Thursday, 8 August 2024

सलमान और सज्जन के बयान से टुकड़े- टुकड़े गैंग और नक्सलियों का हौसला बढ़ेगा

यद्यपि पूरा समाचार जगत विनेश फोगाट को  ओलंपिक कुश्ती प्रतियोगिता के फाइनल में 100 ग्राम ज्यादा वजन के कारण अयोग्य घोषित किये जाने में उलझा है किंतु  दो ऐसी खबरें ऐसी भी हैं जिनका संबंध लोकतंत्र से होने पर भी उनको अपेक्षित महत्व नहीं मिला। गत दिवस कांग्रेस के दो नेताओं के बयानों ने  बवाल मचा दिया। पहले थे म.प्र शासन के पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा । उन्होंने  कहा कि श्रीलंका और बांग्ला देश में जनता ने क्रमशः राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री  के आवास में घुसकर लूटपाट की। भारत में भी प्रधानमंत्री की गलत नीतियों के कारण जो जनता सड़कों पर हिलोरें मार रही है वह उनके आवास में घुसकर  कब्जा कर लेगी। प्रदेश शासन में मंत्री रह चुका व्यक्ति इस तरह की बात करे तो दो ही बातें मन में आती हैं। पहली , यह कि उनका मानसिक संतुलन डगमगा चुका है और दूसरी यह कि वे ऐसे किसी षडयंत्र का हिस्सा हैं जो देश को अराजकता की खाई में धकेलने पर आमादा है। उनका बयान सामने आने के साथ ही कांग्रेस के बड़े नेता और देश के विदेश मंत्री रह चुके सलमान खुर्शीद ने भी कह दिया कि भारत में भी बांग्ला देश जैसे हालात बन सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय के बड़े अधिवक्ताओं में उनकी गिनती होती है। उनके पिता खुर्शीद आलम खान  भी केंद्रीय मंत्री और राज्यपाल रहे। देश के तृतीय राष्ट्रपति डाॅ. ज़ाकिर हुसैन उनके नाना थे। सज्जन  सिंह का तो पता नहीं किंतु श्री खुर्शीद ने विदेश में  पढ़कर कानून की उपाधि अर्जित की थी। पूर्व विदेश मंत्री को इतना तो पता होगा कि उन जैसों के  सार्वजनिक बयान का संज्ञान न केवल देश बल्कि विदेशों तक में लिया जाता है। कल ही पाकिस्तान के टीवी चैनलों ने उनके बयान को आधार बनाते हुए चिल्लाना शुरू कर दिया कि  भारत के भीतरी हालात भी अराजकता की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि कांग्रेस पार्टी क्या उक्त बयानों को निजी विचार बताकर अपना पल्ला झाड़ सकेगी? श्री वर्मा तो म.प्र तक ही सीमित हैं किंतु श्री खुर्शीद तो कांग्रेस के बड़े चेहरे रहे हैं। गाँधी परिवार से उनकी निकटता भी सर्वविदित है। यद्यपि वे और उनकी पत्नी लुईस लगातार चुनाव हारने की वजह से जनता से कटे हुए हैं किंतु इस तरह के उनके बयान का प्रभाव कांग्रेस पर पड़े बिना नहीं रहेगा। अतीत में भी श्री खुर्शीद के विवादास्पद बयान पार्टी को मुसीबत में डाल चुके हैं। ये बात सच है कि  उन्होंने  और श्री वर्मा ने बांग्ला देश जैसे अराजक हालात भारत में भी उत्पन्न होने जैसा जो बयान दिया वह उन उपद्रवियों को भड़काने का काम करेगा जो इस देश में संविधान और लोकतंत्र को नष्ट करने पर आमादा हैं। इन नेताओं को ये बात समझना चाहिए थी कि इस देश की  जनता स्वभाव से शांतिप्रिय है। 1977 के  लोकसभा चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह हारी थी। पूरे उत्तर भारत में उसका सफाया हो गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी और उनके पुत्र संजय गाँधी तक हार गए। उस दिन पूरे देश में दूसरी आजादी मिलने जैसा माहौल था। यदि वैसा ही पाकिस्तान या बांग्ला देश में होता तो जनता इंदिरा गाँधी के साथ वैसा ही व्यवहार करती जैसा हम उक्त देशों में देखते हैं। श्रीलंका के राष्ट्रपति और बांग्ला देश की प्रधान मंत्री ने जिन परिस्थितियों में देश छोड़ा उनमें उनका जीवन असुरक्षित था किंतु भारत की जनता उस तरह की हिंसात्मक सोच से सर्वथा दूर है। भ्रष्टाचार में लिप्त अनेक शासकों को जनता ने चुनाव के जरिये सत्ता से उखाड़ फेंका किंतु उनको दंडित करने का जिम्मा अदालत पर छोड़ दिया। केंद्र और राज्य में चुनाव हारते ही प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री अविलम्ब  स्तीफा देकर नई सरकार के गठन का रास्ता साफ कर देते हैं। आज तक ऐसा नहीं हुआ कि चुनाव हारने के बाद किसी भी प्रधानमंत्री या मुख्यमन्त्री ने सत्ता छोड़ने में आनाकानी की हो। श्री खुर्शीद और श्री वर्मा क्रमशः उस केंद्र और राज्य सरकार में मंत्री रहे जिसने चुनाव में हारते ही सत्ता त्यागकर बहुमत हासिल करने वाली पार्टी को सरकार बनाने का अवसर दिया। 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी को कांग्रेस से महज 6 सीटें कम मिलीं। राष्ट्रपति भी उनके कार्यकाल में ही चुने गए थे किंतु सबसे बड़े दल के रूप में कांग्रेस को सरकार बनाने का अवसर मिला। ऐसे अनेक प्रसंगों से भारतीय राजनीति का इतिहास भरा हुआ है। वैचारिक मतभेदों के बावजूद सत्ता परिवर्तन का अधिकार हमारे देश में जनता के पास है। वहीं  सेना देश की रक्षा का काम करती है। किसी प्राकृतिक आपदा या फसाद की स्थिति में भी वह बिन बुलाए नहीं आती। कई बार केंद्र में राजनीतिक अनिश्चितता उत्पन्न हुई। जल्दी - जल्दी चुनाव की नौबत भी आई किंतु सेना ने कभी किसी भी प्रकार से हस्तक्षेप नहीं किया। ये सब देखते हुए श्री खुर्शीद और श्री वर्मा जैसे अनुभवी राजनेताओं का संदर्भित बयान बहुत ही खतरनाक है जो टुकड़े - टुकड़े गैंग के  अलावा नक्सलियों को सिर उठाने प्रोत्साहित करेगा। इसलिये इन दोनों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कारवाई होनी चाहिए वरना इस तरह के अराजक बयान देने वालों की बाढ़ आ जायेगी।  कांग्रेस को भी इन नेताओं को पार्टी से निकाल बाहर करना चाहिए जो इस देश के लोकतांत्रिक चरित्र को नष्ट करने का घिनौना कार्य कर रहे हैं। 


 -रवीन्द्र वाजपेयी

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