Monday, 3 June 2024

एग्जिट पोल से असहमति विपक्ष का अधिकार किंतु प्रतिक्रिया गरिमामय होना चाहिये

नीरस कहे जा रहे लोकसभा चुनाव को एग्जिट पोल के नतीजों ने रोमांचक बना दिया। जिन  सर्वे एजेंसियों के एग्जिट पोल अतीत में सटीक साबित होते रहे उनमें से कुछ ने तो भाजपा के 400 पार वाले  नारे के हकीकत में बदलने की भविष्यवाणी  कर दी। यद्यपि सर्वेक्षण करने वाले भी ये कहते हैं कि वे अनुमान है, परिणाम नहीं। लेकिन  सही पद्धति से किए जाएं तो वे परिणामों के काफी करीब पहुँच जाते हैं। कुछ तो  शत - प्रतिशत सही निकल भी  चुके हैं। बहरहाल, भाजपा और उसके सहयोगियों के लिए तो ये पोल खुशी लेकर आये लेकिन विपक्ष की उम्मीदों पर वज्रापात हो गया। जैसी कि परंपरा है उसने इनको फर्जी बता दिया। पहले तो काँग्रेस पार्टी ने टीवी चैनलों में एग्जिट पोल पर होने वाली चर्चा के  बहिष्कार की घोषणा कर दी। हालांकि बाद में उसके प्रवक्ता उसमें शामिल तो हुए किंतु उनको अस्वीकार  करते हुए विपक्षी गठबंधन की सरकार बनने का दावा करते रहे। आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह के अनुसार एग्जिट पोल भाजपा दफ्तर में बैठकर बनाये गए। राहुल गाँधी ने  भी ऐसी ही टिप्पणी कर डाली।  हालांकि जो भी पक्ष हारता हुआ दिखाया जाता है वह एग्जिट पोल को कभी स्वीकार नहीं करता। बावजूद इसके कि  सभी दल  चुनाव के पहले से ही जनता का मन टटोलने के अलावा प्रत्याशी चयन हेतु भी सर्वेक्षण  एजेंसियों की सेवाएं लेते हैं। चुनावी रणनीति बनाने हेतु भी पेशेवर विशेषज्ञों का भी उपयोग होने लगा है। उदाहरण के लिए 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी का चुनाव अभियान संचालित कर प्रसिद्ध हुए प्रशांत किशोर की सेवाएं बाद में नीतीश कुमार, ममता बैनर्जी, राहुल गाँधी, जगन मोहन रेड्डी और स्टालिन ने भी लीं। लेकिन मतदान के अंतिम चरण के पहले जब उन्होंने अपना आकलन प्रस्तुत करते हुए  भाजपा को 2019 से कुछ ज्यादा और एनडीए को 350 - 360 सीटों की संभावना व्यक्त की तो पूरा विपक्ष उन पर चढ़ बैठा। जबकि श्री किशोर ने 400 पार के भाजपाई दावे का मखौल उड़ाते हुए कहा कि वह. पार्टी कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने के लिए था। गत दिवस  काँग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने ये कहते हुए अपनी हताशा  व्यक्त कर डाली कि गृह मंत्री अमित शाह ने 150 जिला कलेक्टरों को फोन कर मतगणना में गड़बड़ी करने कहा है।  उल्लेखनीय है 1 जून की शाम इंडिया गठबंधन के नेताओं की बैठक के  बाद ये दावा किया गया था कि गठबंधन को 295 सीटें मिलने जा रही हैं। पूरे चुनाव अभियान के दौरान राहुल, प्रियंका, तेजस्वी, अखिलेश और केजरीवाल जैसे नेता भाजपा के 150 सीटों पर  सिमटने का दावा करते  रहे। श्री किशोर के आकलन के फ़ौरन बाद योगेंद्र यादव ने भाजपा को 220 से 250 तक सीमित कर दिया। नतीजों के बाद यदि उक्त अनुमान गलत निकले तब क्या ये नेता इस तरह के ऐलान करना बन्द कर देंगे ? खबर है चुनाव परिणाम के बाद बड़े पैमाने पर अशांति फैलाने की तैयारी भी की जा रही है। ईवीएम पर ठीकरा फोड़ने की तो परंपरा रही है। इसे मानसिक दिवालियापन ही कहा जायेगा क्योंकि कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहाँ एनडीए विरोधी क्षेत्रीय दलों को बड़ी सफलता मिलने की संभावना एग्जिट पोल में बताई जा रही है। काँग्रेस द्वारा केरल में वाम दलों और पंजाब में आम आदमी पार्टी को हराने का अनुमान भी उनमें लगाया गया है। क्या काँग्रेस इसे भी नकारेगी ? कहने का आशय ये है कि विपक्ष को नकारात्मकता की मानसिकता से बाहर निकलना चाहिए। एग्जिट पोल से असहमत होना उसका अधिकार है किंतु उसे भाजपा दफ्तर में बना हुआ बताना हताशा का परिचायक है। ये वही सर्वे एजेंसियां हैं जिन्होंने गत वर्ष कर्नाटक और तेलंगाना में काँग्रेस की भारी विजय की भविष्यवाणी की थी। तब किसी काँग्रेस नेता ने उसकी आलोचना नहीं की। ऐसे में एग्जिट पोल के अनुमानों पर बजाय गैर जिम्मेदाराना रवैया दिखाने के विपक्ष को धैर्य और शांति का परिचय देना चाहिए। पराजय को गरिमा के साथ स्वीकार करने से नेता की परिपक्वता ही झलकती है। 


- रवीन्द्र वाजपेयी

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