विदेशी सूत्रों से दो सनसनीखेज खबरें आई। पहली में अमेरिका की हिंडनबर्ग नामक संस्था द्वारा भारत के विख्यात अडानी समूह से जुड़ी कंपनियों में सेबी प्रमुख माधवी बुच और उनके पति द्वारा किये गए निवेश का खुलासा है। गत वर्ष भी उक्त संस्था ने अडानी समूह द्वारा निवेशकों के साथ धोखाधड़ी किये जाने का खुलासा किया था। परिणाम स्वरूप उसके शेयर धराशायी हो गए और निवेशकों को जबरदस्त नुकसान हुआ। ऐसा लगा कि गौतम अडानी का आर्थिक साम्राज्य तहस - नहस हो जायेगा। वैश्विक पूंजी बाजारों में उनकी प्रतिष्ठा बुरी तरह प्रभावित हुई। उस खुलासे को आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला कहा गया। विपक्ष के हाथ में लोकसभा चुनाव के पहले एक बड़ा हथियार लग गया जिसके जरिये उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कठघरे में खड़ा करने का अभियान छेड़ दिया। संसद का सत्र ठप्प हो गया। विपक्ष जेपीसी से जाँच करवाने पर अड़ गया। लेकिन उसमें तब फूट पड़ गई जब शरद पवार और ममता बैनर्जी ने जेपीसी का विरोध कर दिया। दरअसल राहुल गाँधी चूंकि प्रधानमंत्री की गौतम अडानी से निकटता को जमकर उछालते थे इसलिए उनको हमलावर होने का बेहतरीन अवसर मिल गया। बात सर्वोच्च न्यायालय तक भी गई। हालांकि हिंडनबर्ग के ज्यादातर आरोप फुस्स निकले। इधर अडानी समूह ने निवेशकों के पैसे लौटाने का प्रबंध करते हुए अपनी साख संभाल ली। जिससे उसके शेयरों के भाव फिर चढ़ने लगे और समूह का कारोबार पूर्ववत चलने लगा। हिंडनबर्ग के ताजा खुलासे में निशाना सेबी प्रमुख और उनके पति पर होने से सेबी की निष्पक्षता पर आंच आ सकती है। लेकिन बुच दंपत्ति ने जिस तत्परता से आरोपों का खंडन करते हुए हिँडनबर्ग से स्पष्टीकरण मांग लिया उससे लगता है पिछले खुलासे की तरह ही इसका भी अंत होगा। हालांकि हिंडनबर्ग ने आरोपों की दूसरी किश्त भी जारी कर दी है किंतु सेबी प्रमुख जिस तरह से प्रत्युत्तर दे रही हैं उससे लगता है वे रक्षात्मक होने की बजाय आक्रामक हैं। लेकिन इसी के साथ एक और खुलासा हुआ है। बांग्ला देश के एक पत्रकार ने एक भारतीय टीवी चैनल पर बताया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी लंदन में बांग्ला देश के प्रमुख विपक्षी दल बी.एन.पी की अध्यक्ष खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान से मिले थे और उस मुलाकात में शेख हसीना की तख्ता पलट योजना पर भी चर्चा हुई थी। उनकी माँ खालिदा भ्रष्टाचार के मामले में जेल में थीं किंतु जैसे ही हसीना प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र देकर ढाका छोड़कर भारत आईं त्योंही वहाँ के राष्ट्रपति ने उनकी रिहाई के आदेश दे दिये। खालिदा के बेटे को देश का नया प्रधानमंत्री माना जा रहा है। तारिक भी हसीना सरकार के समय विभिन्न आरोपों से घिरने के बाद लंदन में शरण लेकर रह रहे थे। उनकी और श्री गाँधी की मुलाकात की बात बांग्ला देश के पत्रकार द्वारा उजागर किये जाते ही भाजपा ने राहुल पर उक्त खबर पर स्पष्टीकरण देने की मांग उठा दी। बांग्ला देश में हुए सत्ता परिवर्तन के बारे में जानकारी हासिल करने श्री गाँधी विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मिले थे। सर्वदलीय बैठक में भी उन्होंने शिरकत की किंतु उस घटनाचक्र पर उनकी और कांग्रेस की प्रतिक्रिया संतोषजनक नहीं रही जबकि शेख हसीना और गाँधी परिवार में निकट रिश्ते रहे हैं। लेकिन ऐसे वक़्त में जब उस परिवार पर इतना बड़ा संकट आया हुआ है तब कांग्रेस उसके प्रति उदासीन है। केंद्र सरकार की भूमिका तो कूटनीतिक शिष्टाचार से निर्देशित होती है किंतु विपक्ष के पास खुलकर बोलने का अवसर है। कम से कम बांग्ला देश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के विरुद्ध तो श्री गाँधी को खुलकर बोलना चाहिए था जो इन दिनों भाजपा से हिंदुत्व का मुद्दा छीनने में जुटे हुए हैं। लेकिन बांग्ला देशी पत्रकार द्वारा किये गए खुलासे के बारे में वे मौन क्यों हैं ये बड़ा सवाल है। श्री गाँधी अक्सर विदेश यात्रा पर जाते रहते हैं। कुछ के कार्यक्रम तो सार्वजनिक कर दिये जाते हैं वहीं कुछ पूरी तरह गोपनीय होती हैं। अपनी निजता बनाये रखना उनका अधिकार है किंतु बांग्ला देशी पत्रकार द्वारा जो खुलासा किया गया उसके बारे में श्री गाँधी को अपना स्पष्टीकरण अविलंब देना चाहिए। यदि उन्होंने इसकी जानकारी विदेश मंत्री को दी तो वे यह बताकर भी संदेह से बच सकते हैं। लेकिन चुप्पी उनको संदिग्ध बना देगी। गौरतलब है अपनी मानसरोवर यात्रा से लौटते समय वे बीजिंग में चीन सरकार के नेताओं से मिले थे। सीमा पर चल रहे तनाव के बीच उनका दिल्ली स्थित चीनी दूतावास में जाना भी विवाद का विषय बना था। लेकिन ताजा मामला बांग्ला देश में सत्ता पलट से जुड़ा है इसलिए इसमें उनका स्पष्टीकरण बेहद जरूरी है।
- रवीन्द्र वाजपेयी
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