। चूंकि दीपावली इस वर्ष अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में पड़ रही है इसलिये ये माना जा सकता है कि जीएसटी काउंसिल की बैठक के तत्काल बाद परिवर्तित दरें लागू हो जाएंगी जिससे उपभोक्ता बाजार में चीजों के दाम काफी घटेंगे और महंगाई भी कम हो जाएगी। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार 12 फीसदी जीएसटी वाली 99 प्रतिशत चीजें 5 फीसदी में शामिल हो जाएंगी जिससे आम उपभोक्ता को जबरदस्त लाभ होगा। 18 प्रतिशत वाली कुछ वस्तुओं और सेवाओं पर भी जीएसटी घटाने की खबर है। जीवन और स्वास्थ्य बीमा को या तो जीएसटी से मुक्त कर दिया जाएगा अथवा 5 फीसदी की सूची में शामिल कर बीमा करवाने वालों को राहत दी जाएगी। वर्तमान में इन पर 18 फीसदी जीएसटी लगने का भारी विरोध होता रहा है। गत वर्ष केन्द्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को स्वास्थ्य बीमा को जीएसटी से मुक्त रखने हेतु पत्र भी लिखा था। दोपहिया और सस्ती कारों पर जीएसटी घटने के साथ ही घरेलू उपकरणों और रोजमर्रे की चीजों पर 5 फीसदी जीएसटी लगने से इनकी मांग बढ़ेगी जिससे उनका उत्पादन करने वाली इकाइयों का व्यवसाय भी बढ़ेगा। प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद आज शेयर बाजार खुलने पर सूचकांक ने जबरदस्त उछाल मारकर जीएसटी सुधारों के फैसले का स्वागत कर ये संकेत दे दिया कि इनके लागू होते ही अर्थव्यवस्था और तेज रफ्तार से दौड़ेगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार बीते दो साल से इस दिशा में विमर्श जारी था। रही बात जीएसटी की एक ही दर की तो उसके लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा। जीएसटी से होने वाली कमाई जिस तेजी से साल दर साल बढ़ती गई उसके बाद इस तरह का फैसला पूरी तरह अपेक्षित था। हालांकि इसे राजनीतिक दाँव कहना गलत नहीं होगा। हमेशा चुनाव की तैयारी करते रहने वाले श्री मोदी के निर्णयों का समय काबिले गौर होता है। स्मरणीय है दिल्ली विधानसभा चुनाव के पहले केन्द्रीय बजट में आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर 12 लाख कर दी गई वहीं 70 साल के सभी वरिष्ट नागरिकों को 5 लाख रुपये की मुफ्त स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल करने का ऐलान भी किया गया। इनका असर राष्ट्रीय राजधानी के मतदाताओं पर किस हद तक पड़ा ये चुनाव परिणामों से स्पष्ट हो गया। कहा जा रहा है विपक्ष चुनाव आयोग के विरुद्ध आंदोलन में उलझा हुआ है और इधर प्रधानमंत्री ने बिहार चुनाव के महीनों पहले जीएसटी सुधार के रूप में सीधे आम उपभोक्ता को खुश करने का काम कर डाला। ये ऐसा निर्णय है जिसका विरोध विपक्ष नहीं कर सकता क्योंकि वैसा करना अपने पैरों में कुल्हाड़ी मारने जैसा होगा। लेकिन राजनीति से परे हटकर देखें तो यह भले ही देर से लिया गया निर्णय है किंतु प्रधानमंत्री द्वारा स्वाधीनता दिवस पर जीएसटी संबंधित जो घोषणा की गई वह हर दृष्टि से जनहितैषी होने से स्वागतयोग्य है। जीएसटी को लेकर राहुल गाँधी अक्सर आलोचनात्मक टिप्पणी किया करते हैं। लेकिन प्रारंभिक अनिश्चितताओं के बाद अब ये कहा जा सकता है कि इस प्रणाली से कर व्यवस्था में अकल्पनीय सुधार हुआ जिसका प्रमाण उसकी वसूली में लगातार वृद्धि होते रहने से मिला। दरें कम होने से राजस्व की हानि की आशंका भी निराधार है क्योंकि बाजार में मांग बढ़ने से उत्पादन और खपत दोनों उसी अनुपात में बढ़ेंगे जिससे जीएसटी से आय की वर्तमान स्थिति में और सुधार ही होगा।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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