Wednesday, 5 June 2024

जनसंख्या नियंत्रण और समान नागरिक संहिता कानून खटाई में पड़ सकते हैं



लोकसभा चुनाव का जो जनादेश आया उसकी व्याख्या सभी अपने - अपने तरीके से कर रहे हैं। हालांकि भाजपा अपने दम पर इंडिया गठबंधन से ज्यादा सीटें जीत गई किंतु मतदाताओं ने उसे स्पष्ट बहुमत से वंचित करते हुए सहयोगी दलों के सहारे सरकार चलाने मजबूर कर दिया। ये परिणाम इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि  भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए को तो बहुमत मिल गया  लेकिन जिन नरेंद्र मोदी के नाम पर उसने पूरा चुनाव लड़ा वे मजबूत होने के बजाय कमजोर हो गए। जहाँ तक बात विपक्ष की है तो उसकी ताकत और हिम्मत दोनों में वृद्धि हुई। अनेक राज्यों में वह श्री  मोदी के विजय रथ को रोकने में कामयाब भी रहा। हालांकि मतदाताओं ने उसे भी सत्ता सौंपने योग्य नहीं समझा। वैसे तो भाजपा को  बहुमत से वंचित करने में कई राज्यों का योगदान रहा किंतु सबसे बड़ी भूमिका उ.प्र ने निभाई जहाँ से खुद प्रधानमंत्री चुनाव लड़ रहे थे। इस  राज्य ने भाजपा से 30 सीटें छीनकर उसकी जीत को फीका कर दिया। अयोध्या स्थित राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद पूरे देश के हिंदुओं में ऐतिहासिक उत्साह परिलक्षित हुआ था। वहाँ  सिर्फ राम मंदिर ही नहीं बना अपितु उसके सौंदर्यीकरण पर अरबों रुपये खर्च कर दिये गए। विश्वस्तरीय  हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन  बनाए जाने से यह उपेक्षित शहर दुनिया भर के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। इसका असर उसकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा। लेकिन अयोध्या के मतदाताओं ने भाजपा को इसका बदला उसके उम्मीदवार को हराकर दिया। ऐसा ही वाराणसी में देखने मिला जो  श्री मोदी का निर्वाचन क्षेत्र है। 2014 में यहाँ से सांसद बन जाने के बाद उन्होंने वाराणसी में विकास की गंगा बहा दी । लेकिन इस बार वे शुरुआत में पिछड़ने के बाद महज डेढ़ लाख मतों से जीत पाए। उ.प्र में कानून व्यवस्था की स्थिति से गुंडे  - मवालियों और उनके संरक्षकों को छोड़कर हर कोई खुश था । लेकिन भाजपा को रोकने के लिए अखिलेश यादव ने राहुल गाँधी के साथ जो गठबंधन बनाया उसकी सफलता से साबित हो गया कि देश की सत्ता का फैसला करने वाले इस राज्य में विकास और सुशासन की बजाय जाति विशेष और मुसलमानों के बीच गठबंधन को ज्यादा पसन्द किया जाता है। आजकल भाजपा भी जातीय समीकरण की सियासत करने लगी है ।  लेकिन चूँकि वह मुसलनानों के तुष्टीकरण पर ध्यान नहीँ देती इसलिए  बिना भेदभाव के सरकारी योजनाओं का भरपूर लाभ उठाने के बाद भी यह समुदाय भाजपा को फूटी आँखों नहीं देखना चाहता। ऐसे में ये कहना बिल्कुल भी गलत नहीं है कि उ.प्र और बाकी सभी राज्यों में मुस्लिम मतदाता भाजपा को हराने के लिए एकजुट हो चुके थे । यहाँ तक कि महाराष्ट्र में उन्होंने उद्धव ठाकरे की पार्टी को भी महज इसलिए समर्थन दिया क्योंकि वह भाजपा के विरोधी खेमे में है। प. बंगाल में 30 फीसदी मुस्लिम आबादी के दम पर ही ममता बैनर्जी का प्रभुत्व बना हुआ है। हालांकि महंगाई, बेरोजगारी, आरक्षण और अग्निवीर जैसे मुद्दे भी भाजपा के लिए नुकसानदेह रहे लेकिन जातियों में बँटा हिन्दू समाज छोटी - छोटी बातों में उलझा रहा वहीं मुस्लिम मतदाताओं ने धर्म को महत्व देते हुए भाजपा की जीत में रुकावट पैदा की और वे  कामयाब भी रहे। अयोध्या में भाजपा की हार और वाराणसी में प्रधानमंत्री की फीकी जीत पर विपक्ष की खुशी तो राजनीतिक है किंतु मुस्लिम समुदाय मन ही मन बेहद खुश है क्योंकि उसने समान नागरिक संहिता और जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने के पहले ही भाजपा से  ऐसे निर्णय लेने की ताकत छीन ली। नीतीश कुमार और चंद्र बाबू नायडू भले ही भाजपा का साथ न छोड़ें किंतु वे भी ऐसे किसी निर्णय में साथ नहीं देंगे जिससे मुसलमान नाराज हो जाएं। हालाँकि विपक्ष के गठबंधन को भी जनता ने सत्ता नहीं सौंपी लेकिन भाजपा के हाथ भी बांध दिये। काँग्रेस ने इस चुनाव में अपनी संख्या दोगुनी कर ली किंतु उसके द्वारा शासित हिमाचल, कर्नाटक और तेलंगाना में वह भाजपा के मुकाबले कमजोर साबित हुई। उ.प्र में जो सफलता उसे मिली उसका श्रेय दरअसल अखिलेश यादव को है जिन्होंने  मुसलमानों के मन में भाजपा के प्रति व्याप्त नाराजगी को एकजुट होने के लिए तैयार किया। भाजपा के लिए ये परिणाम चेतावनी हैं। उसे विकास कार्यों के साथ ही जनता की रोजमर्रे की मुश्किलों को भी समझना होगा। बेरोजगारी दूर करना तो बहुत कठिन है किंतु पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस जैसी चीजों के दाम घटने जरूरी हैं। इसमें दो मत नहीं हैं कि देश का जनमानस अभी भी श्री मोदी के साथ है किंतु ये भी उतना ही सच है कि मुस्लिम समुदाय उनको सत्ता से हटाने के लिए प्रतिबद्ध है। इंडिया गठबंधन को इसी बात का फ़ायदा मिला। यदि कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ तब मोदी सरकार की तीसरी पारी कुछ दिनों में शुरू हो जायेगी किंतु भाजपा भी अपने एजेंडे को कितना लागू कर पाएगी ये बड़ा सवाल है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

No comments:

Post a Comment