काँग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा ने लोकसभा चुनाव के दौरान रायबरेली की एक जनसभा में इस क्षेत्र से नेहरू - गाँधी परिवार के पुराने रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा था कि जब भी आपको लगा कि इस परिवार से गलती हुई तो आपने उसके लिए दंडित भी किया। आगे उन्होंने कहा कि जब आपको इंदिरा गाँधी की कुछ बातें अच्छी नहीं लगीं तो आपने उनको हरा दिया। यद्यपि सुश्री वाड्रा ने इंदिरा जी की पराजय का जिक्र करते हुए आपातकाल का नाम नहीं लिया किंतु बिना कहे ही लोग सब समझ गए। लेकिन जब 18 वीं लोकसभा के स्पीकर चुने जाने के बाद ओम बिरला ने अपने भाषण में आपातकाल को लोकतंत्र और संविधान विरोधी बताते हुए उस दौरान मारे गए लोगों की स्मृति में मौन रखने कहा तो राहुल गाँधी को बेहद नागवार गुजरा। चूंकि इस वर्ष आपातकाल लगे 50 वर्ष पूरे हुए इसलिए लोकसभाध्यक्ष ने सदन में उसका उल्लेख किया। गत दिवस राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी अपने अभिभाषण में आपातकाल को संविधान पर हमला बताया। उसके बाद राहुल कुछ विपक्षी नेताओं को लेकर श्री बिरला से मिले और उनके द्वारा आपातकाल को लेकर कही गई बातों पर रोष व्यक्त करते हुए उसे राजनीतिक करार दिया। रोचक बात ये है कि उनके साथ अन्य विपक्षी नेताओं के अलावा मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश यादव तथा लालू यादव की बेटी मीसा भारती भी रहीं। बताने की जरूरत नहीं कि आपातकाल में मुलायम और लालू दोनों जेल गए थे। स्पीकर से मिलने के बाद अखिलेश ने कहा कि इतनी पुरानी बात को भूल जाना ही बेहतर है। स्मरणीय है पूरे लोकसभा चुनाव में राहुल, अखिलेश और तेजस्वी यादव हाथ में संविधान की पुस्तक लेकर भाजपा पर ये आरोप लगाते रहे कि वह उसे बदलना चाहती है। लेकिन ये नेतागण भूल गए कि कि स्वाधीनता के बाद संविधान की हत्या का पहला प्रयास इंदिरा गाँधी द्वारा किया गया और वह भी अपनी गद्दी बचाने के लिए। पूरे विपक्ष को उन्होंने जेल में ठूंस दिया था। समाचार पत्रों पर सेंसर लगाकर अभिव्यक्ति की आजादी छीन ली गई। लोगों के मौलिक अधिकार तक निलम्बित कर दिये गए। इंदिरा ही भारत और भारत ही इंदिरा जैसा राग दरबारी गूंजने लगा। इसी गलती का उल्लेख प्रियंका ने रायबरेली में किया था जिसके दंड स्वरूप 1977 के लोकसभा चुनाव में पूरे उत्तर भारत के मतदाताओं ने काँग्रेस का सफाया कर दिया। खुद इंदिरा जी भी रायबरेली में हार गईं। आपातकाल के विरुद्ध हुआ अहिंसक संघर्ष भारत के राजनीतिक इतिहास का वह हिस्सा है जिसके बारे में नई पीढ़ी को विस्तृत जानकारी दी जानी चाहिए ताकि उसे संविधान और लोकतंत्र का खात्मा करने रचे गए उस षड्यंत्र की सूत्रधार इंदिरा गाँधी और उनके तानाशाही रवैये की वास्तविकता का पता रहे। स्वाधीनता संग्राम, गाँधी हत्या, बांग्ला देश युद्ध जैसी घटनाओं की याद तो काँग्रेस हमेशा ताजा रखना चाहती है किंतु कश्मीर के भारत में विलय और 1962 में चीनी हमले के समय पंडित नेहरू की गलतियों के अलावा आपातकाल लगाए जाने जैसे कदमों पर विस्मृति की धूल डालने इसलिए आमादा रहती है क्योंकि उनके लिए नेहरू - गाँधी परिवार कठघरे में खड़ा होता है। बतौर नेता प्रतिपक्ष राहुल को सरकार और उसकी नीतियों का विरोध करने का अधिकार है किंतु अतीत में जो गलतियाँ तत्कालीन सत्ताधीशों ने कीं उनकी याद दिलाते रहना इसलिए जरूरी है ताकि कोई दूसरा शासक उनको दोहराने की जुर्रत न कर सके। खुद को समाजवादी कहने वाले अखिलेश ये कैसे भूल गए कि उनके पिता भी इंदिरा जी की तानाशाही के विरुद्ध लड़ने वालों में अग्रणी रहे। यही स्थिति मीसा भारती के बारे में है जिनके पिता लालू यादव आपातकाल की भट्टी में तपकर ही राजनेता बन सके। गठबंधन राजनीति की मजबूरियों में राजनीतिक पार्टियां विरोधी विचारधारा वाले दलों से भी गठबंधन करती हैं। इंडिया नामक विपक्षी गठजोड़ भी उसी का रूप है। ऐसे में राहुल , अखिलेश और तेजस्वी का साथ आना चौंकाता नहीं किंतु उन्हें ये ध्यान रखना होगा कि पूर्व पीढ़ी के संघर्षों को भुला देने से आपकी पहिचान नष्ट हो सकती है। राहुल के साथ लोकसभा अध्यक्ष के भाषण का विरोध करने पहुंचे विपक्षी सांसदों को आपातकाल के बारे में अपनी पितृ पीढ़ी के विचारों को जानना चाहिए। राहुल ने उनको साथ लेकर दरअसल अपनी दादी द्वारा किये गए संविधान और लोकतंत्र को कुचलने के प्रयास को वैधता प्रदान करने की चाल चली। लोकसभा का कार्यकाल बढ़ाने जैसे निर्णय आपातलाल में लिए गए थे। संसद इंदिरा जी के दरबार जैसा बन गया था। सैकड़ों मीसाबन्दी जेलों में चल बसे थे। लाखों परिवारों के कमाने वाले सदस्य के जेल जाने से उनके सामने रोजी - रोटी का संकट उत्पन्न हो गया। भारत की जनता ने उसी का दंड काँग्रेस को दिया था। प्रियंका ने रायबरेली के मतदाताओं को जागरूक बताते हुए इंदिरा जी की हार का जिक्र किया था। क्या राहुल अपनी बहिन के उस भाषण का भी विरोध करेंगे? सही बात तो ये है कि राहुल द्वारा आपातकाल की चर्चा का विरोध करने से काँग्रेस का अपराधबोध उजागर हो गया है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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