ऑस्ट्रेलिया एक शांतिप्रिय देश है।जहाँ आबादी के अनुपात में जमीन ज्यादा होने से वहाँ की सरकार विदेशियों को आकर बसने के लिए प्रोत्साहित करती है। कभी ब्रिटिश उपनिवेश रहा ऑस्ट्रेलिया भले ही यूरोप से हजारों किलोमीटर दूर प्रशांत महासागर क्षेत्र में स्थित हो किंतु उसके मूल निवासी चूंकि अंग्रेज थे लिहाजा इस देश की भाषा और संस्कृति पर ब्रिटेन की छाया स्पष्ट झलकती है। ज्ञान - विज्ञान, खेल , पर्यटन आदि में इसकी गणना एक विकसित देश के तौर पर होती है। गत दिवस इस खुशनुमा देश में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरी दुनिया को दहला दिया जब इसके प्रमुख शहर सिडनी के समुद्र तट पर सैकड़ों यहूदी अपना परंपरागत त्यौहार हनुक्का मनाने जमा थे। लेकिन हर्षोल्लास का माहौल मातम में बदल गया जब दो लोगों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। रविवार होने से समुद्र तट पर सैलानियों का भी जमावड़ा था। गोलियों की आवाज सुनते ही भगदड़ मच गई किंतु 11 यहूदियों को जान से हाथ धोना पड़ा । घटनास्थल पर मौजूद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक हमलावर मारा गया जबकि दूसरे को पकड़ लिया गया। दोनों पिता - पुत्र हैं और पाकिस्तानी मूल के हैं। चूंकि उन्होंने यहूदियों को ही निशाना बनाया इसलिए स्पष्ट है कि उनका संबंध किसी बड़े मुस्लिम आतंकवादी संगठन से है। हमलावर जानते थे कि यहूदी अपना पर्व मनाने एकत्र होंगे और वहाँ उन पर हमला करना आसान होगा। स्मरणीय है पाकिस्तान प्रवर्तित आतंकवादियों द्वारा कुछ महीनों पहले भारत की कश्मीर घाटी के पहलगाम नामक पर्यटन स्थल पर जमा सैलानियों के बीच भी इसी तरह की गोलीबारी करते हुए दर्जनों लोगों की हत्या कर डाली थी। उसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर नामक सैन्य कारवाई करते हुए पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों के अड्डों को नष्ट किया। गत दिवस सिडनी में हुए हत्याकांड और पहलगाम की आतंकी घटना में ये साम्यता है कि दोनों में धर्म विशेष के लोगों को निशाना बनाया गया। पहलगाम में धर्म पूछकर हिंदुओं को गोली मारी गई जबकि ऑस्ट्रेलिया की घटना में यहूदी निशाने पर थे। पहलगाम हत्याकांड में पाकिस्तानी आतांकियों की भूमिका स्वाभाविक थी क्योंकि कश्मीर को लेकर दोनों देशों में पुराना विवाद है किन्तु आस्ट्रेलिया में रह रहे यहूदियों की हत्या में पाकिस्तानी आतंकवादियों का हाथ चौंकाता है। इससे ये संदेह प्रबल होता है कि संदर्भित कांड किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है। गौरतलब है कि इसराइल और हमास के बीच युद्धविराम के बाद प. एशिया में शांति लौटने लगी थी। गाजा पट्टी को विकसित स्वरूप प्रदान करने पर भी बड़े देश आगे आ रहे हैं। इसराइल के अरब देशों से रिश्ते भी सुधार पर हैं। ऐसे में इस घटना के बाद राख के भीतर दबी चिंगारी दोबारा भड़क सकती है क्योंकि इसराइल यहूदियों और विशेष रूप से अपने नागरिकों की मौत का बदला लेने में जरा भी संकोच नहीं करता। गाजा में हुआ युद्ध भी हमास द्वारा इसराइल पर हमला कर उसके नागरिकों की नृशंस हत्या और उन्हें बंधक बनाये जाने के जवाब में हुआ। इस लड़ाई में गाजा पट्टी को इसराइल ने पूरी तरह मलबे में तब्दील कर दिया। इसके पहले भी जब - जब कहीं इसराइल के नागरिकों के साथ अमानवीय व्यवहार हुआ उसने बिना डरे उसका बदला लिया। ये देखते हुए सिडनी हत्याकांड की प्रतिक्रिया जरूर होगी। यदि हमलावरों का पाकिस्तानी संबंध साबित हो गया तो फिर वह भी इसराइल के गुस्से से शायद ही बच पायेगा। इस घटना ने इस्लाम और आतंक के अंतरंग रिश्ते को एक बार फिर से प्रमाणित कर दिया है। जिन पश्चिमी देशों ने हाल ही में स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र का समर्थन किया उनके मुँह पर भी इस घटना ने कालिख पोत दी। इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने जिस तल्खी के साथ ईरान सहित कुछ इस्लामिक देशों पर आरोप लगाए उसे देखते हुए बड़ी मुश्किल से शांत हुआ प. एशिया दोबारा धधक सकता है। इस घटना के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भी पाकिस्तान के प्रति अपने प्रेम पर पुनर्विचार करना चाहिए वरना जो कल ऑस्ट्रेलिया में हुआ वह अमेरिका में भी होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। इसी के साथ ही यूरोप के उन देशों को भी सावधान हो जाना चाहिये जो मुस्लिम शरणार्थियों को अपने यहाँ बसाने की भयंकर गलती कर बैठे। ऑस्ट्रेलिया की उक्त घटना में इस्लामिक आतंकवाद के विश्वव्यापी फैलाव का संकेत छिपा हुआ है ।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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