भारत द्वारा जापान को पीछे छोड़ विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाना गौरव का विषय है। जिस गति से हम बढ़ रहे हैं उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि जल्द ही जर्मनी से भी आगे निकलकर भारत तीसरे स्थान पर आ जाएगा और तब केवल अमेरिका और चीन ही हमसे आगे होंगे। इस वर्ष जो रफ्तार है उसके आधार पर दुनिया भर की प्रतिष्ठित रेटिंग एजेंसियों का अनुमान है कि भारत औसतन 6.5 फीसदी की दर से विकास करते हुए दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ रही अर्थव्यवस्था होने का श्रेय अपने नाम बनाए रखेगा। निश्चित रूप से ये उपलब्धि सुखद एहसास कराती है। भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा में जो वृद्धि बीते एक दशक में हुई उसके पीछे विकास दर की तेज रफ्तार ही है। लेकिन इस गौरवशाली उपलब्धि के बावजूद ये खबर शर्मिंदा करती है कि लगातार देश के सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार जीतने वाले इंदौर के एक आवासीय इलाके में दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण हजारों लोग बीमार हो गए और 8 की मृत्यु भी हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार वहां की पाइप लाइन खराब होने के बावजूद बदली नहीं गई जबकि चार महीने पहले उसकी निविदा जारी हो चुकी थी किंतु नगर निगम की निकम्मी नौकरशाही ने उन्हें खोलने का कष्ट नहीं उठाया। अब हजारों लोग दूषित पानी पीकर बीमार हुए और मौतें भी हो गईं तब जाकर भ्रष्ट व्यवस्था की कुंभकर्णी नींद खुली और निविदाएं खोली गईं। बीते कई दिनों से गंदा पानी नलों में आने की शिकायत के बाद भी नगर निगम के हुक्मरान लापरवाह बने रहे। यदि दूषित जल से लोगों की जान नहीं जाती तब मामले पर लीपापोती कर दबा दिया जाता किंतु समाचार माध्यमों ने जब पर्दाफाश किया तब प्रशासनिक अमला हरकत में आया। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की मानें तो एक भी मौत नहीं हुई जबकि इंदौर के एकछत्र नेता और प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने ही 2 - 3 लोगों के मरने की बात मानी है। स्मरणीय है वे यहां के महापौर भी रह चुके हैं। इंदौर प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी कहलाता है। स्वच्छता सर्वेक्षण में अनेक वर्षों से देश का सबसे अग्रणी शहर होने के कारण पूरे देश में इसकी सकारात्मक छवि बनी थी । लेकिन प्रदूषित पेय जल के कारण हजारों लोगों के बीमार होने और कुछ की जान चली जाने की घटना ने उस छवि को बट्टा लगा। दिया। इंदौर के महापौर पद पर आसीन पुष्यमित्र भार्गव काफी लोकप्रिय और कार्यकुशल माने जाते हैं । और तो और वहां के प्रभारी मंत्री प्रदेश के मुख्यमंत्री ही हैं। उसके बाद भी क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की निविदा जारी होने के बावजूद महीनों तक उसके बारे में फैसला न लिया जाना आपराधिक उदासीनता के अलावा और कुछ नहीं है। जिन अधिकारियों के कारण ये दर्दनाक स्थिति उत्पन्न हुई उन्हें इतनी कड़ी सजा मिलनी चाहिए जिससे पूरे प्रदेश के स्थानीय निकायों में बैठी नौकरशाही दहशत में आए। जहां एक तरफ भारत अंतरिक्ष की ऊंचाई नापने का कारनामा कर रहा है वहीं हम दूसरी तरफ अपनी जनता को पीने योग्य साफ पानी उपलब्ध करवाने में नाकाम साबित हों तो ये डूब मरने वाली बात है। यद्यपि प्रदूषित पेय जल केवल इंदौर नहीं अपितु ज्यादातर शहरों की समस्या है। इसके कारण सामान्य तौर पर लोगों को आंत्रशोध और पीलिया जैसी बीमारियां होने की खबरें आया करती थीं किंतु इंदौर नगरनिगम की लापरवाही ने निर्दोष लोगों को मौत के मुंह में धकेल दिया जो कि बेहद चिंता और डर पैदा करने वाला है। इसकी जांच भी चूंकि सरकारी अमला ही करेगा इसलिए उसमें अपनी बिरादरी के लोगों को बचाने का भरपूर प्रयास होना तय है। वैसे भी इंदौर जैसे महत्वपूर्ण शहर की नगर निगम में पदस्थ बड़े अधिकारी भी सत्ता प्रतिष्ठान के चहेते ही होंगे। बावजूद इसके प्रदेश के सबसे बड़े शहर में अशुद्ध पेय जल से लोगों के मरने की स्थिति बन जाए तब दुख के साथ ही गुस्सा भी आता है। लेकिन सवाल वही है कि लोग अपना गुस्सा उतारें भी तो किस पर क्योंकि नेताओं और नौकरशाहों के बीच अघोषित गठबंधन के आगे सब लाचार हैं।
- रवीन्द्र वाजपेयी