Saturday, 6 December 2025

लूट खसोट करने वाली एयरलाइनों पर भी कारवाई होना चाहिए


देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की सेवाएं अवरुद्ध हो जाने से  लाखों यात्रियों को अकल्पनीय  मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों से गुजरना पड़ा । हजारों उड़ानें रद्द होने से जो अफरातफरी मची उसके दृश्य और समाचारों ने हर जिम्मेदार व्यक्ति को चिंता में डाल दिया। इस संकट के लिए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नामक नये नियम को जिम्मेदार बताया जा रहा है जिसके तहत विमान चालक पायलटों को अवकाश और आराम की व्यवस्था है। ये नियम 1 नवंबर से लागू है जिसे बाकी एयरलाइनों ने तो लागू कर लिया किंतु सबसे अधिक विमान और उड़ानों की संख्या चूंकि इंडिगो की है लिहाजा उसे पायलटों  की कमी से जूझना पड़ा जिसका परिणाम उड़ानें रद्द होने के तौर पर दिखाई देने लगा। नवंबर माह से शुरू संकट दिसंबर आते - आते  भीषण रूप ले बैठा और फिर जो हुआ वह देश में हवाई सेवाओं के इतिहास का सबसे खराब अनुभव है। इससे यात्रियों को हुई दिक्कतों की जानकारी तो सर्वविदित है किंतु संकट के इस दौर में बाकी एयरलाइनों ने जो लूट - खसोट की उसे न रोक पाना भी कम असफलता नहीं है। यात्रियों की मजबूरी का लाभ उठाकर दस - बीस गुना किराया वसूलना मानवीयता और नैतिकता के सर्वथा विरुद्ध है। सरकार ने नियम पालन में विफल रहने के लिए इंडिगो पर कार्रवाई करने की जो बात कही वह पूरी तरह उचित है। फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नामक व्यवस्था लागू करने के लिए फरवरी तक की  मोहलत यात्रियों को हुई परेशानी दूर करने के लिए मजबूरी में दी गई किंतु इस अभूतपूर्व संकट के समय जिन एयरलाइनों ने किराये के नाम पर यात्रियों की जेब पर डाका डालने जैसा टुच्चापन दिखाया उनके विरुद्ध भी सख्त कदम उठाये जाने चाहिए जिससे यात्रियों की जरूरतों का लाभ उठाकर मनमाना किराये की लूटमार रोकी जा सके। इंडिगो ही नहीं अन्य एयरलाइनों में भी पायलटों से निर्धारित नियमों से अधिक काम लिया जाता है। ज्यादा कमाई के लालच में निर्धारित क्षमता से अधिक फेरे लगाने के कारण पायलटों की कार्यक्षमता पर बुरा असर पड़ता है। इसी वजह से आये दिन हादसे होते - होते बचते हैं जिनमें यात्रियों की जान के लिए जोखिम उत्पन्न होता है। विमान के पायलट का काम बेहद महत्वपूर्ण होता है। उसकी जरा सी गलती से सैकड़ों यात्रियों की ज़िंदगी खत्म हो सकती है। इसीलिए ये आवश्यक है कि उससे जरूरत से अधिक काम न लिया जाए क्योंकि वह आम कर्मचारी नहीं है। बहरहाल इंडिगो कांड के बाद उड्डयन संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन करवाने की अचूक व्यवस्था के अलावा किरायों की अधिकतम सीमा भी तय होना चाहिए क्योंकि जब उपभोक्ताओं की मजबूरी का लाभ उठाकर कालाबाजारी करने वाला आम व्यवसायी कानून की नजर में अपराधी है तब एयरलाइनों  को ऐसा करने की खुली छूट देने का औचित्य क्या है ? इस बारे में ये बात ध्यान देने योग्य है कि अब हवाई यात्रा केवल धनाड्य वर्ग और नेताओं तक सीमित नहीं रही अपितु मध्यमवर्ग में इसका उपयोग करने का चलन बढ़ा है। इसे देखते हुए एयरलाइनों ने हवाई यात्रा को सस्ता बनाने के लिए आरामदेह सीटें हटाकर साधारण सीटें लगाने के अलावा खान - पान तक पर पाबंदी लगा दी। पानी तक मांगने पर प्रदान किया जाता है। लेकिन किरायों को लेकर होने वाली लूट - खसोट बढ़ती जा रही है। अनेक बार सर्वोच्च न्यायालय तक इस बारे में ऐतराज दर्ज करवा चुका है किंतु इस गोरखधंधे पर रोक लगने के बजाय वह बढ़ता ही जा रहा है। इंडिगो की सेवाएं रुक जाने से जो यात्री अग्रिम भुगतान करने के बावजूद यात्रा से वंचित हो गये उनके पैसे तत्काल लौटाने का दबाव जिस प्रकार सरकार बना रही है उसी तरह उन एयरलाइनों को भी लूटा गया अतिरिक्त किराया लौटाने मजबूर किया जाए जिन्होंने  बेहद असंवेदनशील रवैया दिखाकर यात्रियों का शोषण किया। इसके अलावा देश में बढ़ते उड्डयन व्यवसाय को देखते हुए बड़े पैमाने पर पायलट तैयार करने की कार्ययोजना भी बनाई जाए।  उल्लेखनीय है  अनेक एयरलाइन विदेशी पायलटों की सेवाएं ले रही हैं। इंडिगो को फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन संबंधी नये नियम लागू करने के लिए कुछ महीनों की छूट दिये जाने का कारण भी पायलटों की कमी ही है जिसे दूर करने में कई माह लग जाएंगे। बीते कुछ दिनों में जो पीड़ादायक स्थिति उत्पन्न हुई उसके लिए जिम्मेदार लोगों को समुचित दंड मिलना जरूरी है। इंडिगो देश की सबसे बड़ी एयरलाइन होने के साथ ही समयबद्धता के लिए भी जानी जाती है। लेकिन इसका अर्थ ये नहीं कि वह नियम कानूनों से ऊपर है। उसे भी समय रहते सरकार द्वारा लागू नये नियम का पालन निर्धारित समय सीमा में करना चाहिए था जिसमें असफल रहकर उसने लाखों यात्रियों को हलाकान कर डाला। इस संकट से सरकार को भी सबक लेना चाहिए जिससे ऐसी स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो क्योंकि इससे देश की प्रतिष्ठा पर भी आंच आई है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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