Thursday, 20 June 2024

परीक्षाएं रद्द होने का प्रभाव हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव पर होना तय

क दिन पहले ही संपन्न  यूजीसी - नेट परीक्षा रद्द कर दी गई। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को कुछ गड़बड़ियों की जानकारी मिलने के बाद सीबीआई को जांच भी सौंप दी गई । परीक्षा की नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी। नीट नामक परीक्षा को लेकर अनिश्चितता बरकरार है और जैसी परिस्थितियाँ  हैं उनमें यह परीक्षा भी रद्द की जा सकती है । प्राप्त जानकारी के मुताबिक यूजीसी - नेट में 9 लाख और नीट में लगभग 24 लाख छात्रों द्वारा परीक्षा दी गई। पर्चा लीक होने और ग्रेस अंक जैसे मुद्दों पर नीट परीक्षा का मसला विवादों के बाद सर्वोच्च न्यायालय तक जा पहुंचा वहीं यूजीसी - नेट के रद्द होने का कारण स्पष्ट नहीं है। वैसे उसके पीछे भी पर्चा लीक होना बड़ा कारण हो सकता है। इन दो परीक्षाओं के बाद नेट ( नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) की कार्य कुशलता और ईमानदारी दोनों पर उंगलियाँ उठ रही हैं जो पूरी तरह से सही भी है। इस बारे में सबसे अखरने वाली बात ये है कि नेट के अध्यक्ष डाॅ. प्रदीप जोशी के विरुद्ध केंद्र सरकार ने कोई कारवाई नहीं की जबकि नेट के कारण ही नव नियुक्त शिक्षा  मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को अपना बयान बदलने पर आलोचना झेलनी पड़ी। इसमें दो राय नहीं कि उक्त परीक्षाओं में हुई धांधली के लिए नेट पूरी तरह जिम्मेदार है किंतु इसके साथ ही उन कोचिंग संस्थानों की भी भूमिका है जो छात्रों को परीक्षा में उत्तीर्ण करवाने की गारंटी देकर मोटी रकम वसूलते हैं। सफल छात्रों  के चित्र सहित अखबारों में पूर्ण पृष्ठ के विज्ञापन भी प्रकाशित करवाए जाते हैं। इन कोचिंग संस्थानों के परीक्षा से जुड़े   विभागों से मधुर संबंध होते हैं। जिसका माध्यम जाहिर है सौजन्य भेंट होती है। नीट परीक्षा घोटाले में बिहार के एक मंत्री के अलावा पूर्व उपमुख्यमन्त्री का नाम भी उछल रहा है ।  यदि इसमें सच्चाई निकली तब मामले की गहराई और बढ़ जाएगी। सरकारी नौकरियों के अलावा नीट और यूजीसी - नेट जैसी परीक्षाओं के पर्चे लीक होने अथवा किसी कारण से रद्द होने पर लाखों युवाओं की मेहनत के साथ - साथ उनके अभिभावकों द्वारा खर्च किया जाने वाला धन भी बरबाद होता है। परीक्षा रद्द होने से उन युवाओं की ज़िंदगी का मूल्यवान समय भी नष्ट होता है जिसकी भरपाई संभव नहीं। सबसे बड़ी बात नेट नामक संस्थान की विश्वसनीयता की है जो इन दिनों मिट्टी में  मिल चुकी है। इतने बड़े घोटाले के बाद अब तक उसके मुखिया द्वारा नैतिकता के नाम पर स्तीफे की पेशकश न करना ये साबित करने के लिए पर्याप्त है कि उनमें शर्म नाम की चीज नहीं है। भले ही जाँच में वे निर्दोष निकलें किंतु नेट की अक्षमता तो उजागर हो ही गई जिसके प्रमुख होने के नाते वे अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। आश्चर्य की बात है केंद्र सरकार ने अभी तक डाॅ. जोशी की छुट्टी क्यों नहीं की। बताया जाता है उन पर मौजूदा सरकार की असीम कृपा है जिसके चलते वे यूजीसी ( वि.वि अनुदान आयोग के सदस्य और अध्यक्ष) बनाए गए और फिर नेट का सर्वोच्च पद उन्हें सौंप दिया गया। लेकिन किसी जिले में कोई बड़ी आपराधिक घटना के बाद कलेक्टर और एस.पी को जिस तरह हटा दिया जाता है वैसा ही नेट के मुखिया सहित कुछ वरिष्ट ओहदेदारों के साथ होना चाहिए था। लेकिन केंद्रीय  शिक्षा मंत्री श्री प्रधान ठीक तरह से सरकार का पक्ष तक नहीं रख सके। मोदी सरकार की तीसरी पारी में ये मुद्दा सिर मुड़ाते ही ओले पड़ने की कहावत चरितार्थ कर रहा है। संसद सत्र शुरू होने के पहले ही विपक्ष के हाथ बड़ा मुद्दा लग गया है सत्ता पक्ष को घेरने का। नई लोकसभा में विपक्ष संख्याबल के आधार पर   पूर्वापेक्षा काफी ताकतवर है । ऐसे में सरकार के लिए बचाव करना कठिन होगा क्योंकि उसके पास विपक्ष को शांत करने के लिए कोई संतोषजनक उत्तर अब तक तो नजर नहीं आ रहा। जाँच एजेंसियों को मामले की तह तक पहुँचने में लम्बा वक्त लगेगा। उसके पहले ही  यूजीसी - नेट  परीक्षा दोबारा करवाने की घोषणा हो गई। लेकिन नीट को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है जिसके कारण लाखों युवाओं की साँस ऊपर - नीचे हो रही है और अभिभावक भी मानसिक तनाव में हैं। आने वाले  महीनों में हरियाणा और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं जिनमें विपक्ष इस विषय को उछालकर भाजपा को घेरेगा। इस विवाद से वे युवा भी नाराज हैं जो निकट भविष्य में उक्त परीक्षाओं में बैठने की तैयारी कर रहे हैं और  मतदाता भी हैं। लोकसभा चुनाव में राजस्थान और उ.प्र में सरकारी नौकरियों के लिए आयोजित  परीक्षा  पर्चा लीक होने के कारण रद्द होने से युवा मतदाताओं की नाराजगी भाजपा की सीटें घटने के रूप में सामने आ चुकी है। यदि इस विवाद का समय रहते हल नहीं निकला तो हरियाणा और महाराष्ट्र में भी उ.प्र  और राजस्थान जैसे परिणाम की पुनरावृत्ति हो सकती है। जो युवा इन परीक्षाओं में भाग नहीं लेते वे भी भविष्य की चिंता में डूबकर अपना गुस्सा वोट के रूप में व्यक्त करने से बाज नहीं आयेंगे। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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