Saturday, 13 December 2025

म.प्र सरकार के दो साल : भ्रष्टाचार और नौकरशाही की निरंकुशता पर रोक जरूरी


म.प्र की वर्तमान सरकार को दो वर्ष पूरे हो गए। गत दिवस मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए नक्सली आतंक की समाप्ति का दावा किया वहीं भावी लक्ष्यों को भी स्पष्ट किया जिनमें नशा मुक्ति और नदियों को जोड़ने जैसे कार्य हैं। विगत दो सालों में म.प्र में निवेश हेतु दर्जनों अनुबंध हस्ताक्षरित हुए। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में तो निवेशक सम्मेलनों का आयोजन किया ही , दूसरे प्रदेशों में जाकर भी प्रदेश के औद्योगिक विकास हेतु पूंजी लगाने के इच्छुक निवेशकों को आमंत्रित किया। विदेश यात्राओं के माध्यम से भी उन्होंने म.प्र के विकास की संभावनाओं को जमीन पर उतारने की पुरजोर कोशिशें कीं। इसके अलावा शिक्षा , स्वास्थ्य , सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकतों को पूरा करने की दिशा में भी उनके प्रयास चर्चा में रहे। अपने पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तरह से ही डॉ. यादव भी बेहद गतिशील हैं। सचिवालय में बैठे - बैठे सरकार चलाने के बजाय वे पूरे प्रदेश में भ्रमण करते हुए जनता के सीधे संपर्क में रहते हैं। इसका लाभ क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने के रूप में मिलता है। मुख्यमंत्री के पास भारी बहुमत होने से सरकार के स्थायित्व को कोई संकट नहीं है। भाजपा चूंकि संगठन आधारित राजनीतिक दल है इसलिए पार्टी के भीतर भी उनके विरुद्ध  मोर्चेबंदी की कोई गुंजाइश नहीं है। भाजपा के पितृ संगठन कहे जाने वाले रा. स्व. संघ से भी डॉ. यादव का जुड़ाव सर्वविदित हैं। यही वजह है कि उनका दो वर्षीय कार्यकाल बिना किसी बाधा के पूरा हो गया। मुख्यमंत्री को शासन और प्रशासन का भी अच्छा - खासा अनुभव है । यद्यपि बीच - बीच में उनको अस्थिर करने की हवा उड़ती रही किंतु पार्टी हाइकमान का भरोसा बने रहने से वे पद पर बने हुए हैं। जहाँ तक दो वर्ष के कार्यकाल की समीक्षा का है तो ये कहना गलत नहीं होगा उन्होंने शिवराज सरकार द्वारा तैयार प्रदेश के विकास की कार्ययोजना को आगे बढ़ाने में सफलता हासिल की है। वहीं सामाजिक क्षेत्र की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को  जारी रखकर भाजपा के चुनावी वायदों को पूरा करने की प्रतिबद्धता दर्शाई है। लेकिन उपलब्धियों की चर्चा मात्र से विगत दो वर्ष के कार्यकाल का मूल्यांकन पूरा नहीं होगा। इसके लिए उन बिंदुओं पर भी प्रकाश डालना होगा जिन पर प्रदेश सरकार को विशेष तौर पर ध्यान देना होगा। और उनमें मुख्य हैं भ्रष्टाचार उन्मूलन और दूसरा नौकरशाही में व्याप्त असंवेदनशीलता दूर करना। आये दिन विभिन्न जाँच एजेंसियां भ्रष्ट सरकारी कर्मियों को रंगे हाथ पकड़ती हैं। उनके पास अकूत संपत्ति का मिलना इस बात का प्रमाण है कि  भ्रष्टाचार निचले पायदान तक फैल चुका है। दूसरी जिस बात पर प्रदेश के मुखिया के तौर पर मुख्यमंत्री को विशेष तौर पर ध्यान देना चाहिये वह है नौकरशाही में व्याप्त असंवेदनशीलता जिसके चलते सरकारी मशीनरी खास तौर पर अधिकारी वर्ग निरंकुश हो चला है। इतने विशाल बहुमत वाली सरकार होते हुए भी प्रशासनिक अधिकारियों में अंग्रेजी राज वाली मानसिकता  सवाल खड़े  करने के लिए पर्याप्त है। बीते दो वर्षों के कालखंड में मुख्यमंत्री को प्रदेश की स्थिति का पूरा - पूरा ज्ञान हो गया होगा। प्रशासनिक अमले से आम जनता को होने वाली तकलीफों की जानकारी भी उन तक पहुंचती ही होगी। ऐसे में अब उन्हें नौकरशाही की जवाबदेही तय करने के लिए कारगर कदम उठाने पड़ेंगे। हालांकि मुख्यसचिव के रूप में मुख्यमंत्री के पास बहुत ही कुशल और अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी है किंतु जिला स्तर पर भी वैसी ही कसावट आवश्यक है । अपने शेष कार्यकाल में डॉ. यादव के लिए प्रदेश को देश के विकसित राज्यों के समकक्ष खड़ा करने की चुनौती है। हालांकि बीते दो दशकों में प्रदेश उस बीमारू राज्य के कलंक को धो चुका है जो दिग्विजय सिंह के दस वर्षीय शासन में लगा था। बिजली, सड़क सहित आधारभूत संरचना के मामले में म.प्र ने निःसंदेह  ऊँची छलांग लगाई है। कृषि क्षेत्र में तो उसकी उपलब्धियां पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों से भी बेहतर हैं। लेकिन उद्योगों के विकास की संभावनाओं को हकीकत में बदलने का कार्य अभी पूरा नहीं हुआ। डाॅ. यादव में ऊर्जा और उत्साह दोनों हैं , जो सफल नेतृत्व की मूलभूत जरूरत है। उम्मीद की जा सकती है कि आगामी वर्ष जब वे अपनी सरकार की तीसरी वर्षगांठ मना रहे होंगे तब उनकी उपलब्धियों की सूची  और बड़ी होगी। म.प्र  में विकास की तमाम अनुकूलताएं हैं जिनका समुचित दोहन चमत्कारिक परिणाम दे सकता है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी


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